जयपुर: दुनिया से जाते-जाते 17 साल के सनी ने दी तीन लोगों को नई जिंदगी...

17 साल वर्षीय सनी के दुर्घटना में दिमाग में गम्भीर चोटे आयी थी. सनी न्यूरोसर्जरी विभाग सवाई मानसिंह चिकित्सालय जयपुर में भर्ती कराया गया.

जयपुर: दुनिया से जाते-जाते 17 साल के सनी ने दी तीन लोगों को नई जिंदगी...
सनी को लगातार 6 दिन तक न्यूरोसर्जरी आई.सी.यू. ट्रोमा हास्पिटल में रखा गया.

जयपुर: अंगदान की मुहीम को आगे बढ़ाते हुए 17 साल के सनी ने दुनिया से जाते-जाते अपने अंगदान किए. जिसके बाद तीन लोगों को नई जिंदगी मिली है. सनी की दोनों किडनी SMS अस्पताल में ही दो मरीजों को लगाई गई. जबकि लीवर जयपुर के ही एक निजी अस्पताल में भेजा गया. 

17 साल वर्षीय सनी के दुर्घटना में दिमाग में गम्भीर चोटे आयी थी. सनी न्यूरोसर्जरी विभाग सवाई मानसिंह चिकित्सालय जयपुर में भर्ती कराया गया. सनी के मष्तिष्क में गम्भीर चोट होने के कारण उसकी जान बचाना संभव नहीं था. इस स्थिती को ब्रेन डेड कहते है. जिसमें मरीज का हृदय का जीवित रहना असम्भव होता है, काम करता है, परन्तु मरीज का मष्तिष्क पूर्णतय काम करना बन्द कर देता है. ऐसे सनी को लगातार 6 दिन तक न्यूरोसर्जरी आई.सी.यू. ट्रोमा हास्पिटल में डॉक्टरो की निगरानी में रखा गया. ताकि उसके समस्त अंग सूचारू रूप से कार्य करते रहे. इसके लिए चिकित्सकों द्वारा हर सम्भव प्रयास किये गये. 

SMS अस्पताल की भूमिका
इस काम को सफलतापूर्वक अंजाम डॉ. गोपल लाल बंसल व टीम ने दिया. यह सुनिश्चित करने के बाद कि मरीज की जान बचाना सम्भव नहीं है तो 13 फरवरी को सुबह दस बजे राम प्रसाद मीना ( चीफ ट्रान्सप्लांट कोडिनेटर) और उनकी टीम ने मरीज के परिजनो को अंगदान हेतु उत्साहित किया. इसकी सूचना SMS मेडिकल कॉलेज प्रिंसीपल एवं नियंत्रक डॉ. सुधीर भन्डारी और SMS अस्पताल अधीक्षक डॉ. डी.एस. मीना को दी गई. उन्हाने भी मरीज के परिजनों को अंगदान करने हेतु उत्साहित किया. इस पूर्ण प्रकरण में ममता भूपेश मंत्री राजस्थान सरकार और मुरारी लाल विधायक दौसा कि भूमिका भी सराहनीय रही.

मरीज के परीजनों ने 13 फरवरी शाम 5 बजे मरीज के अंगदान करने कि सहमति SMS चिकित्सालय प्रशासन को दी. अंग निकालने का प्रोसेज 14 फरवरी को सुबह साढ़े दस बजे शुरू किया गया. सवाई मानसिंह चिकित्सालय में लीवर प्रत्यारोपण हेतु उपयोगी मरीज उपलब्ध न होने के कारण लीवर नीम्स चिकित्सालय को दिया गया. हृदय के लिए राज्य में उचित मरीज उपलब्ध न होने के कारण तथा नोटो (NOTTO) पर किसी की सहमति न मिलने के कारण हृदय प्रत्यारोपण नही किया जा सका. 

वहीं, दोनों किडनी SMS अस्पताल  में यूरोलोजी विभाग में प्रत्यारोपित कि गई. मरीज की किडनी एक महिला जिसकी उम्र 43 वर्ष भीलवाड़ा निवासी के लगायी गई. दूसरी, किडनी उम्र 36 वर्ष को लगाई गई. किडनी प्रत्यारोपण करने वाली टीम के सदस्य डॉ. विनय तोमर, डॉ. एस.एस. यादव. डॉ. प्रशान्त गुप्ता एवं डॉ. संजीव जयसवाल यूरोलोजी विभाग से डॉ वर्षा कोठारी निश्चेतना विभाग से डॉ. विनय मल्होत्रा. डॉ. धन्नजय अग्रवाल एवं डॉ. पंकज बेनीवाल नेफ्रोलॉजी विभाग से थे.