जयपुर: मंकर संक्रांति में परिदों पर कहर बनकर टूटी पतंगबाजी, सैंकड़ों पक्षी घायल

 मकर सक्रांति पर्व पर पतंगबाजी का मांझा पक्षियों के लिए जानलेवा साबित हुआ हैं. पतंगबाजी से बड़ी सख्या में पक्षी घायल हो रहे हैं. 

जयपुर: मंकर संक्रांति में परिदों पर कहर बनकर टूटी पतंगबाजी, सैंकड़ों पक्षी घायल
जयपुर जू में वन विभाग की ओर से घायल पक्षियों का इलाज किया जा रहा है.

रौशन शर्मा/जयपुर: मंकर संक्रांति के दौराना पतंगबाजी से परिदों के घायल होने की घटनाए सामने आ रही हैं. एक ओर परिंदों की घटती जनसख्या बड़ा कारण बनती जा रही हैं वही दूसरी और मंकर संक्राति पर मांझे पक्षियों की मौत हो रही हैं. मंकर संक्राति से पहले केवल राजधानी जयपुर में ही केवल एक हजार से ज्यादा पक्षी घायल हो चुके हैं. घायल पक्षियों को बचाने के लिए सरकार ने अपने स्तर पर वन विभाग को इसकी कमान सौपी हुई हैं वहीं कई सामाजिक संगठन, एनजीओं मिलकर घायल पक्षियों को उपचार देने में जुटे हुए हैं.

राजधानी जयपुर में मंकर संक्रांति का त्यौहार जोरो-शोरो से मनाया जा रहा हैं. वहीं, पतंगबाजी के साथ ही पक्षियों का घायल होना भी शुरू हो गया. मकर सक्रांति पर्व पर पतंगबाजी का मांझा पक्षियों के लिए जानलेवा साबित हुआ हैं. पतंगबाजी से बड़ी सख्या में पक्षी घायल हो रहे हैं. लोग घायल पक्षियों को जयपुर जू में इलाज के लिए पहुंचा रहे हैं. जयपुर जू में वन विभाग की ओर से घायल पक्षियों का इलाज किया जा रहा है. 

बता दें कि, मकर सक्रांति पर घायल पक्षियों के इलाज के लिए वन विभाग की ओर से विशेष कैंप का आयोजन किया गया हैं. साथ ही, कई एनजीओ भी मकर सक्रांति पर घायल पक्षियों का इलाज करने के लिए कैंप लगते है. जयपुर में 13 जनवरी से 15 जनवरी तक घायल पक्षियों के इलाज के लिए कैंप लगा जा रहा हैं.

हालांकि, पिछले सालों के आकड़ों की बात करें तो इस बार पक्षियों के हताहत होने की घटनाएं कम हुई है, लेकिन फिर भी बात करे तो इस बार भी मंकर सक्रांति के त्यौहार पर मांजे से सैकड़ों पक्षी घायल हुए है. वहीं, जयपुर कलेक्टर ने चाइनीस मांजे पर प्रतिबंध लगा दिया है. लेकिन फिर भी पतंगबाजी से डोर में फंसकर पक्षी घायल हो जाते है. 

साथ ही, सक्रांति के त्यौहार पर घायल पक्षियों के लिए कैंप में कई एनजीओ भी आगे आए हैं. पक्षियों के लिए काम करने वाले एनजीओ और संस्था के वोलिंटियर्स को विशेष ट्रेनिंग दी गई हैं, जिससे घायल पक्षियों का सही तरीके से उपचार हो सके. वन विभाग की और से ट्रेनिंग देने के बाद ही संस्थाओं को शिविर लगाने की अनुमति दी गई है.