वासंतिक नवरात्र: नौ दिन में बनेंगे छह विशेष योग, कोरोना वायरस का लगा ग्रहण

वर्ष 1527 में स्थापना के बाद यह पहला मौका है कि जब आमेर स्थित शिला माता मंदिर 31 मार्च तक बंद रहेगा. 

वासंतिक नवरात्र: नौ दिन में बनेंगे छह विशेष योग, कोरोना वायरस का लगा ग्रहण
छह दिनों में अति विशिष्ट योग के चलते यह अनुष्ठान कई गुणा अधिक फलदायी रहेगा.

जयपुर: हिंदू नववर्ष नव विक्रमी प्रमादी संवत्सर के साथ ही नौ दिवसीय वासंतिक चैत्र नवरात्र का आगाज हो गया है. इस दौरान घर-घर आस्था के दीप जल रहे हैं और सांसारिक कष्टों और कोरोना वायरस के संक्रमण से मुक्ति के लिए मां दुर्गा की आराधना संबल प्रदान करेंगी.

छह दिनों में अति विशिष्ट योग के चलते यह अनुष्ठान कई गुणा अधिक फलदायी रहेगा हालांकि लॉकडाउन के चलते मंदिरों के बंद होने से यह पहला मौका है, जब भक्तों को घरों पर ही मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना कर रहे है.

493 साल में बाद पहली बार मंदिर बंद
वर्ष 1527 में स्थापना के बाद यह पहला मौका है कि जब आमेर स्थित शिला माता मंदिर 31 मार्च तक बंद रहेगा. वहीं, चैत्र मेला भी स्थगित किया है. पुजारी बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि सुबह 6.35 बजे घट स्थापना के बाद पूजन हुआ हालांकि, दर्शनार्थियों के लिए पट बंद रहेंगे. जमवाय माता मंदिर (जमवारामगढ़) भी उक्त अवधि में दर्शनार्थियों के लिए बंद रहेगा हालांकि विधि विधान से पूजा-अर्चना होगी.

सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 6.29 से लेकर 7.26 तक
ज्योतिषाचार्य पं. दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि दिद्धस्वभाव मीन लग्न में सुबह 6.29 से 7.26 तक घटस्थापना का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है.
फिर दिद्धस्वभाव मिथुन लग्न सुबह 11 से दोपहर 12.09 बजे तक रहेगा.
लाभ, अमृत का चौघड़िया सुबह 6.29 से 9.31 तक, शुभ का चौघड़िया 11.02 से 12.09 तक रहेगा.
दोपहर के अभिजीत मुहूर्त 12.09 से 12.52 के दौरान पूजन नहीं किया जा सकेगा.

मंदिरों में हो रही पूजा-अर्चना, नहीं जा सकेंगे दर्शनार्थी
आमेर स्थित शिला माता मंदिर, दुर्गापुरा स्थित दुर्गामाता मंदिर, कालक्या माता मंदिर, जमवाय माता मंदिर सहित अन्य प्राचीन मंदिरों में पुजारी घटस्थापना के साथ पूजा अर्चना की जा रही है लेकिन भक्तों के लिए प्रवेश निषेध है. राजापार्क पंचवटी सर्किल स्थित माता वैष्णों देवी मंदिर में नवरात्र स्थापना सुबह 6:30 से 8:00 तक हुई है. सुबह 8:00 बजे भोग के बाद 8:15 महाआरती और संध्या आरती शाम 6:30 होगी. मंदिरों में सुबह-शाम नवरात्र की पूजा तो होगी, लेकिन श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं रहेगी. इस कारण आमेर के शिला माता, मनसा माता, दुर्गापुरा के दुर्गा माता मंदिर, पुरानी बस्ती के रुद्र घंटेश्वरी, घाटगेट श्मशान स्थित काली माता मंदिर में शुभ मुहूर्त घट स्थापना की गई.

किस दिन कौन-सा योग
पहला दिन: गुड़ीपड़वा तथा चेटीचंड के साथ अबूझ मुहूर्त. कलश स्थापना के साथ मां शैलपुत्री की होगी पूजा.
दूसरा दिन: सर्वार्थसिद्धि योग के बीच मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष फल मिलेगा.
तीसरा दिन: सर्वार्थसिद्धि और राजयोग के साथ ही गणगौर का पर्व. मां चंद्रघंटा की होगी पूजा.
चौथा दिन: रवियोग में मां कूष्मांडा की पूजा.
पांचवां दिन: रवियोग के बीच मां स्कंदमाता की पूजा.
छठवां दिन: सर्वार्थ और कुमार योग के बीच मां कात्यायनी की पूजा.
सातवां दिन: द्धिपुष्कर और राजयोग, मां कालरात्रि की उपासना.
आठवां दिन: दुर्गाष्टमी और महाष्टमी पर मां महागौरी की पूजा.
नौवां दिन (दो अप्रैल): रामनवमी के साथ सर्वार्थसिद्धि, रवि और गुरु पुष्य योग. मां सिद्धिदात्री की उपासना की जाएगी.