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जयपुर: जिला कलेक्टर और जलदाय विभाग में टकराव, सरकार ने दिया मामला सुलझाने का आदेश

जयपुर में पेयजल किल्लत और पानी मांगने पहुंची महिलाओं को हवालात में भिजवाने के मामले में कलेक्टर ने राज्य सरकार की किरकिरी करा दी है.

जयपुर: जिला कलेक्टर और जलदाय विभाग में टकराव, सरकार ने दिया मामला सुलझाने का आदेश
शहर में पिछले दो सप्ताह से पेयजल संकट बढ़ गया है

जयपुर: पानी की किल्लत को लेकर जयपुर शहर में घमासान शुरू हो गया है. जनता के बाद अब पानी की लडाई पीएचईडी के इंजीनियरों और कलेक्टर के बीच शुरू हो गई है. मामले में कलेक्टर के पूरी तरफ बैकफुट पर आने के बाद राज्य सरकार ने संभागीय आयुक्त को पूरे मामले को सुलझाने की जिम्मेदारी सौंपी है. कलेक्टर जगरूप सिंह यादव के पानी की कालाबाजारी कर रहे निजी ट्यूबवेल अधिग्रहित करने के आदेशों पर रोक लगाते हुए प्राइवेट टैंकरों की दरें तय कर दी. दूसरी तरफ बयानबाजी को लेकर कलक्टर जगरूप सिंह यादव और एडिशनल चीफ इंजीनियर देवराज सोलंकी के बीच जंग छीड चुकी है.

जयपुर में पेयजल किल्लत और पानी मांगने पहुंची महिलाओं को हवालात में भिजवाने के मामले में कलेक्टर ने राज्य सरकार की किरकिरी करा दी है. अब राज्य सरकार ने संभागीय आयुक्त केसी वर्मा को पूरे मामले को सुलझाने की निर्देश दिए हैं. शहर में पेयजल सप्लाई के प्रबंधन पर जलदाय विभाग के इंजीनियरों के साथ जिला कलेक्टर जगरूप सिंह यादव फेल हो गए है. सरकार ने निर्देश पर जयपुर कलेक्टर ने कमान संभाली, लेकिन पीएचईडी के इंजीनियरों की इंजीनियरिंग के आगे कलक्टर भी फेल हो गए.

वहीं अब संभागीय आयुक्त केसी वर्मा ने पूरे मामले में दखल देकर पेयजल किल्लत को दूर करने को लेकर काम शुरू कर दिया है. पहला मामला ये है की अवैध बूस्टरों के अंकुश के लिए बिजली कटौती मामले में एडिशनल चीफ इंजीनियर और कलेक्टर आमने सामने हो गए. कलेक्टर जगरूप सिंह यादव ने एसीई के व्यवहार व सार्वजनिक तौर पर दिए वक्तव्यों को लेकर विभाग के मुख्य सचिव डीबी गुप्ता, प्रमुख सचिव संदीप वर्मा और कार्मिक विभाग को पत्र लिख दिया है. कलेक्टर ने एसीई के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए कहा है. 

जबकि 50 करोड़ रुपए में खोदे जा रहे 732 ट्यूबवेल में से अभी तक आधे ही पेयजल सप्लाई से जोड़े जा सके है. शहर में पिछले दो सप्ताह से पेयजल संकट बढ़ गया है और रोजाना धरने -प्रदर्शन हो रहा है. अवैध बूस्टरों के कारण पाइपलाइन के टेल एंड तक पानी नहीं पहुंच रहा है. जलदाय विभाग अवैध बूस्टरों पर अंकुश के लिए पेयजल सप्लाई के दौरान बिजली कटौती करवाना चाहता है, लेकिन जनता और जनप्रतिनिधि इसका विरोध कर रहे है.

ऐसे में कलेक्टर को दो बार बिजली कटौती का आदेश वापस लेना पड़ा. मामले ने तूल पकड़ लिया और बयानबाजी तक पहुंच गया. कलेक्टर इंजीनियरों के व्यवहार को लेकर नाराज नजर आए. कलेक्टर जगरूप सिंह यादव का कहना है कि पेयजल को लेकर आम जनता परेशान है. जलदाय विभाग के इंजीनियर फील्ड में जाकर अवैध बूस्टर पकड़ने के बजाए बिजली कटौती करवाना चाहते है. जबकि बिजली आवश्यक सेवा है और जनता व जनप्रतिनिधि इसका विरोध कर रहे है. एसीई सोलंकी सार्वजनिक तौर पर मेरे पॉलिटिक्स होने के बारे में बयान दे रहे है. इसको लेकर आला अफसरों को चिट्टी लिखी है.

दूसरी तरफ पूरे मामले में जब संभागीय आयुक्त केसी वर्मा ने बताया की राज्य सरकार के निर्देशों के बाद पीएचईडी अधिकारियों की बैठक बुलाकर प्राइवेट टैंकरों की दरें तो तय कर दी. कलक्टर जगरूप सिंह यादव के आदेशों को निरस्त करते हुए निजी ट्यूबवेल अधिग्रहित करने पर रोक लगा दी. वर्मा ने बताया की यदि निजी ट्यूबवैल को अधिग्रहित किया जाएगा तो पानी की किल्लत ज्यादा हो सकती है. 

वहीं निजी टैंकर संचालक अब न्यूनतम 180 रुपए और 20 किलोमीटर तक 312 रुपए तक ही प्रति टैंकर तय कर दी गई है. इससे ज्यादा राशि लेने वाले टैंकर और ट्यूबवेल को अधिग्रहित किया जाएगा. जलदाय विभाग की तमाम आपत्ति को दरकिनाकर कर जिला प्रशासन ने यह दर प्रभावी कर दी है. कलक्टर का कहना है कि जरूरत पड़ने पर रेसमा भी लागू किया जा सकता है. दरअसल ट्यूबवेल अधिग्रहण और निजी टैंकरों की दर निर्धारित करने के मामले में कलक्टर और जलदाय विभाग के अधिकारियों के बीच ठनी हुई थी. जलदाय विभाग ने इससे हाथ खींच लिए थे. इसके बाद मामला और बढ़ गया. इस बीच संभागीय आयुक्त ने बैठक बुलाई. इसमें कलक्टर जगरूप सिंह यादव भी शामिल हुए. द

रअसल शहर का 30 प्रतिशत इलाके में सरकारी पेयजल सप्लाई नहीं है. यहां निजी टैंकर-ट्यूवबेल पर ही पेयजल सप्लाई की जा रही है. जलदाय विभाग कभी भी अधिग्रहण व दर निर्धारित करने के पक्ष में नहीं रहा. उलटे इस पर आपत्ति जताता रहा. जिसका साइड इफेक्ट यह रहा कि टैंकर संचालक भी विरोध में उतरते रहे.

बहरहाल, अफसरों के बीच वर्चस्व की लडाई इस कदर बढ़ गई है मामला सीएमओ तक पहुंच चुका है. कलक्टर जगरूप सिंह यादव के रवैये की शिकायत उच्च स्तर पर पहुंच चुकी है. यादव कभी पानी की मांग को लेकर पहुंच रही महिलाओं को हवालात की हवा खिला रहे हैं. तो कभी जयपुर की जनता को इस तेज गर्मी में प्यासा रखना चाहते हैं. हालांकि सरकार ने अब संभागीय आयुक्त को पूरे मामले को सुलझाने की जिम्मेदारी दी है.