ओलावृष्टि ने बदला कृषि उत्पादन का अनुमान, सरसों और गेहूं की फसल हुई प्रभावित

बारिश और ओलावृष्टि के चलते कई इलाकों में सरसों की तैयार फसल खराब होने से इस सीजन में सरसों की कीमतों में इजाफे की संभावना कारोबारी जता रहे हैं. 

ओलावृष्टि ने बदला कृषि उत्पादन का अनुमान, सरसों और गेहूं की फसल हुई प्रभावित
ओलावृष्टि से 14 जिले प्रभावित हुए. इनमें से 10 जिलों में भारी तबाही हुई है.

जयपुर: बारिश और ओलावृष्टि के चलते कई इलाकों में सरसों की तैयार फसल खराब होने से इस सीजन में सरसों की कीमतों में इजाफे की संभावना कारोबारी जता रहे हैं. मंडियों में नई सरसों का आना शुरू हो गया है. हालांकि, कई इलाकों में हुई ओलावृष्टि से फसल तबाह हो गई है. ऐसे में कुल उत्पादन अनुमान का 20 फीसदी हिस्सा खराब रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है. इसका सीधा असर कीमतों पर होगा. 

कई जिलों में गेहूं की फसल को भी नुकसान हुआ है. अब तक जो रिपोर्ट मिली है, उसके अनुसार ओलावृष्टि से 14 जिले प्रभावित हुए. इनमें से 10 जिलों में भारी तबाही हुई है. कई जगह 90 फीसदी तक फसलें खराब हुई हैं.

देश में इस साल खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 29.19 करोड़ टन रहने का अनुमान है. फसल वर्ष 2018-19 में खाद्यान्न का उत्पादन 28.52 करोड़ टन था. गेहूं का उत्पादन इस साल रिकॉर्ड 10.62 करोड़ टन होने की उम्मीद है, जोकि पिछले साल से 26.1 लाख टन अधिक है. राजस्थान में भी सरसों का उत्पादन चालु सीजन में 33 लाख टन रहने का अनुमान है. 

इनमें अलवर में चार लाख 71 हजार टन, भरतपुर में तीन लाख 52 हजार टन और टोंक में तीन लाख 39 हजार टन सरसों उत्पादन की संभावना है. इसके साथ ही गेहूं के उत्पादन में भी पांच फीसदी इजाफे की संभावना कृषि विशेषज्ञों को है, लेकिन अचानक आई ओलावृष्टि ने उत्पादन के संभावित आंकड़ों पर ब्रेक लगा दिया है. राजस्थ्ज्ञान के 14 जिलों में तैयार फसल खराबे की भेंट चढ़ गई है. इनमें 10 जिलों में अधिक नुकसान है. यह सभी जिले इस बार अधिक पैदावार देने वालों की सूची में शामिल थे. 

वहीं, देशभर में रबी सीजन की प्रमुख फसल सरसों के समर्थन मूल्य में 5.35 फीसदी यानि 225 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है. इसे अब 4425 रुपए प्रति क्विंटल की दर से बेचा जा सकेगा. सनफ्लावर के समर्थन मूल्य में 270 रुपए की बढ़ोतरी की गई है. इसका समर्थन मूल्य 5215 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है. वर्तमान सीजन में गेहूं का समर्थन मूल्य 1925 रुपए प्रति क्विंटल घोषित किया गया है. इसमें 85 रुपए की वृद्धि की गई है. रबी सीजन 2019-20 में गेहूं का समर्थन मूल्य 1,840 रुपए प्रति क्विंटल था. 

रबी दलहन की प्रमुख फसल चना का समर्थन मूल्य में 5.51 फीसदी वृद्धि की गई है. पिछले रबी सीजन में चना का समर्थन मूल्य 4620 रुपए प्रति क्विंटल था. इसे बढ़ा कर 4875 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है. सबसे ज्यादा वृद्धि मसूर के समर्थन मूल्य में की गई है. यह लगभग 7.26 फीसदी है. पिछले रबी में इसका समर्थन मूल्य 4,475 रुपए प्रति क्विंटल था. इसमें 325 रुपए बढ़ा कर 4,800 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है. इसके अलावा जौ के समर्थन मूल्य में 5.90 फीसदी की वृद्धि की गई है. 

पिछले रबी सीजन में जौ का समर्थन मूल्य 1440 रुपए प्रति क्विंटल था. इसे बढ़ा कर 1525 रुपए कर दिया गया है. फसल खराब होने से इस बार मंडियों में फसल कीमतों में इजाफा तय माना जा रहा है. मंडी कारोबारियों के अनुसार सरसों और गेहूं में पिछले सीजन के मुकाबले शुरूआती भाव 200 से 300 रुपए प्रति क्विंटल तेज रहेंगे.