अलवर: फर्जी मोहर-दस्तखत बनाकर चल रहा था हथियार के लाइसेंस का खेल, जांच में हुआ खुलासा

इस संदर्भ में कोतवाली में मामला भी दर्ज कराया गया है और आरोपी दुर्गेश चोला को निलंबित कर दिया गया है. फिलहाल, पुलिस इस संदर्भ में आगे जांच कर रही है.  

अलवर: फर्जी मोहर-दस्तखत बनाकर चल रहा था हथियार के लाइसेंस का खेल, जांच में हुआ खुलासा
हथियारों के फर्जी लाइसेंस जारी किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है.

जुगल गांधी/अलवर: राजस्थान के अलवर में फर्जी हथियार लाइसेंस बनाने का मामला सामने आया है. विभाग के एक प्रशासनिक अधिकारी और सविंदकर्मी ने कलेक्टर के फर्जी दस्तखत व मोहर बनाकर बनाकर फर्जी हथियार के लाइसेंस बना दिए. इस मामले में कोतवाली थाने में मामला भी दर्ज कराया गया है.

दरअसल, अलवर जिला कलेक्टर कार्यालय में हथियारों के फर्जी लाइसेंस जारी किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. जांच में 3 फर्जी लाइसेंस बनाने की पुष्टि हुई है. इस मामले में एडीएम सिटी उत्तम सिंह शेखावत ने बताया कि, जांच में पाया गया कि, हथियार लाइसेंस मामले में पोर्टल पर जारी नामों को चेक करने पर, जब मिलान किया गया तो वो विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज नही थे.

उन्होंने कहा कि, ऐसे तीन मामले पकड़ में आएं हैं, जिन्हें फर्जी मोहर लगा कर कलेक्टर के साईंन कर लाइसेंस जारी कर दिए गए हैं. इसमें प्रशासनिक अधिकारी दुर्गेश चोला व सविंदकर्मी कम्प्यूटर ऑपरेटर सुशील अरोड़ा के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है.

जानकारी के अनुसार, 19 जून को संतोष मीणा विवेकानन्द नगर निवासी ने आर्म्स लाइसेंस की प्रति पेश कर, उसकी सत्यता की जानकारी चाही थी. यह लाइसेंस 18 अप्रैल को जारी किया गया था. इस मामले में जब कलेक्टर कार्यालय में जांच की गई तो उसमें रिकॉर्ड तो दूर, आवेदन तक नहीं मिला.

इतना ही नहीं, संतोष मीणा को जारी लाइसेंस में जांच में मोहर व हस्ताक्षर भी फर्जी पाए गए. इसी के साथ जांच में यह भी आया कि, इसी तरह कोटकासिम के पुर गांव निवासी गोविंद सिंह व उत्तम सिंह का भी लाइसेंस फर्जी तरीके से बनाया गया है. इस संदर्भ में कोतवाली में मामला भी दर्ज कराया गया है और आरोपी दुर्गेश चोला को निलंबित कर दिया गया है. फिलहाल, पुलिस इस संदर्भ में आगे जांच कर रही है.