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राजस्थान: मानवाधिकार आयोग ने तंबाकू कारोबार पर रोक लगाने की अनुशंसा की

राजस्थान में तंबाकू के संपूर्ण कारोबार पर रोक लगाने के लिए राज्य मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार से अनुशंसा की है. 

राजस्थान: मानवाधिकार आयोग ने तंबाकू कारोबार पर रोक लगाने की अनुशंसा की
प्रतीकात्मक तस्वीर

जयपुर: राजस्थान में तंबाकू के संपूर्ण कारोबार पर रोक लगाने के लिए राज्य मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार से अनुशंसा की है. आयोग ने तंबाकू के कारोबार को दंडनीय बनाते हुए इसमें आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किए जाने की वकालत की है. 

मानवाधिकार आयोग की ओर से तंबाकू उत्पादों पर रोक लगाने विषय पर किसान, श्रमिक, बीडी सिगरेट, उद्योग से संबंधित पक्षों को सुनते हुए इस पर पूरी तरह रोक लगाने की अनुशंसा की है.

आयोग अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश टाटिया ने कहा कि पूरे विश्व में सरकारें आम जनता को तंबाकू से बचाने के लिए प्रयास कर रही है. इसके साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से यह स्वीकार किया जा रहा है कि तंबाकू पक्ष लॉबी पूरे विश्व में सख्त लॉबी है. जिसके ओर से तंबाकू प्रतिबंध के विश्व स्तरीय प्रयासों का जबर्दस्त विरोध किया जा रहा है. विश्वभर में सरकारें तंबाकू लॉबी से मुकाबला करने में असफल रही है. जिसके कारण तंबाकू कारोबार लगातार फलफूल रहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को कर्तव्य का दिलाया ध्यान
उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ऐसे ही मामले में पहले कर्नाटक सरकार को राज्य के कर्तव्य का ध्यान दिला चुकी है. संविधान पीठ ने कहा कि राज्य का कर्तव्य है कि राज्य यह पूरा प्रयत्न करें कि लोक स्वास्थ्य के सुधार व जीवन के स्तर को ऊंचा करने के लिए मादक पेयों और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक औषधियों के उपभोग का प्रतिषेद करेगा.

मानवाधिकार आयोग ने कहा कि तंबाकू मानव जीवन के लिए अत्यंत हानिकारक हैं.  इससे कैंसर, ह्दय रोग,श्वास रोग तथा फेफड़ों के रोग उत्पन्न होते हैं. विश्व में 15 साल से ज्यादा उम्र के करीब 100 करोड़ लोग तंबाकू का सेवन करते हैं . विश्व में सालाना 6 लाख 25 हजार करोड़ सिगरेट जलाई जाती है. धूम्रपान से 7 हजार से अधिक रसायन उत्पन्न होते हैं, इनमें से 250 रसासन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक, 69 रसायन कैंसर कारक तंबाकू से विश्व में सालाना 80 लाख लोगों  की मौत होती है .

इनमें से 12 लाख लोग लोग सालाना तंबाकू के दुष्प्रभाव से मरते है. सालाना विश्व में 65 हजार बच्चे तंबाकू से मरते है. विश्व में तंबाकू उत्पादन के लिए 43 लाख हैक्टर कृषि भूमि का उपयोग किया जा रहा है. 

तंबाकू उत्पादन से सालाना 20 लाख टन ठोस कचरा उत्पन्न होता है.  विश्व के कुल कूड़े में से 30-40 प्रतिशत कूड़ा प्रतिदिन मात्र सिगरेट के टुकड़े से उत्पन्न होता है. तंबाकू से भारत में सालाना 10 लाख लोगों की मौत होती है. 

भारत में तंबाकू प्रयोग को रोकने के कानूनों के बावजूद 800 मिलियन टन तंबाकू का उत्पादन किया जाता है.  70 सालों में सीटीआरआई की ओर से 94 तंबाकू की नई किस्म के बीज तंबाकू किसानों को उपलब्ध कराए जा चुके है.  सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि सरकार जागरूकता अभियान व कानून बनाकर तंबाकू सेवन से लोगों को बचने की सलाह दे रही है .

सीटीआरआई के अनुसार तंबाकू की कीमत 28 रुपए (1988-97) किलो से बढ़कर 110 रुपए किलो (2008-17) हो चुकी है.  जिसका कारण विश्वभर में तंबाकू उत्पादों की मांग बढ़ना है.  तंबाकू की रोकथाम के लिए बनाए गए अत्यंत कमजोर कानून के कारण भारत विश्वभर में तंबाकू उत्पादन करने में दूसरे-तीसरे नंबर का देश है.  स्कूलों से 100 गज क्षेत्र में तंबाकू विक्रय पर रोक, बच्चों को तंबाकू सेवन से रोकने का कोई प्रभावी नियम नहीं है .  

तंबाकू के पक्ष में  बेरोजगारी बढ़ने की आशंका, बेरोजगारों का आतंकी बन जाना, नक्सलाइट बन जाने की धमकी, अवैध व्यापार बढ़ने की आशंका, अवैध व्यापार का धन आतंककारियों तक पहुंचने की दलीलें दी गई, जिसे आयोग की ओर से खारिज किया गया है.

Sujit Kumar Niranjan, News Desk