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Tibbi Ethanol Factory Protest: हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी कस्बे के समीपवर्ती राठी खेड़ा ग्राम पंचायत के चक पांच आरके में प्रस्तावित इथेनॉल फैक्ट्री के विवाद मामले को लेकर रविवार को सरकार द्वारा गठित समिति ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया. एथेनॉल फैक्ट्री के संबध में प्राप्त आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए इस फैक्ट्री से होने वाले संभावित भू-प्रदूषण के परीक्षण के संबध में समिति का गठन किया गया था. वरिष्ठ पर्यावरण अभियन्ता, प्रदूषण नियंत्रण मण्डल अरविंद अग्रवाल, भू-जल विभाग मुख्य अभियन्ता सूरजभान, भू-जल विभाग भारत सरकार डा.शैलेंद्र सिंह, श्रीगंगानगर से भू-जल विभाग बरकत अली, एसई( रेगयूलेशन) हनुमानगढ़ रामा कृष्ण समिति में शामिल रहे. इस दौरान एडीएम उम्मेदी लाल मीना, टिब्बी एसडीएम सत्यनारायण सुथार व तहसीलदार हरीश कुमार टाक भी साथ रहें. समिति के सदस्यों ने चक पांच आरके में प्रस्तावित इथेनॉल फैक्ट्री की जगह पर लगाए बोरवैल से पानी के सैंपल एकत्रित किया.
समिति के सदस्यों द्वारा फैक्ट्री स्थल का मौका निरीक्षण किया गया तथा फैक्ट्री परिसर में स्थित बोरवेलों से भू-जल नमूने एकत्रित किए गए. इसके साथ ही भू-जल स्तर का मापन भी किया गया. फैक्ट्री के आसपास स्थापित ट्यूबवेलों से भी भू-जल नमूने एकत्र कर भू-जल स्तर का परीक्षण किया गया.
इसके उपरांत उच्च स्तरीय समिति के सदस्यों ने एसडीएम कार्यालय, टिब्बी में संघर्ष समिति के सदस्यों के साथ बैठक कर उनकी आशंकाओं एवं आपत्तियों को विस्तार से सुना. समिति के सदस्यों ने बताया कि संघर्ष समिति की मांगों के संबंध में आवश्यक तकनीकी एवं वैज्ञानिक परीक्षण कर तथ्यात्मक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जाएगी.
मौका निरीक्षण के बाद गठित समिति के सदस्यों ने टिब्बी तहसील कार्यालय के सभागार में इथेनॉल फैक्ट्री हटाओ क्षेत्र बचाओ संघर्ष समिति के सदस्यों के साथ संवाद पर फैक्ट्री के दुष्प्रभावों एवं आपत्तियों को सुना. संघर्ष समिति के सदस्य महंगा सिंह, नितिन ढ़ाका, सुखजीत सिंह चट्ठा, इंद्रजीत पन्नीवाला, बलविंद्र सिंह मसानी, सुधीर सहारण ने फैक्ट्री को लेकर विस्तार से दुष्प्रभावों व आपत्तियों को समिति के समक्ष रखा.
संघर्ष समिति के सदस्यों ने कहा कि सबसे बड़ी बात है कि यह इथेनॉल फैक्ट्री जनभावना के अनुरूप नहीं लगाई जा रही है. इलाके के लोग फैक्ट्री को लगाने के पक्ष में नहीं है. फैक्ट्री को लेकर जारी की गई एनओसी पर सवाल उठाए तथा ज़मीन खरीदते समय यहां पर चावल फैक्ट्री लगाने का कहकर ज़मीन खरीदी गई. फैक्ट्री को लेकर इलाके के लोगों में भारी जनाक्रोश है. जिससे सरकार व प्रशासन भली-भांति परिचित हैं.
उन्होंने कहा कि इथेनॉल फैक्ट्री से इलाके की जल, ज़मीन और हवा प्रदूषित हो जाएगी. टिब्बी कस्बे लोग भूमिगत जल को पेयजल के रुप में उपयोग करते हैं तथा भूमिगत जल के आधार पर ही यहां पर धान (चावल) , गेहूं आदि फसलें बहुतायत में होती है. फैक्ट्री के वजह से भूमिगत का स्तर गिरने व पानीं प्रदूषित होने का खतरा बताया. उन्होंने कहा फैक्ट्री की वजह से जमीन का पानी प्रदूषित होगा तथा राख व धूएं से चर्म रोग, आंखों से संबंधित बीमारियां फैलने का खतरा पैदा हो जाएगा. सदस्यों ने पंजाब के जीरा व चंडीगढ़ की बनूड़ में लगी इथेनॉल फैक्ट्री का हवाला देते हुए कहा कि वहां फैक्ट्री के कारण पर्यावरणीय व मानवीय जीवन को खतरा पैदा हो गया है.
उल्लेखनीय है कि 12 दिसम्बर को संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों तथा वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों की संयुक्त बैठक में उच्च स्तरीय समिति गठित करने पर सहमति बनी थी, जिसके पश्चात 16 दिसम्बर को समिति का गठन किया गया.
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