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जयपुर के ग्रामीण क्षेत्र में बढ़ी पानी की समस्या, बूंद-बूंद को तरस रहे लोग

राजस्थान इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है, जिसके चलते पानी की समस्या से आमजन का जीवन भी प्रभावित होने लगा है. 

जयपुर के ग्रामीण क्षेत्र में बढ़ी पानी की समस्या, बूंद-बूंद को तरस रहे लोग
गांवों में बने तालाब और कुएं भी पूरी तरह से सूख चुके है.

अमित यादव/सांभरलेक: जयपुर में आसमान से आग के शोले बरसाने वाली भीषण गर्मी में पूरा प्रदेश जल रहा है. वहीं प्रदेश में पेयजल किल्लत को लेकर हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है. वहीं राजधानी के ग्रामीण इलाकों में लोग पानी की एक-एक बूंद को तरस रहे हैं. जिससे सरकार की पेयजल व्यवस्था के दावों की पोल साफ तौर खुलती नजर आ रही है. अब केवल ग्रामीण इलाकों में बारिश ही एक उम्मीद बची है.

राजस्थान इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है, जिसके चलते पानी की समस्या से आमजन का जीवन भी प्रभावित होने लगा है. इस समस्या से पूरा प्रदेश त्रस्त है. वहीं राजधानी के ग्रामीण क्षेत्र में भी भीषण गर्मी के चलते लोगो को पानी की किल्लत से जूझना पड़ रहा है. शहर हो या फिर आसपास के गांवों में भी पानी की किल्लत को लेकर हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है. शहरों की बात करे तो यहां 3 से 4 दिनों के अंतराल में पेयजल सप्लाई हो रही है. ग्रामीण क्षेत्र में बिछाई गई बीसलपुर की लाइने पानी के इंतजार में कब का दम तोड़ चुकी है. जिसके चलते गांवों में ग्रामीण बीसलपुर के पानी की एक-एक बूंद को आज भी तरस रहे है.

वहीं राजधानी के सांभरलेक उपखंड़ के दर्जनों गांवों में सरकार ने पानी की पाइप लाइन बिछाई दी लेकिन सरकार व प्रशासन की लापरवाही से पानी की सप्लाई नहीं हो सकी है. ऐसे में ग्रामीणों को अपनी प्यास बुझाने के लिए सिर्फ कुओं व निजी टैंकरों से अपनी प्यास बुझा पड़ रही है. इस भीषण गर्मी में भूजल स्तर नीचे चले जाने से गांवों में बने तालाब और कुएं भी पूरी तरह से सूख चुके है. ग्रामीण क्षेत्र में बेजुबा जानवरों के लिए और ज्यादा संकट बना हुआ है.

सांभर उपखंड के क्षेत्रों में सरकार और जलदाय विभाग की ओर से बीसलपुर की लाइनें डालकर नल के कनेक्शन तो कर चुके हैं, लेकिन आज तक इन नलों में पानी की बूंद तक नहीं आई है. जिससे यह नल सिर्फ सौभाग्य फीस बनकर रह गए है. वहीं जलदाय विभाग की लापरवाही का आलम ये है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लगे हेडपंप भी लंबे समय से खराब पड़े हैं. खराब हैंडपंपों के लिए कई बार ग्रामीणों व स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जलदाय विभाग को इस बारे में अवगत कराया, लेकिन विभाग के उदासीन रवैया के चलते आज तक इन हेड़पंपों को ठीक नहीं किया गया. जिसके चलते ग्रामीणों में सरकार और जलदाय विभाग के खिलाफ काफी रोष व्याप्त है.

ऐसे में लोगों ने कहा पानी की किल्लत बढ़ने से घर में किचकिच शुरू हो गई है.जरूरी काम छोड़कर दूर-दराज से पानी का इंतजाम करना पड़ रहा है. इसके चलते काफी परेशानी उठानी पड़ रही है.जलापूर्ति के लिए सरकार से लगातार गुहार लगाई जा रही है,लेकिन अभी तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है. जयपुर ग्रामीण में पानी की किल्लत से जूझ रहे लोगों का कहना है कि चुनाव के समय सरकार आम जनता को चहुमुखी विकास के सपने तो दिखाती है लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद उन वादों पर कुछ भी काम नहीं करती. 

ऐसे में सरकार को और प्रशासन को चाहिए कि लोगों की जरूरत का ध्यान रखें और धरातल पर काम करके आम जनता को राहत प्रदान करें. दो दिन से प्री मानसून की बारिश होने से ग्रामीणों ने थोड़ी सी राहत तो ली है लेकिन ये स्थाई समाधन नहीं है. ऐसे में अब देखना होगा सरकार कब तक आम जनता को मीठा पानी उपलब्ध करा पाती है या ग्रामीण क्षेत्र की जनता को मानसून के भरोसे ही बैठा रहना होगा.