Jaipur News: आमरण अनशन पर बैठे प्रधानाध्यापक, पदोन्नति में अनुपात में छेड़छाड़ नहीं करने की मांग

व्याख्याता और प्रधानाध्यापक के कोटे से प्रधानाचार्य पदों पर होने वाली पदोन्नति अनुपात (Promotion ratio) का मामला लगातार बढ़ता जा रहा है. 

Jaipur News: आमरण अनशन पर बैठे प्रधानाध्यापक, पदोन्नति में अनुपात में छेड़छाड़ नहीं करने की मांग
इस आमरण अनशन में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में महिला प्रधानाध्यापक भी अपने बच्चों के साथ पहुंची है.

Jaipur: व्याख्याता और प्रधानाध्यापक के कोटे से प्रधानाचार्य पदों पर होने वाली पदोन्नति अनुपात (Promotion ratio) का मामला लगातार बढ़ता जा रहा है. वर्तमान में चल रहे 67-33 के अनुपात में किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करने की मांग को लेकर आज से कलेक्ट्रेट सर्किल पर प्रदेश के 100 प्रधानाध्यापक आमरण अनशन (Fast Unto Death) पर बैठ गए हैं. 5 मार्च को जयपुर शहीद स्मारक पर दिए गए महापडाव के बाद वार्ता के लिए 4 दिनों का समय दिया गया था, लेकिन कोई वार्ता नहीं होने के बाद आज से आमरण अनशन शुरू कर दिया गया है. आमरण अनशन में बड़ी संख्या में महिला प्रधानाध्यापक अपने बच्चों के साथ आमरण अनशन पर बैठी हैं, तो वहीं समस्या का स्थाई समाधान नहीं होने तक आमरण अनशन की चेतावनी दी गई है.

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राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (रेसा) के प्रदेशाध्यक्ष कृष्ण लाल गोदारा (Krishan Lal Godara) का कहना है कि "पिछले 35 सालों से प्रधानाचार्य पदों में पदोन्नति का विवाद चला आ रहा है और व्याख्याता अपने संख्या बल के आधार पर जब चाहे पदोन्नति अनुपात में बदलाव करवा लेती है, लेकिन अब ये अन्याय और सहन नहीं होगा. आज से 100 प्रधानाध्यापकों ने आमरण अनशन शुरू किया है और जरुरत पड़ी तो पूरे प्रदेश के प्रधानाध्यापक आमरण अनशन पर बैठेंगे, लेकिन अपना हक व्याख्याताओं को मारने नहीं देंगे."

इस आमरण अनशन में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में महिला प्रधानाध्यापक भी अपने बच्चों के साथ पहुंची है. आमरण अनशन पर बैठी प्रधानाध्यापिका पूर्णिमा का कहना है कि "हर बार सिर्फ अनुपात को लेकर संघर्ष करना पड़ता है. पहले अनुपात 50-50 था, जिसके 67-33 करवा दिया गया और अब इसको 80-20 करवाना चाहते हैं. ऐसे में जो योग्य हों उनको पदोन्नति का लाभ मिलना चाहिए. जब तक इस समस्या का स्थाई समाधान नहीं निकलेगा तब तक बच्चों के साथ इस भीषण गर्मी में आमरण अनशन पर बैठे रहेंगे."

बहरहाल, प्रदेश के 100 प्रधानाध्यापक अनुपात को यथावत रखने की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठ चुके हैं और आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और उग्र करने की भी चेतावनी दे डाली है.

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