IIT जोधपुर और AIIMS नागपुर ने बनाया 'कोविड-19 ट्रैकर', रखेगा मरीजों-संदिग्धों पर नजर

कोविड -19 ट्रैकर ज्यादा महंगा भी नहीं है. इसकी बैटरी को एक बार चार्ज करने के बाद यह 25-30 दिन तक चलता है. 

IIT जोधपुर और AIIMS नागपुर ने बनाया 'कोविड-19 ट्रैकर', रखेगा मरीजों-संदिग्धों पर नजर
इसकी बैटरी को एक बार चार्ज करने के बाद यह 25-30 दिन तक चलता है.

भवानी भाटी, जोधपुर: विश्वव्यापी महामारी कोरोना (Coronavirus) का कहर लगातार जारी है. देश में भी लगातार कोरोना पॉजिटिव की संख्या में इजाफा हो रहा है. कोरोना रोगियों की बढ़ती संख्या के बीच आईआईटी जोधपुर और आईआईटी नागपुर ने एम्स नागपुर के साथ मिलकर एक डिवाइस तैयार किया है. 

इस डिवाइस से न केवल क्वारेंटाइन में बरती जाने वाली लापरवाही पकड़ में आएगी, बल्कि इसकी मदद से कोविड पॉजिटिव की सेहत की भी जानकारी मिल सकेगी. यह डिवाइस ऐसे लोगों के लिए के लिए मददगार होने के साथ प्रशासन के लिए भी मददगार साबित होगी.

कोरोना रोगियों और संदिग्धों पर नजर रखने के लिए एक डिवाइस बनाया गई है, इस डिवाइस को कोविड-19 ट्रैकर नाम दिया. इस डिवाइस को आईआईटी जोधपुर, आईआईटी नागपुर और एम्स नागपुर ने तैयार किया है. इस डिवाइस को हाथ की कलाई पर बांधने से कोरोना मरीजों और संदिग्धों की मॉनिटरिंग के लिए एप या ऑनलाइन निगरानी की जरूरत नहीं होगी. इसके लिए बनाए गए एक कंट्रोल रूम में डायसबोर्ड होगा. वहां इस ट्रैकर का हर रिकॉर्ड पहुंच जाएगा यानी जिस मरीज या संदिग्ध के हाथ में यह ट्रैकर होगा, उसके आने-जाने से लेकर उसके सेहत का भी यह ट्रैकर पूरी जानकारी रखेगा. इसकी पूरी सूचना कंट्रोल रूम को मिलेगी. इसमें खास तरह की चिप लगी है, जो बैटरी से संचालित होगी.

कैसे काम करती है यह डिवाइस
कोविड -19 ट्रैकर ज्यादा महंगा भी नहीं है. इसकी बैटरी को एक बार चार्ज करने के बाद यह 25-30 दिन तक चलता है. आईआईटी के वैज्ञानिकों की माने तो इसे तैयार करने में करीब दो हजार रुपए खर्च आया है. अगर ज्यादा संख्या में डिवाइस एक साथ तैयार किए जाए तो 1500 रुपये तक का खर्च आएगा. तकनीक तैयार करने में आईआईटी जोधपुर के प्रोफेसर डॉ. कौशल देसाई, आईआईआईटी नागपुर के डॉ. मयूर पराते और डॉ. अंकित भरणे, आईआईटी जोधपुर के डॉ. कौशल देसाई की भूमिका रही. प्रोफेसर ने बताया कि यह डिवाइस शरीर का तापमान, पल्स रेट, रेसपिरेटरी रेट और ऑक्सीजन स्तर की जानकारी देगा. 

यह डिवाइस मौजूदा मॉनिटरिंग एप की सभी सीमाओं को पार करके काम करने में सक्षम है. इसमें जियो फेन्सिंग तकनीक का उपयोग किया गया है. यह क्वारेंटाइन के उल्लंघन की तत्काल जानकारी देने में भी सक्षम है. इसके साथ ही यंत्र पहनने वालों के तापमान, पल्स रेट, रेसपिरेटरी रेट और ऑक्सीजन स्तर की भी जानकारी देगा. मरीज को किसी तरह की परेशानी होने पर उसे तत्काल चिकित्सकीय मदद उपलब्ध कराई जा सकेगी.