Jaipur: CM Gehlot के आदेशों को Rajasthan Police ने किया दरकिनार, नहीं बने स्वागत कक्ष

वर्ष 2019-20 के बजट में मुख्यमंत्री ने थानों में स्वागत कक्ष बनाने की घोषणा की. बजट घोषणा के बाद राज्य के प्रत्येक थाने में स्वागत कक्ष बनाने की कवायद शुरू की गई. 

Jaipur: CM Gehlot के आदेशों को Rajasthan Police ने किया दरकिनार, नहीं बने स्वागत कक्ष
प्रतीकात्मक तस्वीर.

Jaipur: लगता है राजस्थान पुलिस (Rajasthan Police) पब्लिक फ्रैंडली (Public friendly) बनने से डर रही है. यही कारण है कि प्रदेश के पुलिस थानों में फरियादियों के लिए बनाए जा रहे स्वागत कक्ष (Reception room) की रफ्तार धीमी है. जयपुर (Jaipur) जिले में तो महज 32 प्रतिशत ही थानों में स्वागत कक्ष बन पाए हैं, वहीं कमिश्नरेट के दक्षिणी जिले के एक भी थाने में स्वागत कक्ष नहीं है. 

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कहते हैं पुलिस तो आखिर पुलिस है, थाने में आने वाले फरियादियों की रिपोर्ट तो दर्ज करना दूर सीधे मुंह बात करना भी मुनासिब नहीं समझती है. जनता से पुलिसकर्मियों के दुर्व्यवहार की घटनाएं आए दिन सामने आ रही हैं. राज्य के संवेदनशील मुख्यमंत्री ने पुलिस थानों को पब्लिक फ्रेंडली बनाने के निर्देश दिए.

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इसके बाद वर्ष 2019-20 के बजट में मुख्यमंत्री ने थानों में स्वागत कक्ष बनाने की घोषणा की. बजट घोषणा के बाद राज्य के प्रत्येक थाने में स्वागत कक्ष बनाने की कवायद शुरू की गई. हालांकि मुख्यमंत्री की घोषणा को दो साल बीतने के बाद भी पूरे थाने तो छोड़िए आधे थानों में भी स्वागत कक्ष नहीं बन पाए हैं. 

मुख्य बिंदु
- मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद पीएचक्यू से 26 जून 2019 को स्वागत कक्ष निर्माण का प्रस्ताव भेजा.
-  गृह विभाग से सितम्बर में 63 थानों में स्वागत कक्ष के लिए बजट जारी किया.
-  सरकार ने 28 अगस्त 2019 को 63 पुलिस थानों में प्रति स्वागत कक्ष के लिए 7 लाख रुपए के हिसाब से 441 लाख रुपए प्रशासनिक वित्तीय स्वीकृति दी.
- शेष थानों में विधायक कोष से स्वागत कक्ष बनाए जाने को निर्णय लिया गया.
- इसके बाद नरेगा या अन्य योजनाओं के तहत स्वागत कक्ष निर्माण की मंजूरी दी गई.
- प्रदेश में 868 थानों में स्वागत कक्ष बनाए जाने हैं, लेकिन साढ़े तीन सौ के करीब थानों में ही बन पाए हैं.
- थानों में स्वागत कक्ष निर्माण की मॉनिटरिंग की खुद डीजीपी ने साप्ताहिक जिम्मेदारी संभाल रखी है
- 868 थानों में से 854 थानों में जमीन उपलब्ध है, इसके बावजूद स्वागत कक्ष नहीं बनना शर्मनाक है.
- राजधानी जयपुर में तो स्वागत कक्ष निर्माण के हालात और भी खराब हैं.
- जयपुर पूर्व के 18 थाने हैं, जिनमें महज पांच थानों जवाहर सर्किल, तूंगा, मोतीडूंगरी, बजाज नगर, गांधी नगर में ही स्वागत कक्ष हैं.
- जयपुर पश्चिम के 17 थानों में से 7 थानों बगरू, भांकरोटा, चौमूं, झोटवाड़ा, कालवाड़, करधनी, सेज में फरियादियों का स्वागत हो रहा है.
- जयपुर उत्तर के 15 थानों में से विद्याधर नगर, भट्टा बस्ती, संजय सर्किल, कोतवाली, माणकचौक, गलता गेट, ब्रह्मपुरी, शास्त्री नगर आमेर में स्वागत कक्ष बन गए हैं.
- इधर जयपुर दक्षिण के 14 थाने हैं, लेकिन किसी भी थाने में स्वागत कक्ष नहीं बना हुआ है हालांकि कोटखावदा थाने में सहभागिता से निर्माण कार्य प्रगति पर है.
- वहीं जयपुर ग्रामीण में 22 थाने हैं जिनमें महज 7 विराटनगर, कोटपूतली, पनिवाला, सरूंड, चंदवाजी, गोविंदगढ़, कालाडेरा में ही स्वागत कक्ष बनाए गए हैं.