राजधानी जयपुर के सरकारी महकमें में तीन बार मरे हनुमान- क्या है कहानी जानिए

राजधानी जयपुर के चौमूं इलाके में एक व्यक्ति की मौत ( death) के बात जारी हुए मृत्यु प्रमाण पत्रों ( death certificate) को देखकर तो यमराज भी कंफ्यूजन में है 

राजधानी जयपुर के सरकारी महकमें में तीन बार मरे हनुमान- क्या है कहानी जानिए
एक व्यक्ति का तीन बार बना डेथ सर्टिफिकेट

प्रदीप सोनी, चौमूं, जयपुर: सरकारी महकमों में कितनी अंधेरगर्दी है इसकी बानगी कई बार देखने को मिल जाती है. लेकिन राजधानी जयपुर के चौमूं इलाके में एक व्यक्ति की मौत ( death) के बात जारी हुए मृत्यु प्रमाण पत्रों ( death certificate) को देखकर तो यमराज भी कंफ्यूजन में है और मृतक का दत्तक पुत्र हैरान परेशान.
ये किस्सा किसी फिल्म या फिर कहानी से जुड़ा हुआ नहीं है. यह एक सच्ची घटना है. जो हैरान और परेशान कर रही है. सरकारी दस्तावेजों को देखकर यमराज भी कंफ्यूजन में है. तो मृतक के परिजन हैरान हैं. क्या किसी मृत व्यक्ति के अलग-अलग तिथि में तीन बार मृत्यु प्रमाण पत्र बन सकते हैं. इसका जवाब है कि बन तो सकते है लेकिन जारी किए गए सभी मृत्यु प्रमाण पत्रों पर अंकित तिथि एक ही होती है. कोई व्यक्ति कागज में तीन बार मर जाए और उसके तीन बार अलग-अलग स्थानों से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हो जाएं. तो सिस्टम पर सवाल उठना लाजमी है. ऐसा ही मामला सामने आया है राजधानी के चौमूं उपखंड में. दरअसल यहां एक व्यक्ति की मौत के बाद अलग-अलग तिथियों में उसके तीन बार मृत्यु प्रमाण पत्र, 3 संस्थानों ने जारी कर दिए. अब कौन सा मृत्यु प्रमाण पत्र सही है इसको लेकर संशय बना हुआ है.
पूरी कहानी जानिए-
ये पूरी कहानी है चौमूं तहसील के अनंतपुरा चिमनपुरा ग्राम पंचायत के बलेखण गांव की है. बलेखण गांव निवासी हनुमान सहाय सैनी की मृत्यु 1984 में SMS अस्पताल में हुई थी. जिसका मृत्यु प्रमाण पत्र भी SMS अस्पताल ने 22 मई 2018 को जारी किया था. मृत्यु प्रमाण पत्र पर मृत्यु की तिथि 4 दिसंबर 1984 बताई गई और मृतक का स्थाई पता रींगस रोड रघुनाथ दास जी की बगीची चौमूं अंकित है. इसके बाद मृतक हनुमान सहाय सैनी का दूसरा मृत्यु प्रमाण पत्र चौमूं नगर पालिका ने 20 सितम्बर 2018 को जारी किया. नगर पालिका से जारी किए गए मृत्यु प्रमाण पत्र पर मृत्यु की तिथि 29 नवंबर 1984 अंकित है. यानि नगरपालिका ने हनुमान सहाय को 1 महीने पहले ही मृत घोषित कर दिया.

मृत्यु प्रमाण जारी करने का सिलसिला यहीं नहीं थमा. तीसरी बार भी हनुमान सहाय सैनी का मृत्यु प्रमाण पत्र अनंतपुरा चिमनपुरा ग्राम पंचायत ने जारी कर दिया. ग्राम पंचायत से जारी किये गए मृत्यु प्रमाण-पत्र में हनुमान सहाय की मृत्यु की तिथि 13 जनवरी 1985 अंकित की गई. यानी ग्राम पंचायत में हनुमान सहाय की मृत्यु होने के तिथि के करीब एक माह तक कागज में हनुमान सहाय को जिंदा रखा और 13 जनवरी 1985 को मृत घोषित कर दिया. जिस तरह से मृत्यु प्रमाण-पत्र बनाने का खेल चलता रहा. इस बात का खुलासा तब हुआ जब मृतक के दत्तक पुत्र हेमराज सैनी ने सूचना का अधिकार के तहत सूचना मांगी. फिर तो एक के बाद एक करके मृत्यु प्रमाण-पत्र मिले तो पैरों के तले से जमीन खिसक गई और हैरान परेशान हो गए.

सरकारी महकमों का ये गड़बड़ झाला सामने आने के बाद मृतक के दत्तक पुत्र हेमराज सैनी ने पूरे मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर जिला कलेक्टर जगरूप सिंह यादव को शिकायत भी की है. हेमराज ने दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है. वहीं एक ही व्यक्ति के अलग-अलग तिथि में तीन बार मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने के बाद ये तस्वीर भी सामने आ चुकी है कि सरकारी सिस्टम में कितनी अंधेर गर्दी है. सरकारी महकमों में षड्यंत्र रच कर फर्जी तरीके से कागजात बनाए जाते हैं. इस फर्जीवाड़े को रोकने के पहले जांच परख और सत्यापन हो और उसके बाद ही प्रमाण-पत्र जारी किए जाएं तो इस तरह की कन्फ्यूजन की स्थिति पैदा नहीं होगी.
स्क्रिप्ट : सतेद्र यादव,twitter: @satnedradeepu