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हज यात्री उपभोक्ता नहीं, पैसे की वापसी का दावा नहीं कर सकते : उपभोक्ता आयोग

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने कहा कि हज कमेटी बिना किसी लाभ के इरादे से सेवाएं मुहैया कराती है.

हज यात्री उपभोक्ता नहीं, पैसे की वापसी का दावा नहीं कर सकते : उपभोक्ता आयोग

नई दिल्ली : शीर्ष उपभोक्ता कोर्ट ने कहा है कि हज यात्री उपभोक्ता नहीं हैं. आयोग ने यह बात एक व्यक्ति और उसके पुत्र को राहत देने से इनकार करते हुए कही जिन्होंने यह दावा करते हुए धन वापसी की मांग की थी कि भारतीय हज कमेटी ने 2008 में निम्न श्रेणी की सेवाएं मुहैया कराई जबकि उन्होंने उच्च श्रेणी की सेवा के लिए भुगतान किया था. 

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने कहा कि हज कमेटी बिना किसी लाभ के इरादे से सेवाएं मुहैया कराती है. इसलिए यह देखा जाता है कि हज कमेटी अपनी सेवाएं बिना किसी लाभ के इरादे से मुहैया कराती है और वह हज यात्रियों के लिए व्यवस्थाएं करने में होने वाले वास्तविक खर्च वसूल करती है.

आयोग भारतीय हज कमेटी की एक अर्जी पर सुनवाई कर रहा था जो उसने राजस्थान राज्य आयोग के उस आदेश के खिलाफ दायर की थी जिसमें उसे अब्बास अली और उसके पुत्र फैयाज हुसैन को क्षतिपूर्ति करने को कहा गया था. दोनों ने 2008 में हज यात्रा के लिए आवेदन किया था और ‘ग्रीन कैटेगरी’ का चयन किया था जो कि उच्च श्रेणी की सेवा है.

हज यात्रियों ने अपने दावे में कहा कि उन्होंने अपनी यात्रा के लिए 96,940 रुपये प्रति यात्री का भुगतान किया था, लेकिन जब वे साउदी अरब पहुंचे तो उन्हे ऐसी कोई भी व्यवस्था नहीं मिली जिसके लिए उन्होंने भुगतान किया था, बल्कि उन्हें निम्न दर्ज की सहूलियतें मिली थीं. इसके लिए हज यात्रियों ने 22,362 रुपये वापस करने की मांग करते हुए उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया था. उनकी इस शिकायत को राज्य उपभोक्ता आयोग को प्रेषित कर दिया गया था.