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जयपुर: स्कूली बच्चों ने कुछ इस तरह पेश की गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल

भट्टा बस्ती इलाके में एक ऐसी तस्वीर नजर आई है जो गंगा-जमुनी तहजीब और कौमी एकता की मिसाल पेश कर रही है.

जयपुर: स्कूली बच्चों ने कुछ इस तरह पेश की गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल
इस स्कूल में करीब 450 बच्चे पढ़ने आते हैं.

जयपुर: राजधानी जयपुर के भट्टा बस्ती का जब नाम आता है, तो हमेशा जहन में सिर्फ साम्प्रदायिकता से जुड़े हुए मामले की घूमते हैं, लेकिन भट्टा बस्ती का एक स्कूल ऐसा भी है जो साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश कर रहा है. यहां कुरान की इबारत के दौरान हाथ दुआ के लिए उठते हैं और साथ ही संस्कृत के श्लोकों के लिए हाथ जोड़े भी जाते हैं. जो गंगा-जमुनी तहजीब की एक अनूठी मिसाल पेश करते हैं.

जयपुर के भट्टा बस्ती इलाके को मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है. पिछले दिनों इस क्षेत्र में साम्प्रदायिक तनाव का ऐसा मंजर देखने को मिला था. जिसमें दो पक्ष ऐसे आमने-सामने हुए कि पूरे देश को हिला कर कर दिया था. लेकिन इससे अलग भट्टा बस्ती इलाके में एक ऐसी तस्वीर नजर आई है जो गंगा-जमुनी तहजीब और कौमी एकता की मिसाल पेश कर रही है. मदरसों में कुरान की आयते पढ़ने वाले ये बच्चे सरकारी स्कूल में बेहिचक संस्कृत के श्लोक और बेरोक टोक सब भाषाओं की जननी संस्कृत का ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं.

भट्टा बस्ती की राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की दूसरी पारी में संस्कृत और उर्दू विषय की स्कूल संचालित होती है. इस स्कूल में करीब 450 बच्चे पढ़ने आते हैं. इस स्कूल में पढ़ने वाला जुनैद हो या फिर शाहिदा या फिर रिहाना इन सभी बच्चों को पाठ्यक्रम में शामिल हर एक संस्कृत का श्लोक कंढस्थ है. वहीं कुरान की आयतों का भी इन बच्चों को पूरा ज्ञान है. इन बच्चों की इस काबिलियत पर इन बच्चों के अभिभावकों को भी नाज है.

कहा जाता है कि जब शिक्षा के मंदिर में कदम रखा जाता है तो जात-पात और धर्म बाहर ही रह जाते हैं. तालीम किसी धर्म की जागीर नहीं होती है. इसी तरह इस स्कूल में पढ़ने आने वाले बच्चों के अभिभावकों को इस बात से कतई गुरेज नहीं है कि इनके बच्चे संस्कृत के श्लोकों का ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं.

वैसे तो इस स्कूल में सभी विषय पढ़ाए जाते हैं, लेकिन संस्कृत स्कूल होने की वजह से ज्यादा जोर संस्कृत पर दिया जाता है. सुबह की प्रार्थना की शुरूआत संस्कृत के श्लोके साथ होती है तो वहीं दूसरी ओर प्रार्थना में ही उर्दू के कलमें भी पढ़ी जाती हैं. दोनों ही जुबान में इन बच्चों को महारथ हासिल है.

स्कूल के प्रिंसिपल नागेश शर्मा ने बताया की शुरूआती दौर में थोड़ी समस्या का सामना जरुर करना पड़ा था, लेकिन अब ये स्कूल लोगों के लिए मिसाल बन गई है. जब ये बच्चे संस्कृत के श्लोक बोलते हैं तो इनकी आवाज दूर-दूर तक सुनी जा सकती. इसके साथ ही सभी भाषा की जननी संस्कृत को सिखने की इन बच्चों की लालसा भी काबिले तारीफ है.

आसमान में जब उड़ना हो तो जात-पात की बेड़ियों को तोड़ना जरुरी होता है,,और ये ही कुछ कर दिखा रहे हैं. ये 450 बच्चे जो कुरान की आयतों से संस्कृत के श्लोकों के अपने ज्ञान से उन लोगों के लिए करारा जवाब है जो धर्म और जाति के नाम पर देश को दो टुकड़ों में बांटने की साजिश रचते हैं.