जयपुर: अब कचरे से किया जाएगा बिजली का उत्पादन, रौशन होगा शहर

वेस्ट टू एनर्जी के पावर प्लांट में रोजाना 600 मीट्रिक टन कचरे से हर घंटे 10 मेगावॉट बिजली का उत्पादन होगा. 

जयपुर: अब कचरे से किया जाएगा बिजली का उत्पादन, रौशन होगा शहर
इससे हर घंटे 10 मेगावॉट बिजली का उत्पादन होगा.

रोशन शर्मा/जयपुर: राजधानी जयपुर में स्मार्ट सिटी का वेस्ट टू एनर्जी प्रोजेक्ट कब धरातल पर आएगा, इसका हर किसी को इंतजार है. करीब 182 करोड़ के इस प्रोजेक्ट की तत्कालीन मुख्यमंत्री ने जून 2016 में घोषणा की थी. लेकिन अभी तक ये प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाया. वेस्ट टू एनर्जी प्रोजेक्ट से शहर के घरों से निकलने वाला हजारों टन कचरा बिजली बनाने के काम आएगा, जिससे हर घंटे 10 मेगावॉट बिजली का उत्पादन होगा. लेकिन इस प्रोजेक्ट के लिए अभी डिस्कॉम और संबंध फर्म के बीच बिजली खरीद अनुबंध होना बाकि है.

जयपुर शहर से निकलने वाला हजारों मीट्रिक टन कचरा रोजाना शहर के बाहर कचरागाहों में डाल दिया जाता है. जिसमें केवल 1200 मीट्रिक टन कचरा सेवापुरा, मथुरादासपुरा और लांगडियावास कचरागाहों पर निस्तारित किया जाता है. सेवापुरा में 250 मीट्रिक टन कचरे से कम्पोस्ट खाद बनाई जा रही है. लांगड़ियावास में 350 मीट्रिक टन कचरे से रिफ्यूज फ्यूल यानी कि ईंधन के काम आने वाली गिट्टियां बनाई जा रही है, जो सीमेंट फैक्ट्रियों की बेची जाती है. लेकिन इसके बावजूद भी इन कचरागारों में पड़े हजारों मीट्रिक टन कचरे ने आज पहाड़ का रूप ले लिया है.

राजधानी की इसी समस्या को एनर्जी में बदलने के लिए 25 जून 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री ने जयपुर के लांगड़ियावास में वेस्ट टू एनर्जी पावर प्लांट लगाने की घोषणा की थी. नवम्बर 2016 में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट के लिए एमओयू होना था, लेकिन नगर निगम लांगड़ियावास पावर प्लांट के लिए एमओयू नहीं कर पाया. हालांकी वेस्ट टू एनर्जी के लिए टेण्डर प्रक्रिया पूरी होने के बाद बिजली की दरों को लेकर ये पूरा मामला जयपुर डिस्कॉम ओर संबंधित फर्म के बीच फंस गया. हालांकी स्वायत्त शासन सचिव सिद्धार्थ महाजन ने दावा किया है कि जल्द ही ये प्रोजेक्ट धरातल पर होगा.

वेस्ट टू एनर्जी के पावर प्लांट में रोजाना 600 मीट्रिक टन कचरे से हर घंटे 10 मेगावॉट बिजली का उत्पादन होगा. यहां उत्पादित बिजली राजस्थान विद्युत निगम की कंपनियों को बेची जाएगी. जानकारी के मुताबिक पावर प्लांट लगाने वाली फर्म निगम का प्रति मीट्रिक टन कचरे के लिए 66 रूपए के हिसाब से भुगतान करेगी. पावर प्लांट लगने से जहां ईको फ्रैंडली तरीके से शहर के कचरे का निस्तारण होगा वहीं सरकार को अच्छी कमाई भी होगी.