सवर्णों को मिला आरक्षण बना राजस्थान के बेरोजगारों की मुसीबत, जानें पूरा मामला

EWS के प्रमाण पत्र बनवाने में सबसे बड़ी समस्या का सामना राजस्थान की कुछ जातियों को करना पड़ रहा है. अगर बात की जाए  विश्नोई समाज की तो इन्हें प्रदेश में ओबीसी वर्ग में माना गया है.

सवर्णों को मिला आरक्षण बना राजस्थान के बेरोजगारों की मुसीबत, जानें पूरा मामला

जयपुर: राजस्थान सरकार की तरफ से सवर्णों को दिए जाने वाले आर्थिक आधार पर आरक्षण में छूट की पूरे प्रदेश में वाहवाही हो रही है. लेकिन राजस्थान के बेरोजगारों के लिए ये एक बड़ी मुसीबत भी बन गया है. क्योंकि प्रदेश सरकार की तरफ से दिया गया ये लाभ सिर्फ राजस्थान की भर्तियों पर ही लागू रहेगा. जबकि अन्य राज्यों और केन्द्र की भर्तियों में राजस्थान की इस छूट का लाभ नहीं मिल सकेगा. ऐसे में राजस्थान के बेरोजगारों के प्रमाण पत्र बनने का रास्ता तो साफ हो गया है. लेकिन केन्द्र और अन्य राज्यों की भर्तियों में ये प्रमाण पत्र मान्य नहीं होगा.

EWS आरक्षण में राजस्थान सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया. जिसके बाद प्रदेश के लाखों बेरोजगारों को संपत्ति संबंधी प्रावधान को लेकर राहत मिली. लेकिन ये राहत सिर्फ राजस्थान की भर्तियों तक ही सीमित रहेगी. ऐसे में राजस्थान में बनने वाले ईडब्ल्यूएस के प्रमाण पत्र केन्द्र और अन्य राज्यों की भर्तियों पर लागू नहीं हो पाएंगे. जिसके चलते अब राजस्थान के बेरोजगारों के सामने दो-दो प्रमाण पत्र बनाने की मुसीबत खड़ी हो गई है.

दरअसल, केन्द्र सरकार के ईडब्ल्यूएस आरक्षण के फैसले पर राजस्थान सरकार ने सम्पत्ति और घर के मकान की शर्त में छूट दी है. ऐसे में 8 लाख की सालाना पारिवारिक आय और सम्पत्ति संबंधी प्रमाण पत्र अलग-अलग बनने से बेरोजगारों के सामने समस्या खड़ी हो रही है. शिक्षक विपिन प्रकाश शर्मा का कहना है कि अब तक पूरे देश में सिर्फ EWS के एक ही प्रमाण पत्र बन रहे थे लेकिन राजस्थान सरकार के संशोधन के बाद अब दो प्रमाण पत्र बनवाने होंगे. केन्द्र और राज्य सरकार की तरफ से बनाए जाने वाले प्रमाण पत्र को लेकर भी अभी तक क्लीयर नहीं किया गया है, ऐसे में जल्द से जल्द इस असमंजस की स्थिति को साफ करना होगा.

EWS के प्रमाण पत्र बनवाने में सबसे बड़ी समस्या का सामना राजस्थान की कुछ जातियों को करना पड़ रहा है. अगर बात की जाए  विश्नोई समाज की तो इन्हें प्रदेश में ओबीसी वर्ग में माना गया है. जबकि केन्द्र में इसी जाति को सामान्य वर्ग में माना जाता है. ऐसे में अगर केन्द्र सरकार की किसी भर्ती को लेकर कोई बेरोजगार आवेदन करता है तो उसे केन्द्र सरकार के ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र की आवश्यकता होगी जबकि राजस्थान में उसी बेरोजगार का ओबीसी वर्ग में प्रमाण पत्र बना हुआ है.

बहरहाल, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश के बेरोजगारों को बड़ी राहत देने का काम तो किया है. लेकिन अब ये राहत प्रमाण पत्र बनवाने में मुसीबत बनती हुई नजर आ रही है. साथ ही प्रदेश की कई जातियों और समाजों के लिए वर्ग निर्धारण में भी केन्द्र और राज्य सरकार के  पसीने छूट सकते है.