जयपुर: पानी निशुल्क, नए कनेक्शन पर शुल्क, बिना नियमों के स्टांप फीस वसूल रहा PHED

लदाय विभाग बिना किसी नियमों के घरेलू नए कनेक्शन पर जनता से स्टांप शुल्क वसूल रहा है, जिसमें करार पत्र और सहमति पत्र के नाम पर 650 रुपये वसूले जा रहे है. 

जयपुर: पानी निशुल्क, नए कनेक्शन पर शुल्क, बिना नियमों के स्टांप फीस वसूल रहा PHED
जलदाय विभाग बिना किसी नियमों के घरेलू नए कनेक्शन पर जनता से स्टांप शुल्क वसूल रहा है.

जयपुर: गहलोत सरकार राजस्थान की जनता को पानी निशुल्क उपलब्ध करवा रही है लेकिन दूसरी ओर मुफ्त का पानी पिलाने वाला जलदाय विभाग जयपुर की जनता को लूट रहा है. 

जलदाय विभाग बिना किसी नियमों के घरेलू नए कनेक्शन पर जनता से स्टांप शुल्क वसूल रहा है, जिसमें करार पत्र और सहमति पत्र के नाम पर 650 रुपये वसूले जा रहे है. पिछली सरकार ने दोनों शुल्क माफ किए थे लेकिन पिछले कुछ दिनों से बिना किसी नियमों में संशोधन के पीएचईडी विभाग जयपुर की जनता को लूटने का काम कर रहा है. पहले पानी के नए कनेक्शन पर घोषणा पत्र ही देना था लेकिन अब करार पत्र के 550 और सहमति पत्र के 100 रुपये उपभोक्ताओं से वसूले जा रहे हैं. 

बिना नियमों के स्टांप शुल्क लेना गलत
नए कनेक्शन पर स्टांप शुल्क की वसूली पर मुख्य सचेतक महेश जोशी और विधायक अमीन कागजी ने जलदाय मंत्री बीडी कल्ला को पत्र लिखकर स्टांप शुल्क की छूट देने की अपील की है. इस शुल्क के विरोध में कॉन्ट्रेक्टर्स और जनकल्याण समिति भी विरोध में उतर गई है. जनकल्याण समिति के संयोजक ओमप्रकाश अग्रवाल का कहना है कि बिना किसी नियमों से स्टांप शुल्क लेना ठीक नहीं है. जलदाय विभाग को तुरंत इस फीस को वापस लेना होगा ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके.

उपभोक्ताओं के लिए स्टांप शुल्क हुआ था माफ 
इससे पहले तत्कालीन सरकार में जलदाय मंत्री किरण माहेश्वरी ने पेयजल उपभोक्ताओं के लिए स्टांप शुल्क माफ किया था. उस समय से केवल उपभोक्ताओं को घोषणा पत्र ही देना होता था लेकिन पिछले कुछ दिन से पीएचईडी विभाग फिर से स्टांप शुल्क वसूलने लग गया है. वो भी बिना किसी नियम के. माफी से पहले पहले उपभोक्ताओं को करार पत्र के 100 रुपये और सहमति पत्र के 10 रुपये देने होते थे. इस शुल्क के पीछे अतिरिक्त मुख्य अभियंता देवराज सौलंकी का ये तर्क है कि कोर्ट-कचहरी में मामला अटकने के कारण उपभोक्ताओं से स्टांप पेपर पर लिखवाया जा रहा है. इसलिए ये शुल्क जनता से लिया जा रहा है हालांकि नियमों में इस बात का उल्लेख तो नहीं है, लेकिन ये बात भी नहीं लिखी कि स्टांप शुल्क नहीं लें.

ऐसे में बिना किसी नियमों के स्टांप शुल्क के नाम पर हो रही वसूली से नया विवाद खड़ा हो गया है. अब देखना यह होगा कि जलदाय मंत्री बीडी कल्ला इस विवाद का कब तक सुलझा पाते हैं लेकिन इस पूरे विवाद में इतना तय है कि अफसरों की मनमानी खुलकर सामने आई है.