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राजस्थान में घर लेना हुआ महंगा, डीएलसी ने भूमि रेट में की 15 प्रतिशत की बढ़त

डीएलसी की नई दरें लागू होने के साथ सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी. इसका सीधा असर प्रॉपर्टी की वैल्यू पर पड़ेगा.

राजस्थान में घर लेना हुआ महंगा, डीएलसी ने भूमि रेट में की 15 प्रतिशत की बढ़त
डीएलसी रेट बढ़ोतरी का सीधा नुकसान जमीन और जायदाद खरीदने वालों को होगा

जयपुर: आमतौर पर सत्ताधारी पाटी और विपक्ष एक दूसरे के खिलाफ ही बयान देते हैं. चाहे मामला किसी भी तरह का हो लेकिन राजधानी में जमीनों की डीएलसी दरें बढाने का मामला आया तो कांग्रेस और बीजेपी के विधायक एक दूसरे के सुर में सुर मिलाते दिखे. कलेक्ट्रेट सभागार में हुई जिला स्तरीय समिति की बैठक में हुए निर्णय के बाद अब मंदी के इस दौर में जमीन-जायदाद खरीदना महंगा हो गया है. आवासीय भूमि की डीएलसी दरों में सबसे ज्यादा 15 फीसदी का इजाफा किया गया है.

विधानसभा से लेकर आमतौर पर एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने वाले कांग्रेस और भाजपा के विधायक डीएलसी रेट को लेकर एकजुट नजर आए. राजधानी में जब जमीनों की डीएलसी दरों को बढ़ाने का प्रस्ताव आया तो कांग्रेस और भाजपा के विधायक एक दूसरे के सुर में सुर मिलाते दिखे. यही नतीजा रहा कि विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में डीएलसी की दरें यथावत रखवाने और ज्यादा रेट नहीं बढवाने में कामयाब रहे. सरकार का खजाना भरने के लिए प्रशासन ने दो साल बाद जमीनों के डीएलसी के रेट बढ़ा दिए हैं. 

डीएलसी की नई दरें लागू होने के साथ सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी. इसका सीधा असर प्रॉपर्टी की वैल्यू पर पड़ेगा. शुक्रवार को हुई जिला भूमि दर निर्धारण समिति की बैठक में जमीन के रेट औसतन 15 प्रतिशत तक बढ़ाने पर सहमति बनी. इसमें आवासीय भूमि के रेट 10 से 15 प्रतिशत तक इजाफा किया गया है. बैठक में विधायकों ने कहा कि मंदी के इस दौर में रजिस्ट्रियां कम हो रहीं तो फिर डीएलसी दरों में वृद्धि किस आधार पर की जा रही है. 

कलेक्टर जगरूप सिंह यादव ने बताया कि नए रेट अगले सॉफ्टवेयर में फीड होते ही लागू हो जाएंगे. जिला स्तरीय समिति (डीएलसी) की बैठक में विभिन्न जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों और राज्य सरकार से प्राप्त निर्देशों के आधार पर दरों में इजाफा किया गया है. कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पहले डीएलसी दर निर्धारित नहीं थी. वहां पर नई श्रेणी बनाकर आसपास की दरों के आधार पर 500 कॉलोनियों की नई दरें तय की गई हैं. राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित जमीनों, स्टेट हाइवे और मेगा हाइवे के किनारे बसे हुए गांव में वृद्धि की गई है.

जिले के विभिन्न सब रजिस्ट्रार की तरफ से आवासीय भूमि, वाणिज्यिक भूमि की डीएलसी रेट का इजाफा करने के प्रस्ताव रखे थे. इनका कांग्रेस और भाजपा विधायकों ने एक सुर में विरोध जताया. विधायक कालीचरण सराफ, नरपतसिंह राजवी, निर्मल कुमावत ने रेट नहीं बढाने की बात कही. विधायक रामलाल शर्मा ने कहा कि डीएलसी दरों को ओर कम करना चाहिए. 

उधर कांग्रेसी विधायक रफीक खान, लक्ष्मण मीना, इंद्राज गुर्जर,वेदप्रकाश सोलंकी ने मंदी के दौर में डीएलसी दरों को बढाना अव्यवहारिक बताया. विधायक इंद्राज गुर्जर ने कहा कि जिन कॉलोनियों में बिजली, पानी और सड़क की सुविधा नहीं है उन इलाकों में तो डीएलसी रेट कम करनी चाहिए. 

दरअसल साल 2017 में जिले में डीएलसी रेट औसतन 10 प्रतिशत तक बढ़ाए गए थे. इसके बाद वर्ष 2018 में विधानसभा चुनाव के दृष्टिगत पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने डीएलसी रेट 10 प्रतिशत तक घटा दिए थे. इससे रेवेन्यू कम हुआ. जिला स्तरीय कमेटी (डीएलसी) के अध्यक्ष कलेक्टर होते हैं. जिले के विधायक, प्रधान, नगरपालिका के चेयरमैन सब-रजिस्ट्रार इस कमेटी के सदस्य होते हैं. डीएलसी बढ़ाने के बारे में अंतिम फैसला जनप्रतिनिधियों पर ही निर्भर करता है.

बहरहाल, डीएलसी रेट बढ़ोतरी का सीधा नुकसान जमीन और जायदाद खरीदने वालों को होगा, उन्हें स्टांप डयूटी ज्यादा देनी होगी. वहीं राज्य सरकार की आय बढ़ेगी. दूसरा पहलू यह है कि जहां सरकार जमीन अवाप्त करती है, वहां डीएलसी रेट ज्यादा होने का फायदा काश्तकार और खातेदार को मिलेगा क्योंकि उसे बढ़ी हुई दर से मुआवजा मिलेगा. दरें कम होने का मतलब दर कम होने या यथावत रहने का फायदा वहां होगा. जहां किसी द्वारा जमीन की खरीद फरोख्त की जा रही है. ऐसे में रजिस्ट्री पर स्टांप डयूटी नहीं बढ़ेगी. वहीं नुकसान वहां होगा जहां जमीन अवाप्त होकर मुआवजा देना है.