जयपुर : अति आधुनिक स्काडा सिस्टम से लैस होने जा रहा है बीसलपुर बांध

बांध से निकलने वाले पानी, बांध के गेट खुलने और बंद होने की पूरी जानकारी कम्प्यूटर सिस्टम के माध्यम से मिलेगी  

जयपुर : अति आधुनिक स्काडा सिस्टम से लैस होने जा रहा है बीसलपुर बांध
बीसलपुर बांध इस साल के आखिरी तक हाईटेक होने जा रहा है

भरत राज,जयपुर: प्रदेश का बीसलपुर बांध(Bisalpur dam) इस साल के आखिरी तक हाईटेक(hightech) होने जा रहा है इसके तहत बारिश के दिनों में नदियों से आने वाले पानी का बांध में आने से पहले ही पता लगा लिया जाएगा कि बांध में कितने पानी की आवक होने वाली है. प्रदेश में बीसलपुर पहला बांध है. जहां स्काडा सिस्टम यानि सुपर वाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एग्वीजिशन सिस्टम लगाया जा रहा है. बांध पर स्काडा सिस्टम लगाने का काम अंतिम चरणों में है. बीसलपुर बांध पर स्काडा सिस्टम का काम 31 दिसंबर 2019 तक पूरा हो जायेगा.

कैसे काम करेगा स्काडा सिस्टम ?
जल संसाधन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर संजय अग्रवाल के मुताबिक तीन करोड़ की लागत से स्काडा सिस्टम का काम किया जा रहा है. जिसके लिए पूरी राशि केंद्र सरकार से मिली है. इस सिस्टम के तहत बांध के सभी 18 गेटों पर सीसीटीवी लगाए जाएंगे. जिससे बांध से निकलने वाले पानी, बांध के गेट खुलने और बंद होने की पूरी जानकारी कम्प्यूटर सिस्टम के माध्यम से मिलेगी. इसके साथ ही बांध पूरी तरह ऑटोमेशन में हो जायेगा. जिसके बाद इमरजेंसी में जयपुर से भी बांध के गेट खोले जा सकेंगे और बंद किए जा सकेंगे. साथ ही जयपुर से ही मॉनिटरिंग भी की जा सकेगी.
अभी इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल तरीके से खुलते हैं गेट
दरअसल अभी बांध के गेट खोलने या बंद करने का काम इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल तरीके से होता है. लेकिन स्काडा सिस्टम लगने के बाद सभी गेट ऑटोमेशन के दायरे में होंगे. और कंट्रोल रूम से कंट्रोल किये जा सकेंगे. जानकारी के मुताबिक बीसलपुर के बाद बांसवाड़ा के माही, पाली के जवाई और बूंदी का गुढ़ा बांध को भी स्काडा सिस्टम से लैस किया जाएगा. जयपुर के सिंचाई भवन में भी इसका कंट्रोल रूम बनाया जाएगा.
बीसलपुर डैम अधीक्षण अभियंता वीरेन्द्र सागर और अधिशासी अभियंता रवीन्द्र कटारा के अनुसार जल संसाधन विभाग इसके अतिरिक्त बीसलपुर डैम में आने वाली तीन नदियों के लिए वाटर लेवल रिकॉर्डर फ्लो मैनेजमेंट सिस्टम भी लगा रहा है. इस सिस्टम के लिए पूरे प्रदेश में 28 लोकेशन चिह्नित की गई हैं. जहां पर वाटर लेवल रिकॉर्डर सिस्टम लगाया जाएगा.
जल संसाधन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर संजय अग्रवाल के मुताबिक इस सिस्टम से प्रदेश के 80 डैम कवर होंगे. जिसमें बांध की भराव क्षमता का ऑनलाइन अपडेट मिल सकेगा. इस सिस्टम से बाढ़ का पुर्वानुमान भी मिलेगा. फिलहाल बरसात में नदियों में अचानक पानी की आवक तेज होने का पता नहीं लगने से कई तरह की घटनाएं घटित हो जाती है. इस सिस्टम के लगने से नदियों में पानी के तेज बहाव से होने वाले हादसों में कमी आएगी.