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जयपुर को प्लास्टिक मुक्त करने की पहल, दूध की खाली थैलियां लौटाने पर मिलेंगे पैसे

आप और हम डेयरियों से दूध जरूर खरीदते है, लेकिन दूध का उपयोग होने के बाद प्लास्टिक की थैलियों को कूड़ा कचरा समझकर डस्टबिन में फैक देते है.

जयपुर को प्लास्टिक मुक्त करने की पहल, दूध की खाली थैलियां लौटाने पर मिलेंगे पैसे
यही प्लास्टिक पर्यावरण को दूषित करती है

जयपुर: पर्यावरण को बचाने के लिए प्लास्टिक पर नियंत्रण के लिए आरसीडीएफ में बड़ा फैसला लेने जा रही है. उपभोक्ता डेयरियों से खरीदी गई दूध की थैली को खाली होने पर बूथ पर लौटा पाएगा, इसके लिए उपभोक्ताओं को पैसे भी दिए जाएंगे. आरसीडीएफ जल्द ही इस नियम को लागू करने वाली है. पर्यावरण में प्लास्टिक के प्रदूषण को रोकने के लिए ये नियम लागू किए जाएंगे. जी मीडिया ने भी 12 जुलाई को खबर के माध्यम से आरसीडीएस और प्रदूषण नियंत्रण कंट्रोल बोर्ड को चेताया था, जिसके बाद आरसीडीएस अब नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी में जुट गया है.

आप और हम डेयरियों से दूध जरूर खरीदते है, लेकिन दूध का उपयोग होने के बाद प्लास्टिक की थैलियों को कूड़ा कचरा समझकर डस्टबिन में फैक देते है. जिसके बाद में यही प्लास्टिक पर्यावरण को दूषित करती है. लेकिन अब इन प्लास्टिक की थैलियों को पैसा मिलेगा, जिन्हें कूड़ा समझकर लोग डस्टबिन में फैक देते है. इसके लिए आरसीडीएफ हर डेयरी बूथ पर सेंटर बनाएगा. 

वहीं, जी मीडिया की खबर के बाद में प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने आरसीडीएफ को नोटिस थमाकर दूध की थैलियो के निस्तारण के आदेश दिए थे. जिसके बाद में अब आरसीडीएफ इसकी डीपीआर बना रहा है. जल्द ही ये नई व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, ताकि प्लास्टिक से पर्यावरण दूषित ना हो. पर्यावरण पर बढ़ते प्लास्टिक के प्रभाव के बाद में जी मीडिया ने प्रमुखता से इस खबर को चलाई, जिसके बाद आरसीडीएसफ प्लास्टिक पर नियंत्रण के लिए नई पहल शुरू करने जा रही है.

जयपुर डेयरी की बात करे रोजाना 10 लाख लीटर दूध की सप्लाई पूरे जयपुर शहर में करता है. ऐसे में एक लीटर दूध पर एक प्लास्टिक की पॉलिथिन माना जाए तो रोजाना जयपुर डेयरी 10 लाख प्लास्टिक पॉलिथिन से पर्यावरण को दूषित कर रहा है. इसके साथ साथ दूसरी बडी दूध की डेयरियां भी प्लास्टिक की पॉलिथिन में दूध बेच रही है. ऐसे में इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि रोजाना लाखों टन प्लास्टिक दूध की डेयरियों से सडक तक पहुंच रहा है. लेकिन आरसीडीएफ की इस कोशिश में आम जनता का जुडना बहुत जरूरी है. हालांकि कई लोगों को ये भी कहना है कि विभाग को इससे भी ठोस कदम उठाना चाहिए था, ताकि पूरी तरह से ये प्लास्टिक बैन हो.