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Hanumangarh News: हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी क्षेत्र में प्रस्तावित राठीखेड़ा एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर चल रहा विवाद अब एक बड़े मोड़ पर पहुंच गया है. किसानों के लंबे संघर्ष और लगातार विरोध के बाद फैक्ट्री प्रबंधन को आखिरकार बैकफुट पर आना पड़ा है. कंपनी ने टिब्बी इलाके में एथेनॉल प्लांट नहीं लगाने का फैसला कर लिया है. इस निर्णय के बाद जिले की राजनीति भी गरमा गई है.
फैक्ट्री प्रबंधन ने दावा किया है कि उसने टिब्बी क्षेत्र में फैक्ट्री नहीं लगाने को लेकर जिला कलेक्टर को पत्र सौंप दिया है. हालांकि यह पत्र अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है. फैक्ट्री प्रबंधन का कहना है कि कंपनी अब राजस्थान से बाहर किसी अन्य राज्य में एथेनॉल प्लांट स्थापित करेगी. इस फैसले को आंदोलनरत किसानों की बड़ी जीत माना जा रहा है.
किसान नेता और पूर्व विधायक बलवान पूनिया का कहना है कि फैक्ट्री प्रबंधन जानबूझकर पत्र को सार्वजनिक नहीं कर रहा है. उनका आरोप है कि यदि सरकार को किसानों के पक्ष में फैसला लेना ही था, तो यह निर्णय 15 महीने पहले लिया जा सकता था. उन्होंने साफ कहा कि किसानों का आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है. जब तक किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए जाते और एथेनॉल फैक्ट्री से जुड़ा एमओयू पूरी तरह निरस्त नहीं होता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा.
किसान महासभा ने इस फैसले को ऐतिहासिक जीत बताया है. किसान महासभा के जिला सचिव मंगेज चौधरी ने कहा कि यह सिर्फ एक फैक्ट्री हटाने का मामला नहीं है, बल्कि किसानों की एकजुटता और संघर्ष की जीत है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुकदमों की वापसी तक आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं होगा.
दरअसल, टिब्बी कस्बे के पास राठीखेड़ा इलाके में चंडीगढ़ की एक कंपनी द्वारा एथेनॉल प्लांट लगाने की योजना बनाई गई थी. इसका स्थानीय किसानों ने कड़ा विरोध किया था. किसानों का कहना था कि इस फैक्ट्री से इलाके में प्रदूषण फैलेगा और भूजल स्तर को गंभीर नुकसान पहुंचेगा. इसी आशंका के चलते फॉरेस्ट एंड एनवायरनमेंट डिपार्टमेंट ने मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था. इस समिति की अध्यक्षता बीकानेर संभागीय आयुक्त कर रहे हैं, जबकि वन एवं पर्यावरण विभाग के विशेष सचिव को सदस्य सचिव बनाया गया है. इसके अलावा हनुमानगढ़ जिला कलेक्टर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ पर्यावरण अभियंता और भूजल विभाग के मुख्य अभियंता भी समिति में शामिल हैं.
विरोध के दौरान हालात उस समय ज्यादा बिगड़ गए, जब जुलाई में कंपनी ने फैक्ट्री की बाउंड्री वॉल बनाना शुरू किया. 10 दिसंबर को किसानों ने टिब्बी एसडीएम कार्यालय के सामने बड़ी सभा की और बाद में सैकड़ों किसान ट्रैक्टरों के साथ फैक्ट्री स्थल पर पहुंचे. इस दौरान बाउंड्री वॉल गिरा दी गई और पुलिस से झड़प भी हुई.
अब कंपनी के फैसले के बाद भले ही फैक्ट्री टिब्बी से बाहर जा रही हो, लेकिन किसान साफ कह चुके हैं कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. इस पूरे घटनाक्रम को हनुमानगढ़ में किसानों के संगठित संघर्ष की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है.
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