बीकानेर में भीषण गर्मी का प्रकोप, 46 डिग्री के पार हुआ तापमान

 रेगिस्तान के बीकानेर समेत कई जिलों भीषण गर्मी और लू ने सबको हिलाकर रख दिया है. पिछले 2 दिन से रेगिस्तान में पारा 46 डिग्री को पार कर चुका है.

बीकानेर में भीषण गर्मी का प्रकोप, 46 डिग्री के पार हुआ तापमान
बीकानेर के साथ चूरु और श्रीगंगानगर में पारा सबसे ज्दाया दर्ज किया गया है.

रौनक व्यास/बीकानेर: राजस्थान का रेगिस्तान एक बार फिर आग उगल रहा है. वहीं पारा अब 46 डिग्री को भी पार कर गया है. ऐसे में गर्मी से बेहाल लोगों का जन जीवन पूरी तरह से प्रभावित हो चुका है.

जून के शुरुआती दिनों में ही सूरज की तपिश लोगों को बेहाल कर रही है. दिन निकलते ही आग सूर्य देवता अपना रौद्र रुप धारण कर लेते हैं. आग के शोलों से थार का रेगिस्तान धधकने लगा है. रेगिस्तान के बीकानेर समेत कई जिलों भीषण गर्मी और लू ने सबको हिलाकर रख दिया है. पिछले 2 दिन से रेगिस्तान में पारा 46 डिग्री को पार कर चुका है. बीकानेर के साथ चूरु और श्रीगंगानगर में पारा सबसे ज़्यादा दर्ज किया गया है.

झुलसाने वाली भीषण गर्मी से बचने के लिए लोग नारियल पानी और ठंडे पेयजल पर्दार्थों का इस्तेमाल कर गर्मी से बचने की कोशिश कर रहे हैं. लोग घरों से निकल नहीं रहे हैं जो लोग निकल भी रहे हैं वो अपने चेहरों को कपडे से ढक कर निकलते हैं. तो कोई अपने ऊपर पानी डाल कर गर्मी से राहत पाने की कोशिश कर रहा है.

वहीं भीषण गर्मी के बीच स्वाइन फ्लू के बाद जीबी सिंड्रोम बीमारी ने दस्तक दी है. इस बीमारी में मरीज के शरीर का निचला हिस्सा धीरे धीरे काम करना बंद कर देता है. बाद में शरीर का ऊपरी हिस्सा व साँस लेने व निगलने की मांसपेशियां भी काम करना बंद कर देती है.

इस बीमारी के होने पर सर्वप्रथम रोगी के शरीर, खासकर हाथों व पैरों में सुन्नपन, सिहरन, अंगुलियों में सुई-सी चुभन महसूस होना, दर्द होना आदि लक्षण दिखाई देने लगते हैं. रोगी अपने हाथ और पैरों में कमजोरी महसूस करने लगता है. धीरे धीरे कमजोरी बढ़ती है, रोगी चल फिर नहीं पाता. इस बीमारी के होने पर गर्दन की मांसपेशी भी प्रभावित हो सकती है. एक चौथाई रोगियों में सिर और चेहरे में स्थित क्रेनियल नर्व्स भी प्रभावित हो जाती है,  इस वजह से बात करने, चबाने और निगलने में भी परेशानी होने लगती हैं. चार हफ्ते तक ये बीमारी बढ़ सकती है. 

चिकित्सकों ने भी आमजन को गर्मी से बचाव के लिए हिदायतें जारी कर शीतल जल, ठंडा जूस अथवा गन्ने सेवन करने की सलाह दी है. जिससे शरीर में पानी की कमी ना हो और भीषण गर्मी और लू से शरीर का बचाव हो सके.