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जयपुर: पुलिस थाने में दुष्कर्म पीड़िता के आत्मदाह की घटना पर सियासत शुरू

एक तरफ जहां वैशाली नगर सीआई और सीईओ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है वहीं पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव के मीडिया के दिए बयान की आलोचना हो रही है.

जयपुर: पुलिस थाने में दुष्कर्म पीड़िता के आत्मदाह की घटना पर सियासत शुरू
दुष्कर्म पीड़ित महिला के आत्मदाह की घटना ने सियासत में भूचाल ला दिया है.

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में वैशाली नगर पुलिस थाने में दुष्कर्म पीड़ित महिला के आत्मदाह की घटना ने सियासत में भूचाल ला दिया है. इस मामले में शुरुआती जांच में पुलिस की लापरवाही और उसके बाद पुलिस कमिश्नर की तरफ से दिए गए गैर जिम्मेदाराना बयान को लेकर हंगामा मचा हुआ है. भाजपा जहां इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कठघरे में खड़ा कर रही अब इस मुद्दे को लेकर राजस्थान सरकार के दो मंत्री भी आमने-सामने हो गए हैं.

राजधानी जयपुर के वैशाली नगर पुलिस थाने में दुष्कर्म पीड़िता के आत्मदाह के मामले ने तूल पकड़ लिया है. एक तरफ जहां वैशाली नगर सीआई और सीईओ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है वहीं पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव के मीडिया के दिए बयान की आलोचना हो रही है. लेकिन इस मामले में राजस्थान सरकार के 2 कैबिनेट मंत्रियों नहीं भी विरोधाभासी बयान दिए हैं. इतना गंभीर प्रकरण होने के बाद भी इस मामले में कैबिनेट मिनिस्टर शांति धारीवाल ने चौंकाने वाला बयान दिया है. 

शांति धारीवाल ने विधानसभा में मीडिया से बात करते हुए यह तो माना की इस मामले में पीड़िता के साथ पुलिस थाने में सही व्यवहार नहीं हुआ है. पुलिस की जांच में चूक हुई है और सीआई को सस्पेंड किया जाएगा. लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा इस मामले में सवाल ये भी है कि संबंध आपसी सहमति के थे या नहीं. क्योंकि पुलिस की जांच में सामने आया है कि 4 साल से दोनों के बीच रिश्ता था. पीड़िता और आरोपी जयपुर उदयपुर नैनीताल सहित कई जगहों पर घूमने गए थे. अगर दुष्कर्म जैसी कोई बात होती तो पीड़िता पहले शिकायत दर्ज करवाती. पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट में भी इंजरी जैसी जानकारी सामने नहीं आई है. मामले में पुलिस कमिश्नर की ओर से दिए गए बयान पर शांति धारीवाल ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. धारीवाल ने कहा सीआई को सस्पेंड किया जाएगा अब मामले की जांच सीआईडी सीबी में एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारी को सौंपी जाएगी.

वहीं राजस्थान सरकार के दूसरे मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने इस मामले में पुलिस की ओर से दिए गए बयान पर कड़ा एतराज जताया है. प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा है प्रकरण में जांच पूरी हुए बिना पुलिस फैसला सुनाने वाली कौन होती है. यह मामला कोर्ट पर छोड़ दिया जाना चाहिए था। अगर मामले में महिला के आरोप सही नहीं होते तो पुलिस ऐसा लगा देती लेकिन किसी भी प्रकरण में जांच पूरी हुए बिना क्लीनचिट देने वाली पुलिस कौन होती है. पुलिस को इस तरह के बयान नहीं देने चाहिए थे प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि थाने में पीड़िता के साथ सही व्यवहार नहीं हुआ इसी वजह से उसे आत्मदाह जैसा कदम उठाना पड़ा.

अशोक लाहोटी ने इस प्रकरण को लेकर भाजपा ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधा है. भाजपा विधायक अशोक लाहोटी ने कहा है कि राजस्थान में मुख्यमंत्री के पास गृह विभाग का भी जिम्मा है लेकिन राजस्थान में कानून व्यवस्था चौपट हो चुकी है. जयपुर में इस तरह का अपने-अपने पहला मामला आया है जिसमे महिला को पुलिस थाने में आत्मदाह करने के लिए मजबूर होना पड़ा. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पास दिल्ली जाने से ही फुर्सत नहीं है कानून व्यवस्था के नाम पर पोपा बाई का राज बन चुका है.

अलवर में हुए नाबालिक लड़की के साथ गैंगरेप की घटना के बाद जयपुर की इस घटना ने एक बार फिर से राजस्थान में पुलिस सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद थानों में कई बार पुलिस के व्यवहार मैं सुधार को लेकर नसीहत दे चुके हैं. सीएम ने अपने बजट में पुलिस थानों में स्वागत कक्ष बनाए जाने की घोषणा भी की है लेकिन लगता नहीं है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के इन आदेशों की कोई पालना हो रही है. इसके बाद मंत्रियों के जिस तरह से बयान आ रहे हैं उसे लगता है कि महिला के आत्मदाह का यह मामला अभी और तूल पकड़ेगा.