Rajasthan में फिर शुरू हुई 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स', CM Gehlot संभालेंगे बाड़ेबंदी की कमान

6 अप्रैल को असम विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण की वोटिंग खत्म होने के बाद कांग्रेस (Congress) और गठबंधन के नेताओं के बीच किसी भी तरह की खरीद-फरोख्त की आशंका से बचने के लिए प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी की रणनीति तैयार होने लगी थी.

Rajasthan में फिर शुरू हुई 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स', CM Gehlot संभालेंगे बाड़ेबंदी की कमान
सीएम अशोक गहलोत.

Jaipur: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के तीसरे कार्यकाल में जयपुर पॉलिटिकल टूरिज्म (Political Tourism) का हब बनकर सामने आया है. नवंबर 2019 से लेकर अब तक पांच राज्यों की सियासी बाड़ाबंदी जयपुर (Jaipur) में हो चुकी है. 

यह भी पढ़ें- सियासी ड्रामा नहीं ले रहा खत्म होने का नाम, Ladu Lal Pitliya के एक और ऑडियो ने मचाया धमाल

इस लिहाज से जयपुर को बाड़ाबंदी के लिए सबसे मुफीद और सुरक्षित जगह माना गया है. जिन राज्यों की जयपुर में सियासी बाड़ाबंदी हो चुकी है, उनमें गुजरात (Gujaarat), महाराष्ट्र (Maharshtra), मध्य प्रदेश (Madhya Prdaesh), राजस्थान (Rajasthan) और असम (Assam) है. हालांकि ऐसा पहली बार हो रहा हो रहा है कि गैर कांग्रेस नेताओं की कांग्रेस खेमे में बाड़ाबंदी हुई है. 

यह भी पढ़ें- क्या Rajasthan विधानसभा चुनाव में काम करेगा 'सहानुभूति फैक्टर', जानें किसका पलड़ा भारी

6 अप्रैल को असम विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण की वोटिंग खत्म होने के बाद कांग्रेस (Congress) और गठबंधन के नेताओं के बीच किसी भी तरह की खरीद-फरोख्त की आशंका से बचने के लिए प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी की रणनीति तैयार होने लगी थी. बाड़ेबंदी के लिए सबसे सुरक्षित राज्य की तलाश शुरू हुई तो एक बार फिर राजस्थान की राजधानी जयपुर को चुना गया. वजह भी बिल्कुल साफ थी कांग्रेस शासित राज्य होने के साथ-साथ कांग्रेस के सबसे मजबूत और कद्दावर नेताओं में से एक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पास यहां की कमान होना था. असम कांग्रेस चुनाव के प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह (Bhanwar Jitendra Singh) राजस्थान से हैं और अशोक गहलोत के साथ उनके संबंध बेहतर हैं. 

असम चुनाव परिणाम से पहले की बाड़ेबंदी सबको चौंका रही
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी टीम के साथ असम चुनाव के दौरे पर भी गए थे. संभवतः  इसी दौरान दोनों नेताओं ने बाड़ेबंदी की इस पटकथा को लिखा होगा. इसके अलावा पार्टी आलाकमान सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) का अशोक गहलोत पर भरोसा और पुरानी बाड़ेबंदी का इतिहास हो या फिर राजस्थान कांग्रेस के सियासी घमासान के बीच जिस तरह से अशोक गहलोत अपनी सरकार बचा ले गए थे, उसके बाद राजस्थान से मुफीद और बेहतर जगह कोई नहीं थी. यही हुआ असम कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशियों को जयपुर लाया गया, इनमें ज्यादातर एयूआईडीएफ के प्रत्याशी शामिल हैं. इससे पहले कई बार राजस्थान में बाड़ेबंदी हुई लेकिन इस बार असम में चुनाव परिणाम आने से पहले ही हुई बाड़ेबंदी चौंकाने वाली है.

महाराष्ट्र कांग्रेस के विधायकों की हुई थी बाड़ेबंदी
दरअसल साल 2019 में नवंबर माह में महाराष्ट्र में हुए विधानसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस के विधायकों को खरीद-फरोख्त से बचाने के लिए जयपुर में बाड़ाबंदी की गई थी. महाराष्ट्र कांग्रेस के विधायकों को दिल्ली रोड स्थित होटल ब्यूना विस्ता रिसॉर्ट में ठहराया गया था और बहुमत साबित होने तक विधायक जयपुर में ही रुके थे. खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधायकों की बाड़ाबंदी की कमान संभाली थी.

मध्य प्रदेश में सियासी संकट
फरवरी 2020 में मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) की बगावत के चलते तत्कालीन कमलनाथ सरकार (Kamalnath Government) पर आए सियासी संकट के दौरान भी मध्य प्रदेश कांग्रेस के विधायकों की जयपुर में बाड़ाबंदी की गई थी. इन विधायकों को भी होटल ब्यूना विस्ता और शिव विलास में शिफ्ट किया गया था. तकरीबन 15 दिनों तक मध्य प्रदेश कांग्रेस के विधायक जयपुर में ही रुके थे. हालांकि कमलनाथ सदन में बहुमत साबित नहीं कर पाए और सरकार गिर गई थी.

गुजरात कांग्रेस के विधायकों की बाड़ाबंदी
वहीं, फरवरी 2020 में राज्यसभा चुनाव के चलते गुजरात कांग्रेस के विधायकों को भी जयपुर के शिव विलास रिसॉर्ट में शिफ्ट किया गया था, यहां गुजरात के आधे विधायकों को शिव विलास तो आधे विधायकों को ग्रीन टी हाउस में ठहराया गया था हालांकि इस दौरान गुजरात के विधायकों ने जयपुर के ऐतिहासिक इमारतों का भ्रमण भी किया था.

राजस्थान के विधायकों की दो बार बाड़ाबंदी
प्रदेश के कांग्रेस विधायकों और समर्थित विधायकों की भी जयपुर में ही 2 बार बाड़ाबंदी हुई थी. जून 2020 में 30 सीटों पर हुए राज्यसभा चुनाव में खरीद-फरोख्त की आशंका के चलते कांग्रेस के विधायकों की जयपुर में शिव विलास और और एक अन्य लग्जरी रिसॉर्ट में बाड़ाबंदी की गई थी. इस बाड़ाबंदी में पार्टी के तत्कालीन प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे, कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला सहित कई अन्य नेता भी शामिल थे.

सियासी संकट के समय हुई थी बाड़ाबंदी
वहीं पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Sachin Pilot) कैंप के बगावत करने के बाद भी कांग्रेस और समर्थित विधायकों की जयपुर में होटल फेयरमाउंट में बाड़ाबंदी की गई थी. तकरीबन 35 दिनों तक सरकार बाड़ाबंदी में ही रही थी. इस दौरान गहलोत सरकार ने सदन में बहुमत साबित करके सरकार बचाई थी.

2005 में जयपुर में शुरू हुआ था बाड़ाबंदी का प्रचलन 
दरअसल, जयपुर में बाड़ाबंदी का प्रचलन 2005 से शुरू हुआ है, जब राजस्थान की तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने झारखंड (Jharkhand) की अर्जुन मुंडा (Arjun Munda) सरकार को बचाने के लिए झारखंड के विधायकों की जयपुर में बाड़ाबंदी की थी. 2016 में उत्तराखंड में तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर जब सियासी संकट आया था, उस वक्त हरीश रावत (Harish Rawat) मुख्यमंत्री ने अपने दो दर्जन से ज्यादा विधायकों को जयपुर भेजा था. 

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि राजस्थान में एक बार फिर से रिसॉर्ट पॉलिटिक्स शुरू हो गई है. असम के चुनाव परिणाम 2 मई को आने हैं, तब तक इन प्रत्याशियों को यही रखा जाएगा. उम्मीद इस बात की भी है कि गठबंधन के अलावा कांग्रेस के भी प्रत्याशियों को संभवतः जयपुर लाया जाए. ऐसे में एक बार फिर से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनकी भरोसेमंद टीम पर इन प्रत्याशियों को सुरक्षित रखने इनकी मेहमाननवाजी और उनका मनोबल बनाए रखने के साथ-साथ असम के चुनाव को लेकर रणनीति तैयार करने की भी पूरी जिम्मेदारी होगी.