Jaipur: एक ही आदेश में शहरी सरकार का मंत्रिमंडल भंग, सवालों के घेरे में आयुक्त का नोट

भाजपा ने सवाल उठाया कि अगर समितियों का गठन एक्ट के प्रावधानों के अनुसार नहीं हो रहा था तो आयुक्त ने बैठक में ही आपत्ति क्यों नहीं दर्ज कराई ?

Jaipur: एक ही आदेश में शहरी सरकार का मंत्रिमंडल भंग, सवालों के घेरे में आयुक्त का नोट
प्रतीकात्मक तस्वीर.

Jaipur: जयपुर नगर निगम (Jaipur Nagar Nigam) की संचालन समितियों का प्रस्ताव निरस्त होने के मामले में नगर निगम ग्रेटर आयुक्त यज्ञमित्र सिंह देव (Yagya Mitra Singh Dev) सवालों के घेरे में आ गए हैं. प्रस्ताव के साथ आयुक्त ने डिसेंट नोट भेजा था, जिसमें उन्होंने समितियों के गठन में एक्ट की पालना नहीं होने का हवाला दिया था. 

यह भी पढ़ें- ग्रेटर नगर निगम को सरकार का झटका, संचालन समितियों के गठन का प्रस्ताव निरस्त

 

इस पर भाजपा ने सवाल उठाया कि अगर समितियों का गठन एक्ट के प्रावधानों के अनुसार नहीं हो रहा था तो आयुक्त ने बैठक में ही आपत्ति क्यों नहीं दर्ज कराई ? आयुक्त ने बैठक के दौरान ही महापौर को समिति गठन में एक्ट की पालना नहीं होने को लेकर क्यों सलाह नहीं दी? इन तमाम सवालों को लेकर उलटे मेयर और पार्षदों ने आयुक्त पर ही एक्ट की पालना नहीं करने का आरोप लगाया है. जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मिलेगा. जरूरत पड़ने पर कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा.

यह भी पढ़ें- जय श्रीराम से गूंजा Jaipur Nagar Nigam Greater, कई समितियों के Chairman ने संभाला पदभार

 

जयपुर नगर निगम ग्रेटर की वर्किंग कमेटियों (मंत्रिमंडल) को राज्य सरकार के एक आदेश ने भंग कर दिया है लेकिन वर्किंग कमेटियों के भंग करने के आदेश के बाद शहरी सरकार की मुखिया डॉ. सौम्या गुर्जर (Somya Gurjar) और निगम आयुक्त यज्ञमित्र सिंह देव में "रार" भी शुरू हो गई है. आयुक्त की ओर से राज्य सरकार को वर्किंग कमेटियों के प्रस्ताव के साथ राज्य सरकार (State Government) को भेजे गया डिसेंट नोट ने नगर निगम ग्रेटर में भूचाल ला दिया है. साथ मे 21 समिति के अध्यक्षों की कुर्सी छीन ली है. आज नगर निगम मुख्यालय पर डॉक्टर सौम्या गुर्जर ने भाजपा पार्षदों के बैठक बुलाई इसमे सरकार की ओर से कमेटियों के प्रस्ताव को निरस्त करने के मामले पर चर्चा हुई लेकिन कुर्सी छीनने का गम पार्षदों के चेहरे पर साफ झलक रहा था.  

मेयर डॉ. सौम्या गुर्जर ने कहा कि राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 49 (2) में साफ उल्लेख है कि नगरपालिका या उसकी किसी भी समिति की कार्रवाई या संकल्प या अध्यक्ष के आदेश में एक्ट की पालना नहीं होने पर नगपालिका अधिकारी (आयुक्त) का यह कर्तव्य होगा कि वह अधिनियम के उपबंधों की पालना कराए. वह समिति या अध्यक्ष को सलाह दे. अगर उसे सलाह दी है तो समिति की बैठक की कार्रवाई या अध्यक्ष के आदेश पर यह तथ्य दर्ज करे कि उसने ऐसी सलाह दी थी. इसके बाद वह ऐसी कार्रवाई, संकल्प या यथास्थिति या आदेश पर डिसेंट नोट प्रस्तुत करे. मगर आयुक्त ने साधारण सभा की बैठक में धारा 49 (2) की पालना नहीं की. इसे लेकर बैठक की रिकॉर्डिंग में भी कोई उल्लेख नहीं है. ना ही कार्यवाही विवरण में आयुक्त ने यह अंकित किया है कि वह इस कार्यवाही से सहमत नहीं हैं. इसके बाद भी आयुक्त् ने डिसेंट नोट लगाकर सरकार को समितियों का प्रस्ताव अनुमोदन के लिए भेज दिया.

क्या कहना है मेयर डॉ. सौम्या गुर्जर का
मेयर डॉ. सौम्या गुर्जर ने कहा कि पूर्व महापौर विष्णु लाटा के समय 6 मार्च, 2019 को इसी सरकार के कार्यकाल में समितियों के गठन के अनुमोदन का स्वीकृति आदेश जारी किया गया था, उस समय भी बोर्ड से पास करवाकर ही प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था. एक ही प्रकार के प्रकरण में डीएलबी के अलग-अलग आदेश भी सवालों के घेरे में है. 

भाजपा पार्षदों ने कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से मुलाकात की जाएगी. साथ में राज्यपाल को भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी जाएगी और यदि जरूरत पड़ी तो फिर कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा लेकिन जिस तरीके से सरकार को नगर निगम ग्रेटर का कामकाज बर्दाश्त नहीं हो रहा है. वह सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर इस तरह के आदेश जारी कर रही है. सरकार के आदेश में केवल कार्यकारिणी समिति को सही बताया गया है जबकि इस समिति में महापौर के अलावा सभी समिति चेयरमैन सदस्य होते हैं. अगर समितियों का प्रस्ताव निरस्त हो गया है तो इस समिति में सदस्य कौन होंगे. यह भी बड़ा प्रश्न है.

बहरहाल, नगर निगम ग्रेटर में बीजेपी (BJP) का बोर्ड है और सरकार कांग्रेस (Congress) की है. ऐसे में अब भाजपा इस पूरे घटनाक्रम पर क्या निर्णय लेती है इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं. भाजपा के नेता भी इस पूरे आदेश की प्रति को लेकर रायशुमारी में लगे हुए हैं क्योंकि सरकार की ओर से कमेटियों के प्रस्ताव को निरस्त करने से भाजपा की किरकिरी हुई है.