जयपुर: पेटा ने हाथी की सवारी के खिलाफ शुरू किया अभियान, High Court में की अपील

पेटा इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मणिलाल वल्लियत ने कहा, "बेड़ियों में जकड़े हाथी को कुछ लोगों द्वारा निर्दयतापूर्वक पीटने का हृदयविदारक दृश्य एक दयालु व्यक्ति को हाथी की सवारी से मना करने के लिए काफी है."

जयपुर: पेटा ने हाथी की सवारी के खिलाफ शुरू किया अभियान, High Court में की अपील
प्रतीकात्मक तस्वीर

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर के पास हाथी गांव (हाथियों का गांव) में 102 हाथी हैं. यहां से इन्हें विभिन्न पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की सवारी के लिए भेजा जाता है. इनमें से एक हाथी संख्या '44' को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि उसके पैर में बहुत ज्यादा संक्रमण हो गया है. इसके बावजूद वह पर्यटकों को सैर करा रहा है. जयपुर में रेलवे स्टेशन फ्लाइओवर पर 'पीपुल्स फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स' (पेटा) की एक पट्टिका पर लिखा मिलता है- "जंजीरों में जकड़ा हुआ, पीटा हुआ और दुर्व्यवहार से पीड़ित. दयालु यात्री बनें. हाथियों की सवारी न करें."

हाथी संख्या '44' की दुर्दशा 2017 में जून में सामने आई थी, जब आमेर के किले में अमेरिकी पर्यटकों के एक समूह ने लगभग 10 मिनट तक लगातार उसे पिटते हुए देखा था. उसकी कहानी फैलने के बाद इसी वर्ष फरवरी में बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा ने पेटा इंडिया को लिखे पत्र में हाथी को तत्काल सुधार केंद्र भेजने का आग्रह किया था.

इसके बावजूद हाथी का इस्तेमाल पर्यटकों की सैर के लिए हो रहा है. पेटा इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मणिलाल वल्लियत ने कहा, "बेड़ियों में जकड़े हाथी को कुछ लोगों द्वारा निर्दयतापूर्वक पीटने का हृदयविदारक दृश्य एक दयालु व्यक्ति को हाथी की सवारी से मना करने के लिए काफी है."

उन्होंने कहा, "पेटा इंडिया ने आमेर के किले में पुरानी और क्रूर 'हाथी सैर' को बंद करने के लिए हाल ही में पट्टिका लगाने का अभियान शुरू किया है."

पट्टिका अभियान अप्रैल में पेटा इंडिया की एक रिपोर्ट के बाद लागू किया गया. रिपोर्ट में आमेर के किले और 'हाथी गांव' में सैर के लिए उपयोग किए जाने वाले हाथियों से क्रूरता की सच्चाई सामने आई. पेटा इंडिया ने उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ में एक याचिका दायर कर आमेर के किले में हाथियों की अवैध सैर को खत्म करने की मांग की.

वल्लियत ने कहा, "उच्च न्यायालय ने पिछले महीने जानवरों का पंजीकरण प्रमाण पत्र उनके मालिक के नाम के साथ करने की सिफारिश की. लेकिन 'एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया' और राज्य सरकार के पशु चिकित्सकों की एक टीम ने जांच में पाया कि हाथी गांव में ऐसा कोई प्रमाण पत्र नहीं है."

ट्रिप एडवाइजर, द ट्रैवल कॉर्पोरेशन, इंट्रेपिड ट्रैवल, स्मार टूर्स, एसटीए ट्रैवल और टीयूआई जैसी वैश्विक ट्रैवल एजंसियों सहित लगभग 100 ट्रैवल एजेंसियां हाथियों के विनाश की गतिविधियों से खुद को दूर रखा है.

(इनपुट आईएएनएस)