close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

जर्जर हालत में हनुमानगढ़ का भटनेर किला, अपनी दुर्दशा पर बहा रहा आंसू

इस किले में रानियों द्वारा जोहर किए जाने का शिलालेख भी लगा हुआ है. साथ ही इस मंदिर में करीब 1600 साल पुराना एक जैन मंदिर भी है. 

जर्जर हालत में हनुमानगढ़ का भटनेर किला, अपनी दुर्दशा पर बहा रहा आंसू
इस किले में रानियों द्वारा जोहर किए जाने का शिलालेख भी लगा हुआ है.

मनीष शर्मा, हनुमानगढ़: राजस्थान के हनुमानगढ़ का भटनेर किला देश के सबसे पुराने किलों में शामिल है. किवदंतियों के अनुसार इस किले का निर्माण श्रीराम के भाई भरत ने करवाया था मगर ज्ञात इतिहास के अनुसार इस किले की स्थापना 295 ईस्वी में बताई जाती है. मंगलवार को जीतने के कारण इस किले का नाम भटनेर से बदलकर हनुमानगढ़ कर दिया गया था मगर सबसे पुराने और मजबूत किलों में शामिल भटनेर आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है.

विलुप्त सरस्वती नदी और वर्तमान की घग्घर नदी के मुहाने पर 1724 साल पूर्व स्थापित यह किला सबसे पुराना किला तो है ही साथ ही यह सबसे मजबूत किलों में भी शामिल रहा है. तैमूर लंग ने अपनी किताब में लिखा है कि उसने इससे मजबूत किला पूरे हिन्दूस्तान में नहीं देखा है. इसका वर्णन उसने अपनी किताब में भी किया है. 52 बीघों में फैले 52 बुर्जों के इस किले का इतिहास जितना शानदार है आज इसकी हालत उतनी ही जर्जर है. किले के आसपास आबादी बस चुकी है और यह जर्जर होकर कभी भी गिरने की स्थिति में है और पुरातत्व विभाग भी इस किले के रखरखाव पर करोड़ों का बजट खर्च कर चुका है और इस बजट में लाखों रूपये के घोटाले का मामला सीबीआई में भी चल रहा है.

भूपत सिंह भाटी द्वारा स्थापित इस किले के साथ उन्होने पंजाब के बठिंडा और हरियाणा के सिरसा में भी किले स्थापित किए थे और इसी कारण भाटी राजा होने के कारण ही इस किले का नाम भटनेर और भाटी होने के कारण ही पंजाब के किले का नाम बठिंडा पड़ा था. इस किले से पंजाब के बठिंडा और हरियाणा के सिरसा तक एक बहुत बड़ी भूमिगत सुरंग थी और विदेशी आक्रमणकारी जब भारत में प्रवेश करते तो उनका पहला सामना भटनेर से ही होता था और अगर किसी स्थिति में भटनेर के राजा हार जाते तो वो नीचे सुरंगों से ही आगे बठिंडा और सिरसा पहुंच जाते और उनको सूचना दे देते जिससे उनको पहले आक्रमण करने का मौका मिल जाता.

इस किले में रानियों द्वारा जोहर किए जाने का शिलालेख भी लगा हुआ है. साथ ही इस मंदिर में करीब 1600 साल पुराना एक जैन मंदिर भी है. जिससे पता चलता है कि यहां के राजाओं में जैन सम्प्रदाय के प्रति भी रूझान था. वर्तमान में इस किले में देखने को कुछ भी नहीं बचा है और बल्लियों के सहारे किले की दीवारों और छतों को सहारा दिया गया है. ऐसे में अगर कोई विदेशी या देशी पर्यटक भूला भटका यहां आ भी जाता है तो उसको निराशा ही हाथ लगती है.