जयपुर: सफाई व्यवस्था में हैरिटेज-ग्रेटर नगर निगम फेल! 2-3 दिन में उठाया जा रहा कचरा

निगम में अफसरों के तबादले होने के बाद मॉनिटरिंग नहीं होने से बीवीजी कंपनी द्वारा डोर-टू-डोर कचरे का संग्रहण दो से तीन दिन में किया जा रहा है.

जयपुर: सफाई व्यवस्था में हैरिटेज-ग्रेटर नगर निगम फेल! 2-3 दिन में उठाया जा रहा कचरा
जयपुर में सफाई व्यवस्था में हैरिटेज-ग्रेटर नगर निगम फेल! (फाइल फोटो)

जयपुर: जयपुर शहर को पहले पायदान पर लाने के दावों ने ग्रेटर निगम और हैरिटेज निगम महापौर के कार्यभार संभालने के एक सप्ताह बाद ही पोल खोल दी है. दरअसल, निगम में अफसरों के तबादले होने के बाद मॉनिटरिंग नहीं होने से बीवीजी कंपनी द्वारा डोर-टू-डोर कचरे का संग्रहण दो से तीन दिन में किया जा रहा है. हूपर जहां पर तीन से चार राउंड करते थे, अब एक राउंड के बाद ही गायब हो जाते है.

ऐसे में शहर की सड़कों और घरों के कचरा इकट्‌ठा होने लगा है. अब दोनों ही महापौर बीवीजी कंपनी के काम से असंतुष्ट होकर दूसरे विकल्प तलाशने की बात कह रही है. दरअसल, शहर में सफाई व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है. समय पर कचरा कलेक्शन के हूपर नहीं पहुंच रहे तो लोग मजबूरन डिपो पर जाकर कचरा डाल रहे हैं.

डिपो के हालात ये है कि दो-दो दिनों के अंतराल में कचरा उठ रहा है. सफाई व्यवस्था का पूरा सिस्टम फेल होने के बावजूद नगर निगम प्रशासन जिम्मेदार कंपनी अधिकारियों-कर्मचारियों पर एक्शन लेने की बजाय दूसरा विकल्प ढूंढने की बात कह रहा हैं. ऐसे में अब सवाल खड़े हो रहे है निगम प्रशासन में लगभग 9 हजार सफाई कर्मचारी होने और पूरे शहर से कचरा उठाने की जिम्मेदारी ठेके पर देने के बावजूद ये नौबत क्यों आ रही है?

नगर निगम ग्रेटर और हैरिटेज में डोर टू डोर कचरा संग्रहण करने के लिए बीवीजी कंपनी को टेंडर दे रखा है. आंकड़ों की मानें तो कंपनी द्वारा औसतन प्रतिदिन शहर से 1400 टन के करीब कचरे का संग्रहण किया जाता है. कंपनी को प्रति टन कचरे का करीब 1750 रुपए का भुगतान किया जा रहा है.  इस पूरे मामले में जिम्मेदार अफसरों की मिलीभगत होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है.

घर-घर से कचरा संग्रहण के अलावा डिपो पर यदि कचरा एकत्र होता है तो उसे साफ करवाने की जिम्मेदारी भी कंपनी की है. टेंडर की शर्तो में इसका उल्लेख है और बकायदा इसके लिए नगर निगम प्रशासन कंपनी को भुगतान भी कर रहा है. जयपुर नगर निगम में वर्तमान में लगभग 9 हजार स्थाई सफाई कर्मचारी कार्यरत है. इसके अलावा गैराज शाखा में बड़ी संख्या में कचरा उठाने के संसाधन (लोडर, ट्रेक्टर ट्रॉली, डम्पर इत्यादि) लगे हैं. जिनके संचालन पर भी हर माह लाखों-करोड़ों रुपए व्यय हो रहा है.

सूत्रों की मानें तो निगम स्तर पर हर वार्ड में एक-एक हूपर लगा रहा है. इसके अलावा 15 जेसीबी और लोडर, 25 डंपर और 15 ट्रैक्टर ट्रॉलियों से कचरा उठवाया जा रहा है. नाइट स्वीपिंग और मैकेनाइज्ड स्वीपिंग (रोड स्वीपर) का काम भी शहर में चल रहा है. इन सबके अलावा डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करने वाली कपंनी के सभी वार्डो में लगभग 400 संसाधन लगाने का दावा है. बावजूद इसके शहर के हालात बेहद खराब हैं.

बहरहाल, शहरवासियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. हैरिटेज नगर निगम व ग्रेटर निगम के करीब 30 वार्ड में पिछले तीन से कचरा नहीं उठा है. इस संबंध में लोगों ने निगम कंट्रोल रूम में भी शिकायत की है. लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. क्योंकि नगर निगम ग्रेटर सीईओ कोरोना पॉजिटिव होने से होम क्वारेंटाइन में हैं.