Jaipur News: दिव्यांगों के लिए बनाया कानून सिर्फ नाम का, ना आरक्षण मिला, ना रियायत

राजस्थान में दिव्यांगों (Divyang) के कल्याण के लिए निशक्तजन अधिकार अधिनियम लागू तो हो गया, लेकिन सिर्फ नाम का. 

Jaipur News: दिव्यांगों के लिए बनाया कानून सिर्फ नाम का, ना आरक्षण मिला, ना रियायत
फाइल फोटो

Jaipur: राजस्थान में दिव्यांगों (Divyang) के कल्याण के लिए निशक्तजन अधिकार अधिनियम लागू तो हो गया, लेकिन सिर्फ नाम का. दिव्य शक्ति को आगे बढ़ाने के लिए बनाए गए इस कानून के जरिए दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाया जाता, लेकिन प्रदेश में ये कानून इतना कमजोर हो गया है कि दिव्यांग बिल्कुल लाचार हो गए हैं.

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4 फीसदी आरक्षण कब मिलेगा-
देश की दिव्य शक्ति को और अधिक बलवान बनाने के लिए निशक्तजन अधिकार कानून (Disabled Rights Act) बनाया गया,जिसे राजस्थान में भी लागू किया गया, लेकिन ये अधिकार केवल कागजों तक ही सीमित रह गए. क्योंकि राज्य में ना तो दिव्यांगों को 4 प्रतिशत आरक्षण (Reservation) का पूरा लाभ मिल पा रहा है और ना ही दूसरी योजनाओं में रियायत. हां इतना जरूर है कि छूट मिल रही है तो सिर्फ आंदोलन करने को लेकर. ऐसे में राजस्थान में लगातार दिव्यांगों के अधिकारों का हनन हो रहा है, ऐसे में दिव्यांग सरकार से दया नहीं, बल्कि अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं.

राजनीति में भी आरक्षण से अछूते रह गए-
नौकरियों में आरक्षण के साथ साथ राजनीति (Politics) में भी दिव्यांगों की भागीदारी अहम होती है. सरकार ने पंचायतीराज संस्थाओं में दिव्यांगों की भागीदारी सुनिश्चित की थी, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया. यानि राजस्थान की राजनीति में दिव्यांगजन आरक्षण से अछूते रह गए. दिव्यांगों का मानना है कि इन अधिकारों के तहत दिव्यांगों को रियायती दर पर भूमि आवंटित की जाए. वेंडर जोन में कियोस्क आवंटित किए जाए, विधायक कोटे से स्कूटी दी जाए. संविदा पर लगे कर्मचारियों को अस्थाई से स्थाई करने, पदोन्नति में आरक्षण का प्रावधान किया जाए. ताकि दिव्यांग आत्मनिर्भर बन सके.

दया नहीं अधिकार दे सरकार-
दिव्यांगजन अपने ही अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं. ऐसे में अब वे अपने आपकों लाचार और अपमानित महसूस कर रहे हैं. ऐसे में वे चाहते है कि सरकार दया नहीं, बल्कि उन्हें अपने अधिकार दे, ताकि प्रदेश की दिव्य शक्ति प्रदेश के विकास में काम आ सके.

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