खाद्य सुरक्षा योजना में अपात्र निगल रहे गरीबों का निवाला, उद्योगपति भी हैं शामिल

खाद्य सुरक्षा योजना के तहत कई अपात्र लोग अपने नाम जुड़वा कर सरकार की योजना का लाभ उठा रहे हैं. 

खाद्य सुरक्षा योजना में अपात्र निगल रहे गरीबों का निवाला, उद्योगपति भी हैं शामिल
प्रतीकात्मक तस्वीर.
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कुलदीप गोयल, श्रीगंगानगर: प्रदेश के गरीब एवं असहाय परिवारों के लिए चलाई जा रही खाद्य सुरक्षा योजना में गरीबों के हक का निवाला सक्षम लोग निगल रहे हैं. 

खाद्य सुरक्षा योजना के तहत कई अपात्र लोग अपने नाम जुड़वा कर सरकार की योजना का लाभ उठा रहे हैं. चौंकाने वाली बात यह भी है कि सार्वजनिक सूची में कस्बे के रायसिंहनगर एक उद्योगपति का नाम भी शामिल है हालांकि यह प्रशासनिक चूक है या गलत दस्तावेज पेश कर नाम जुड़वाया गया है. 

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इसका खुलासा तो प्रशासन की जांच में हो पाएगा. यहां तक कि गरीबों के लिए सरकार की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे राशन के प्रतिवर्ष आंकड़े बढ़ रहे हैं. मामले को लेकर राज्य सरकार ने जन सूचना वेबसाइट पर सार्वजनिक सूची जारी की है. ज़ी मीडिया ने सूची की पड़ताल की तो चौंकाने वाले मामले सामने आए. गरीबों के हक का निवाला कुछ सक्षम लोग उठा रहे हैं. कुछ ऐसे हैं, जिनका कोई वजूद ही नहीं है. कुछ लोग अन्य जगह निवास कर रहे हैं. यहां तक कि राशन कार्ड में परिवार में शामिल लड़की जिसकी शादी हो चुकी है, उसका राशन भी उठाया जा रहा है. 

फर्जी तरह से बनाए जा रहे मजदूर कार्ड 
राज्य सरकार ने इस योजना में लाभ लेने के लिए निर्धारित आवेदन प्रक्रिया तैयार की है. योजना में पात्रता के लिए विभिन्न प्रकार की शर्तों का भी उल्लेख किया गया है लेकिन सरकारी कर्मियों की मिली-भगत से ऐसे सक्षम लोग फर्जी रिपोर्ट तैयार कर स्वयं को खाद्य सुरक्षा योजना के तहत पात्र घोषित करवा लिया गया है. 

बड़ी बात यह भी है कि रायसिंहनगर शहरी क्षेत्र में बड़ी संख्या में काफी समय से मजदूर कार्ड फर्जी तरीके से बनाने का कार्य चल रहा है. न तो श्रम विभाग और न ही नगर पालिका ने इस मामले की जांच के लिए कोई कदम उठाया है. खाद्य सुरक्षा योजना में आवेदन करने के लिए उपखंड अधिकारी के समक्ष एक प्रार्थना पत्र पेश करना पड़ता है. इस प्रार्थना पत्र पर वार्ड पार्षद, नगर पालिका अधिकारी व जनप्रतिनिधियों की रिपोर्ट की जाती है. इसके बाद यह आवेदन पत्र उपखंड कार्यालय में जमा करवाया जाता है लेकिन सरकारी स्तर पर आवेदनकर्ताओं की सही तरीके से जांच नहीं की जाती. ऐसे में अपात्र लोग इस योजना का लाभ उठा रहे हैं. 

डिपो होल्डर भी हैं शामिल
मीडिया पड़ताल में यह भी सामने आया कि इस योजना में राशन डिपो संचालकों ने भी अपने लोगों के नाम जोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. जन सूचना सूचना के अनुसार, आधा दर्जन से ऊपर राशन डिपो होल्डर के नाम शामिल हैं.