close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

उदयपुर के आदिवासी इलाके में लोगों के लिए जीवन रक्षक बना उप-स्वास्थ्य केंद्र

ढिमडी के उप स्वास्थ्य केन्द्र पर लगातार बढ़ती प्रसव की संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने भी राज्य सरकार को इस सब सेन्टर पर सुविधाओं का विस्तार करते हुए इसे पीएचसी बनाने की शिफारिश की है

उदयपुर के आदिवासी इलाके में लोगों के लिए जीवन रक्षक बना उप-स्वास्थ्य केंद्र
इस केंद्र पर इस वर्ष प्रसव का आंकड़ा 400 के पार पहुंच चुका है

उदयपुर: प्रदेश के मेवाडा-वागड के आदिवासी इलाके में रहने वालो लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिले इसके लिए सरकार की ओर से लाखों रूपए खर्च किए जाते है. लेकिन इसका लाभ यहां के लोगों को नहीं मिलता. कई बार उपचार के दर दर भटकने वाले मरिजों की ऐसी तस्वीरे भी सामने आती है जो दिल को झकझोर कर रख देती है. लेकिन इन तमाम बातों के बीच इस इलाके में एक ऐसा भी उप स्वास्थ्य केन्द्र है जो तमाव अभावों के बीच आदिवासी समाज की प्रसुताओं के लिए जीवन रक्षक बना हुआ है. 

हम बात कर रहे है महज दो नर्सिंग स्टाफ के भरोसे चलने वाले झाडोल उपखण्ड के ढिमडी गांव के उप स्वास्थ्य केन्द्र की. जहां हर महिने 30 से 35 प्रसव कराए जाते है. जो क्षेत्र में संचालित 6 पीएचसी में से 4 पीएचसी में होने वाले प्रसव की संख्या से कई गुना अधिक है. बड़ी बात यह है कि यहा पर सुरक्षित प्रसव करवाने के लिए लेबर रूम तक नहीं है, फिर भी क्षेत्र के तीन बडे सामूदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और छ पीएचसी से परहेज कर गर्भवति महिलाए यहां पर अपना प्रसव कराने के लिए आती हैं. उप स्वस्थ्य केन्द्र पर एक एएनएम और एक जीएनएम स्टॉफ ही तैनात है जो बखुबी यहां आने वाली महिलाओं को 24 घंटे उपचार सुविधा प्रदान करते है. मरिजों की सेवा के प्रति दोनों नर्सिंग स्टॉक का यही सम्पर्ण भाव प्रसुताओं को ढिमडी स्वास्थ्य केन्द्र की ओर खींच लाता है. 

कहने को तो झाडोल उपखण्ड में गरिब आदिवासियों को उपचार के लिए तीन सीएचसी के साथ छ सीएचसी सरकार ने बनाया है. लेकिन बात अगर सीएचसी में हाने वाले प्रसवों की करते तो मोहम्द फलासिया और सोम सीएचसी से पिछले तीन सालों में महज 29 प्रसव हुए. जिसमें दोनों ही पीएचसी में एक-एक साल प्रसव की संख्या जीरो रही है. यही नहीं क्षेत्र के पिपलदा और कोल्यारी के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के भी कुछ हालात ऐसे ही है. वहीं दूसरी ओर ढिमडी के उप स्वास्थ्य केन्द्र में वर्ष 2016-17 में 316 प्रसव, वर्ष 2017-18 में 398 प्रसव और इस वर्ष प्रसव का आंकड़ा 400 के पार पहुंच चुका है. 

उपखण्ड के शेष बचे  52 उप स्वास्थ्य केन्द्रों पर भी प्रसव की संख्या जीरो ही है. ढिमडी के उप स्वास्थ्य केन्द्र पर लगातार बढती प्रसव की संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने भी राज्य सरकार को इस सब सेन्टर पर सुविधाओं का विस्तार करते हुए इसे पीएचसी बनाने की शिफारिश की है. लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों का इस ओर ध्यान तक नहीं गया है. 

ढिमडी उप स्वास्थ्य केन्द्र पर कार्यरत एएनएम नाथी देवी और जीएनएम रामलाल मीणा की ओर से आदिवासी अंचल में दी जा रही यह सेवा जरूर सराहनीए है. ऐसे में जरूरत  है कि सरकार जल्द ही यहा पर चिकित्सकीय सुविधाओं का जल्द ही विस्तार करे. जिससे यहां पर आने वाली गर्भवति महिलाओं को ओर बेहतर उपचार मिल पाए. 

(इनपुट- मुकेश पुरोहित,अविनाश जगनावत)