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जयपुर: कोर्ट के आदेश के बाद भी सैंकड़ों होमगार्ड बहाली के लिए 10 साल से कर रहे इंतजार

राज्य में चुनाव हो या फिर कानून व्यवस्था का अन्य कोई मामला, पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ड्यूटी करने वाले होमगार्ड बेड़े में साढ़े चार सौ होमगार्ड इन दिनों दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं.

जयपुर: कोर्ट के आदेश के बाद भी सैंकड़ों होमगार्ड बहाली के लिए 10 साल से कर रहे इंतजार
कोर्ट ने 2015 में उनकी बहाली के आदेश दिए थे.

जयपुर: राजस्थान के साढ़े चार सौ से ज्यादा डिस्चार्ज होमगार्ड जवान दोबारा ऑनरोल आने के लिए दस साल से इंतजार कर रहे हैं. चार साल पहले कोर्ट भी इनकी बहाली के आदेश दे चुका है, वहीं विधायक, मंत्री तक इनकी बहाली के लिए पत्र लिख चुके हैं, लेकिन अफसरों की मनमानी इन सब पर भारी पड़ रही है. ऐसे में ये जवान दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है.

राज्य में चुनाव हो या फिर कानून व्यवस्था का अन्य कोई मामला, पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ड्यूटी करने वाले होमगार्ड बेड़े में साढ़े चार सौ होमगार्ड इन दिनों दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं. दरअसल मामला वर्ष 2008 का है. उस समय होमगार्ड भर्ती बंद थी और सरकार को कानून व्यवस्था व चुनाव के लिए होमगार्ड की नफरी चाहिए थी. ऐसे में विभाग ने कुछ समय से सम्पर्क में नहीं रहने वाले जवानों को नोटिस देकर उनका नवीनीकरण कर दिया. विभागीय नोटिस में 500 रुपए जुर्माना और छह महीने की जेल का हवाला देकर अपने-अपने रोजगार में लगे होमगार्डों को भी नवीनीकरण के लिए मजबूर कर दिया. 

चुनाव निपटने के बाद बिना किसी प्रक्रिया के इन जवानों को 31 जुलाई 2009 को मौखिक आदेश देकर ड्यूटी पर आने के लिए मना कर दिया. कुछ समय बाद जवानों ने विभागों के चक्कर लगाए तो उन्हें हटाने की जानकारी दी. जवानों ने पुन: बहाली के लिए जिला स्तर से लेकर मुख्यालय स्तर पर अधिकारियों से मांग की. किसी ने नहीं सुनी तो कोर्ट में गुहार लगाई. कोर्ट ने 2015 में उनकी बहाली के आदेश दिए. कुछ जवानों की बहाली कर बाकी को भटकने के लिए छोड़ दिया.

इधर कोर्ट के आदेश के बाद भी अधिकारियों ने होमगार्ड जवानों को बहाल नहीं किया तो उन्होंने जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई. तत्कालीन भाजपा सरकार में उनकी बहाली की फाइल चली, लेकिन कमेटी गठन कर रिपोर्ट मांगी गई. कमेटी ने रिपोर्ट दी कि डिस्चार्ज होमगार्ड को बता दिया गया था कि उनकी सेवाएं 19 नवंबर 2008 से 31 जुलाई 2009 तक ही रहेगी. इसके बाद स्वत: डिस्चार्ज समझे जाएंगे. हालांकि समिति ने सुझाव दिया कि डिस्चार्ज होमगार्ड शारीरिक मापदंड व अन्य अपेक्षाएं पूरी करते हैं तो अगली भर्ती में शामिल हो सकते हैं. 

इधर होमगार्ड जवानों ने बहाली के लिए पूर्व की भाजपा सरकार से वर्तमान कांग्रेस सरकार के विधायकों-मंत्रियों से गुहार लगाई, सभी ने विभाग को उन्हें रोल पर लेने के लिए पत्र लिखा, लेकिन कोई काईवाई नहीं हुई. होमगार्ड मंत्री भजनलाल जाटव भी कह चुके हैं कि होमगार्ड का रोजगार बढ़ना चाहिए, लेकिन डिस्चार्ज होमगार्ड के मामले में चुप्पी साध रहे हैं. 

जानकारी के अनुसार जनप्रतिधिनयों के पत्र मिलने के बाद होमगार्ड मंत्री भजनलाल जाटव ने फाइल अपने पास मंगवाई है. अब मंत्री जाटव पर निर्भर करेगा कि वो डिस्चार्ज होमगार्ड की बहाली को लेकर क्या निर्णय करते हैं। होमगार्ड को फिर से भटकने के मजबूर होना पड़ेगा या फिर उन्हें रोजगार मिल जाएगा.