राजस्थान: भारत-पाक सीमा पर फिर उलझा एक अहम मामला, जानिए वजह...

राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर बीपी 367/एम से 375/एम बटालियन से लगभग 8 किमी की तारबंदी को शिफ्ट किया जाना है.

राजस्थान: भारत-पाक सीमा पर फिर उलझा एक अहम मामला, जानिए वजह...
समानांतर सड़क के बारे में भी केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की रिपोर्ट मांगी गई है.

विष्णु शर्मा/जयपुर: भारत-पाकिस्तान बॉर्डर (Indo-Pakistan Border) के संवेदनशील मसलों को लेकर भी प्रशासनिक अधिकारी सजग नहीं है. बॉर्डर पर 8 किमी की तारबंदी शिफ्टिंग और तारबंदी के समानांतर सड़क निर्माण का मामला एक साल से भी ज्यादा समय से अटका हुआ है.

इस संबंध में श्रीगंगानगर जिला कलेक्टर की ओर से मांगी गई रिपोर्ट गृह विभाग को भेजी नहीं गई है. सूत्रों का कहना है कि, राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर बीपी 367/एम से 375/एम बटालियन से लगभग 8 किमी की तारबंदी को शिफ्ट किया जाना है.

शिफ्ट की जाने वाली तारबंदी से लगती अवाप्त की जाने वाली जमीन की, प्राथमिक लागत की सहमति जरूरी होती है. इसके लिए केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) से सहमति या असहमति लेना जरूरी होता है. इसके साथ ही, बॉर्डर पर बनने वाली समानांतर सड़क के बारे में भी केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की रिपोर्ट मांगी गई है, जो आज तक नहीं मिल पाई.

जानकारी के अनुसार, श्रीगंगानगर की एडीएम ने अधीक्षण अभियंता केंद्रीय लोक निर्माण विभाग फिरोजपुर को पत्र लिखा था. इसमें भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिनयम के तहत सहमति को जरूरी बताया था.

वहीं, श्रीगंगानगर कलेक्टर की अध्यक्षता में 17 मार्च को हुई बैठक में भी निर्णय लिया गया. जबकि, तारबंदी शिफ्ट करने पर सहमति मांगी गई थी. लेकिन अभी तक नहीं मिल पाई है. गृह विभाग के पत्र के बाद एडीएम ने 2 जून को सहमति के लिए फिर पत्र लिखा था. भूमि अर्जन पेटे की राशि के प्रावधान के बारे में जानकारी मांगी गई थी.

एडीएम ने 2 जून को अनूपगढ़ एसडीएम से भी त्वरित कार्रवाई कर रिपोर्ट के लिए कहा था. समानांतर सड़क निर्माण के लिए भू अवाप्ति अधिकारी श्रीगंगानगर, श्रीकरणपुर, रायसिंहनगर, अनूपगढ़, घड़साना को पत्र लिखा गया था. वहीं, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग जैसलमेर के प्रतिनिधि के साथ मौका निरीक्षण क्षेत्र, जमीन की उपयोगिता उपायुक्तता तथा एवं स्थिति की जांच करनी थी. श्रीगंगानगर कलेक्टर कार्यालय की ओर से 30 अप्रैल 2019 को लिखे गए पत्र पर अभी तक कार्रवाई  नहीं हो पाई है.