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राजस्थान छात्रसंघ चुनाव में दिलचस्प हुआ मुकाबला, सभी पदों पर बदले समीकरण

राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव के समीकरण एक बार फिर से बिगाड़ते हुए नजर आ रहे हैं. हालांकि टिकट वितरण के समय लग रहा था कि मुकाबला इस बार दोनों छात्र संगठनों के बीच होगा. 

राजस्थान छात्रसंघ चुनाव में दिलचस्प हुआ मुकाबला, सभी पदों पर बदले समीकरण
बागी प्रत्याशियों ने चुनाव को रोचक और त्रिकोणीय बना दिया है.

जयपुर: राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव में यूं तो सभी अपनी जीत का दावा कर रहे है, लेकिन यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में  के तस्वीर एक बार फिर से त्रिकोणीय मुकाबले की तस्वीर बनती हुई नजर आ रही है. गौरलतब है कि पिछले तीन छात्रसंघ चुनाव में बागियों ने ही जीत का परचम लहराया था. इस बार भी एनएसयूआई की बागी प्रत्याशी पूजा वर्मा ने चुनाव को रोचक और त्रिकोणीय बना दिया है.

राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव के समीकरण एक बार फिर से बिगाड़ते हुए नजर आ रहे हैं. हालांकि टिकट वितरण के समय लग रहा था कि मुकाबला इस बार दोनों छात्र संगठनों के बीच होगा. लेकिन वोटिंग के दिन नजदीक आते आते यह समीकरण अब बागियों के दमखम पर टिक गए है. अध्यक्ष पद पर बात करें तो अध्यक्ष पद पर पांच प्रत्याशी है. हालांकि मुकाबले में तीन प्रत्याशी आगे दिख रहे है. जिसमें एबीवीपी के अमित बडबडवाल और एनएसयूआई के उत्तम चौधरी को एनएसयूआई की बागी प्रत्याशी पूजा वर्मा चुनौती देते दिख रही है. इस बीच खबरे आ रही हैं कि एनएसयूआई के बागी मुकेश चौधरी भी वोट बैंक में सेंधमारी कर सकते हैं.

इस बीच महासचिव पद की बात करें तो यहां पर भी संगठनों के बागी मुकाबले को रोचक बनाया है. एबीवीपी के बागी नीतिन शर्मा इस मुकाबले में है. वहीं राजेश चौधरी ने मुकाबले को चतुष्कोणीय बना दिया है. यहां पर एनएसयूआई के महावीर गुर्जर और एबीवीपी के अरूण शर्मा मैदान में है, जबकि एबीवीपी के बागी नीतिन शर्मा मुकाबले में संगठन के प्रत्याशियों को चैलेंज करते दिख रहे हैं.

महासचिव पद की बात करें तो इस पद पर सात प्रत्याशी मैदान में है. उपाध्यक्ष पद पर तीन प्रत्याशी है, जिनमें एबीवीपी के दीपक कुमार, एनएसयूआई की कोमल मीणा और एसएफआई की कोमल बुरडक के बीच मुकाबला है. इस बार कोमल और प्रियंका में मुकाबला बन रहा है. संयुक्त सचिव पद का भी कुछ ऐसा ही हाल है. एनएसयूआई की लक्ष्मी प्रताप खंगारोत औऱ एबीवीपी की किरण मीणा चुनावी मैदान में है. वहीं अशोक चौधरी भी इस पद पर चुनाव लड रहे है, लेकिन मुकाबला दोनों संगठनों के बीच लग रहा है.

बहरहाल,पिछले साल छात्र मतदाताओं ने सभी समीकरणों को नकारते हुए चार पदों में से तीन पदों पर निर्दलीयों को जिताकर मौका दिया था. ऐसे में इस साल भी निर्दलीय समीकरण बिगाड़ते हुए नजर आ रहे हैं. अब 27 अगस्त का वक्त ही बताएगा कि मतदाता किसे पसंद करते हैं.