जयपुर: मौजमाबाद की 21 पंचायतों पर चढ़ा चुनावी रंग, मैदान में 128 सरपंच उम्मीदवार

पंचायत चुनाव में इस बार दावेदार गांव की समस्याओं को समाधान कराने के लिए युवाओं को साथ लेकर गांव के विकास को लेकर अपना एजेंडा मतदाताओं के बीच रख रहे हैं.

जयपुर: मौजमाबाद की 21 पंचायतों पर चढ़ा चुनावी रंग, मैदान में 128 सरपंच उम्मीदवार
पंचायत चुनाव की घोषणा के बाद से ही दावेदार चुनावी गठजोड़ के समीकरण में लगे हुए है.

अमित यादव/मौजमाबाद: प्रथम चरण में होने वाले पंचायत चुनाव को लेकर लोग चुनावी रंग में पूरी तरह रंग चुके है. चुनावी रंगों के बीच उम्मीदवार एक दूसरे को मात देते नजर आ रहे तो लोग भी सुबह-शाम अलाव के सहारे प्रत्याशियों के हार जीत का समीकरण लगा रहे हैं. मतदाता भी अपनी गांव की सरकार चुनने को तैयार है. वहीं, जैसे चुनावो की तारीख नजदीक आ रही है वैसे ही चुनाव मैदान में प्रत्यासियो की दौड़ धूप तेज होती नजर आ रही है.

मौजमाबाद पंचायत समिति में इन दिनों मौसम में तो ठंडक है, लेकिन सियासी गलियारों में गर्मी है. वहीं, प्रत्याशियों के इस कड़ाके की ठंड में भी पसीने छूट रहे हैं. गांव में चुनावी रंग जमने लगा है. सुबह चाय की चुस्की के साथ शुरू होकर शाम ढलते ही गांव की चौपाल में दिन भर गांव की सरकार बनाने को लेकर चर्चा चल रही है. इस बार मतदाता गांव की सरकार बनाने को लेकर काफी उत्सुक दिखाई दे रहे हैं. जातिवाद को छोड़कर अपने क्षेत्र के विकास को लेकर प्रत्याशी को सिर पर सरपंच का ताज पहनाने की जुगत में हैं.

पंचायत चुनाव में इस बार दावेदार गांव की समस्याओं को समाधान कराने के साथ ही युवाओं को साथ लेकर गांव के विकास को लेकर अपना एजेंडा मतदाताओं के बीच रख रहे हैं. कोई सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने के साथ ग्राम पंचायत का चहुमुखी विकास कराने का का विश्वास दिलाते नजर आ रहे हैं. वहीं जनता ने भी इस बार मानस बना लिया है कि जो गांव का विकास करेगा वही हमारा सरपंच होगा.

इस बार पंचायत चुनाव को लेकर प्रत्याशी जब घर-घर वोट मांग रहे हैं. कुछ मतदाता उन प्रत्याशियों को अपने गांव के विकास को लेकर खरी-खोटी सुनाते भी नजर आ रहे हैं. उनका कहना है कि हर बार प्रत्याशी वोट मांगने तो आता है, लेकिन सरपंच बनने के बाद सब वादे भूल जाते हैं. ऐसे में इस बार मतदाता सिर्फ ऐसे ही विकास सरपंच को चुनेंगे जो स्कॉर्पियो गाड़ी में ना बैठ कर गांव की जनता के बीच में रहकर उनकी पीड़ा सुने और गांव के चहुमुखी विकास को लेकर उनके साथ खड़ा रहे. ऐसे उम्मीदवार को इस बार वोट देकर गांव की सरकार चुनी जाएगी.
 
पंचायत चुनाव की घोषणा के बाद ही दावेदार चुनावी गठजोड़ के समीकरण में लगे हुए है. अब 17 जनवरी को ही जनता अपना नेता चुनेगी की किस नेता जी पाले में जनता गेंद फेंकेगी, ये तो आने वाली 17 जनवरी की तारीख ही फैसला करेगी. देखना होगा कि जीत के बाद प्रत्याशी ग्रामीणों की कसौटी पर खरा उतर पाता हैं या नहीं यह तो आने वाला समय ही बता पाएगा.