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जयपुर: हर साल 500 करोड़ खर्च करने के बाद भी सड़कों की हालत खराब, बढ़ रहीं दुर्घटनाएं

जयपुर में पिछले एक हफ्ते से लगातार बारिश हो रही है. लगातार बारिश की वजह से सड़कों की परतें उधड़ गई हैं. कॉलोनियों से लेकर मुख्य मार्गों तक की सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं.

जयपुर: हर साल 500 करोड़ खर्च करने के बाद भी सड़कों की हालत खराब, बढ़ रहीं दुर्घटनाएं
कॉलोनियों से लेकर मुख्य मार्गों तक की सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं.

जयपुर/ विष्णु शर्मा: लगातर हो रही बारिश से शहर की सड़कें छलनी हो गई हैं. सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं, जो वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं. सड़कों के उधड़ने के साथ ही भ्रष्टाचार की परतें भी खुल रही हैं. नगर निगम और जेडीए साल में करीब 500 करोड़ रुपए सड़कों पर खर्च करते हैं, लेकिन हालात जस के तस हैं और लोग पीड़ा भोगने पर मजबूर हैं. 

राजधानी जयपुर में पिछले एक हफ्ते से लगातार बारिश हो रही है. लगातार बारिश की वजह से सड़कों की परतें उधड़ गई हैं. कॉलोनियों से लेकर मुख्य मार्गों तक की सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं. इनमें ज्यादातर सड़कें ऐसी हैं, जो बारिश से तीन-चार महीने या एक महीने पहले ही बनी हैं. सड़कों के क्षतिग्रस्त होने का एक प्रमुख कारण यह भी है कि टेलीकॉम कंपनियां और अन्य संस्थाएं केबल डालने के लिए सड़कों को खोद देती हैं, लेकिन फिर उन्हें वापस ठीक नहीं करते हैं. इससे कई सड़कों पर गहरे गड्ढे हो गए हैं, वहीं ज्यादातर पर परतें उखड़ने के कारण कंकरीट सड़क पर फैल गया है. इससे मोटरसाइिकलें फिसलने का खतरा है और लगातार दुर्घटनाएं भी हो रही हैं. सड़कों पर बने ये गड्ढे लोगों की रीड की हड्डी में दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव सहित अनेक परेशानियां दे रहे हैं.  

सड़कों पर हुए गड्ढों के कारण न केवल वाहन चालकों को बल्कि पैदल राहगिरों को भी संभलकर चलना पड़ता है. इन गड्डो में पानी भर जाता है, जिसका बरसात के दौरान पता नहीं चलता और हादसा होने का डर लगा रहता है. स्कूल-कॉलेज के छात्रों से लेकर आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार आंखें मूंदे हुए हैं. इधर  सड़कों पर जलभराव रोकने के लिए निगम और जेडीए हर साल लाखों रुपए खर्च करते हैं, लेकिन हालात ढाक के तीन पात वाले रहते हैं. 

सुबह गड्ढ़ा भरो, शाम को वही हालत 
बरसात से पहले या बरसात के दौरान जेडीए नगर निगम सड़कों के गड्ढे भरने का काम करने का दावा करती हैं, लेकिन यह कार्य और ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है. ग्रेवल का उपयोग कर गड्ढों को भरने का काम किया जा रहा है. ऐसे में हालात यह है कि जिन गड्ढों को सुबह भरा जाता है, शाम होते-होते वही स्थिति हो जाती है.