वैध दस्तावेजों के बावजूद पट्टा जारी नहीं करने वालों की बढ़ी मुश्किलें, अब फाइल-टू-फाइल होगी निगरानी

जयपुर विकास प्राधिकरण (Jaipur Development Authority) ने बुधवार से पट्टों यानी की लीज डीड के ऑनलाइन आवेदन की शुरूआत की है. 

वैध दस्तावेजों के बावजूद पट्टा जारी नहीं करने वालों की बढ़ी मुश्किलें, अब फाइल-टू-फाइल होगी निगरानी
जेडीए के अधिकारियों और कार्मिकों की छवि काम को टालने की बनी हुई है.

जयपुर: राजधानी में अपनी भूमि, जेडीए स्कीम, निजी खातेदारी योजना, कॉपरेटिव स्कीम्स और इंस्टीट्यूशनल योजनाओं के पट्टों के लिए अब सरकारी दफ्तर जाने की जरूरत नहीं है. जयपुर विकास प्राधिकरण (Jaipur Development Authority) ने बुधवार से पट्टों यानी की लीज डीड के ऑनलाइन आवेदन की शुरूआत की है. 

जेडीए आयुक्त टी रविकांत की मौजूदगी में नागरिक सेवा केंद्र में पट्टा लेने आए प्रतीक फागीवाला के हाथों इस सेवा की शुरूआत करवाई गई. बड़ी संख्या में लोगों को इस सुविधा का लाभ मिलना तय हैं. वहीं पैसे बटोरने की आड़ में वैध दस्तावेजों के बावजूद पट्टा जारी नहीं करने वाले कार्मिक भी अधिकारियों की सीधी निगरानी में होंगे.

ऑनलाइन आवेदन
जेडीए में औसत कामकाज का अस्सी से नब्बे फीसदी हिस्सा पट्टा वितरण का है. मुख्यालय सहित जोन कार्यालयों में अधिकतर नागरिकों की मौजूदगी महज पट्टा लेने के लिए होती है. इस भीड़ की परेशानी को कम करने के लिए जेडीए प्रबंधन ने नई शुरूआत ऑनलाइन पट्टा वितरण व्यवस्था के रूप में की है. पासपोर्ट सेवा की तर्ज पर विकसित किए गए पोर्टल में नागरिकों को आवेदन करने पर अपना टाइम स्लॉट चुनने की आजादी होगी. जेडीए में भी पहले से आए आवेदनों के आधार पर अधिकारी उनकी औपचारिकताएं पूरी करने में मदद करेंगे.

कामकाज का आंकलन तय 
जेडीए आयुक्त टी रविकांत का कहना है कि इससे नागरिकों को तो सुविधा होगी ही, मुख्यालय में बैठे अधिकारी भी सटीक निगरानी रख सकेंगे. इस सुविधा से पारदर्शिता भी बढ़ेगी. जेडीए वेबसाइट पर लॉगिन कर आवेदक अपनी फाइल का स्टेटस भी चेक कर सकता है कि अब किसके पास फाइल हैं? शुरूआत में पट्टा जारी करने की अधिकतम समय सीमा 30 दिन रखी गई है हालांकि काम शीघ्र करने के प्रयास होंगे. अगर इस बीच किसी आवेदक की कोई जिज्ञासा है, जो वह जेडीए में संबधित शाखा में सलाह ले सकता है.

चुनौती बरकरार
जेडीए के अधिकारियों और कार्मिकों की छवि काम को टालने की बनी हुई है, इस सुविधा के शुरू होने से फाइल मूवमेंट पता रहेगा और कोई भी अधिकारी बिना किसी कारण के पट्टा जारी करने से मना नहीं कर पाएगा. जेडीए प्रबंधन की यह कोशिश कितनी कारगर होती है, इसके परिणाम तो आने वाले दिनों में ही देखने को मिलेंगे, लेकिन इतना तय है कि जेडीए के सुस्त तंत्र को अब रफ्तार पकड़नी ही होगी.