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लोकसभा चुनाव के दौरान राजस्थान में अपराध की घटनाओं में हुआ इजाफा

अप्रैल और मई में राजस्थान में लोकसभा चुनाव हुए, जिसके कारण पुलिस चुनाव कराने में व्यस्त हो गई. लेकिन इस दौरान प्रदेश के अपराधियों ने भी चुनावों का फायदा उठाया.

लोकसभा चुनाव के दौरान राजस्थान में अपराध की घटनाओं में हुआ इजाफा
लोकसभा चुनाव के दौरान केवल महिलाएं ही नहीं बल्कि पूरा प्रदेश ही असुरक्षित रहा.

शरद पुरोहित/जयपुर: प्रदेश में लोकसभा चुनाव के दौरान पुलिस चुनाव में शांति बनाए रखने में व्यस्त रही लेकिन इस दौरान प्रदेश में आमजन के साथ अपराध की घटनाएं बढ गई. आंकड़ो के जरिए पता चला है कि प्रदेश में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान दहेज हत्या से लेकर बलात्कार तक के मामलों में बढोतरी हुई है. महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस की रणनीती ने खासा काम नहीं किया. 

राज्य में इस साल मार्च तक हत्या, लूट, डकैती जैसे मामलों की स्थिति में कुछ सुधार होता नजर आया था. लेकिन अप्रैल महीने में अपराध की घटनाएं बढ़ती हुई नजर आई. अप्रैल और मई में राजस्थान में लोकसभा चुनाव हुए, जिसके लिए पुलिस चुनाव कराने में व्यस्त हो गयी. लेकिन इस दौरान प्रदेश के अपराधियों ने भी चुनावों का फायदा उठाया और जमकर अपराध की घटनाओं को अंजाम देने में मस्त रहे. महिला अपराधों की बात करे तो अप्रैल महीने तक 126  महिलाओं की दहेज की मांग को लेकर हत्या कर दी गयी, जो कि पिछले वर्ष से 15.60 प्रतिशत अधिक थी. 

वहीं करीब 63 आत्महत्या के एसे मामले सामने आए जिनमें महिलाओं को आत्महत्या के लिए उकसाया गया था. प्रदेश में करीब 5220 महिलाओं ने उत्पीड़न के प्रकरण दर्ज करवाए. जबकि 1509  महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं सामने आयी. प्रदेश में अप्रैल माह तक 1944  महिलाओं के साथ छेड़छाड़ हुई. साथ ही वही 1706 महिलाओं के अपहरण हुए.

आंकडें साफ बता रहे हैं कि प्रदेश में महिलाओं पर अत्याचार के मामले बढ़े है. प्रदेश में लोकसभा चुनाव के दौरान केवल महिलाएं ही नहीं बल्कि पूरा प्रदेश ही असुरक्षित रहा. हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, लूट, चोरी की घटनाओं में भी बढोत्तरी हुई. अपराधियों ने प्रदेशभर में लोकसभा चुनाव के दौरान जमकर कोहराम मचाया. चुनाव तो सुरक्षित तरीके से हो गए लेकिन प्रदेश इस दौरान असुरक्षित रहा. अप्रैल महिने में प्रदेश में 131 हत्या के मामले सामने आये, वहीं 148 हत्या के प्रयास के मामले देखने को मिले. प्रदेश में इस दौरान 4 डकैतियां हुई तो वहीं 84 लूट के मामले भी सामने आए. प्रदेश में 607 लोगों के अपहरण हुए तो वहीं चोरों ने 2791 चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया.

अप्रैल महीने के आंकड़े साफ कर रहे हैं कि चुनावों के दौरान पुलिस की व्यस्तता का अपराधियों ने किस तरह से फायदा उठाया. पुलिस भी कोई ऐसे इंतजाम नहीं कर पाई जिससे चुनाव में शांति व्यवस्था बनाये रखने के साथ साथ प्रदेश को भी सुरक्षित रख सके. सभी तरह के अपराधों में इस दौरान जमकर बढोतरी हुई. बहरहाल सभी मामलों को देखकर कहा जा सकता है कि महिलाएं राज्य में सुरक्षित महसूस नहीं कर रही है. अब पुलिस को नए सिरे से काम करते हुए महिलाओं पर बढ़ते हुए अत्याचारों को रोकने की जरुरत है जिससे महिलाएं बिना खौफ के घर से बाहर निकल सकें.