जयपुर: स्पीकर की टिप्पणी से सन्न हुई राजस्थान विधानसभा, सीपी जोशी बोले...

पूरा मामला तब हुआ जब बीजेपी की नारेबाजी के बाद संसदीय कार्य मन्त्री शांति धारीवाल ने बीजेपी के विधायकों को प्रताड़ित करने की मांग की. 

जयपुर: स्पीकर की टिप्पणी से सन्न हुई राजस्थान विधानसभा, सीपी जोशी बोले...
अध्यक्ष ने सदन को सुचारु तरीके से चलाने के लिए सभी से आग्रह किया.

जयपुर: राजस्थान विधानसभा में शून्यकाल के दौरान उस वक्त बेहद गंभीर स्थिति बन गई जब खुद विधानसभा अध्यक्ष ने अपने आपको प्रताड़ित बताया. अध्यक्ष ने आसन पर से ही कह दिया कि वे खुद इस कुर्सी पर बैठकर खुद को प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं. अध्यक्ष की इस टिप्पणी के बाद पूरे सदन में खामोशी छा गई. इस पर सदन के नेता के नाते खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्थिति संभाली और सदन को सुचारू तरीके से चलाने के साथ ही विपक्ष की बात का सम्मान करने की बात कही.

दरअसल, पूरा मामला तब हुआ जब बीजेपी की नारेबाजी के बाद संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने बीजेपी के विधायकों को प्रताड़ित करने की मांग की. धारीवाल ने अध्यक्ष से कहा कि वे हमेशा सत्ता पक्ष को ही प्रताड़ित करते हैं,  जबकि सदन में विपक्ष को भी उसके आचरण के लिए प्रताड़ित करना चाहिए. इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने खुद को प्रताड़ित महसूस करने की बात कही. 

पूरा मामला, सदन में हंगामे और व्यवस्था से जुड़ा है. बुधवार को प्रश्नकाल में एक प्रश्न का पूरा जवाब नहीं आने का आरोप लगाते हुए बीजेपी के विधायक सदन के वेल में पहुंच गए और नारेबाजी की. इसके बाद जैसे ही प्रश्नकाल खत्म हुआ तो अध्यक्ष ने अपनी व्यवस्था दी और सदन को सुचारु तरीके से चलाने के लिए सभी से आग्रह किया. 

इस पर नेता प्रतिपक्ष गुलाबचन्द कटारिया ने भी अपनी सहमति जताई. कटारिया ने कहा कि सदन में संयम बरता जाना चाहिए. उन्होंने नीमकाथाना से कांग्रेस विधायक सुरेश मोदी के वेल क्रॉस करते हुए विपक्ष की तरफ आने और बीजेपी विधायकों को पर्चा पकड़ाने को गलत बताया. कटारिया ने कहा कि ऐसे में किसी दिन विधायक उलझ गए तो इस सदन का नाम खराब होगा.

इसके ठीक बाद संसदीय कार्यमंत्री शान्ति धारीवाल उठे और बीजेपी विधायकों पर कार्रवाई की मांग की. धारीवाल ने बीजेपी विधायकों पर सदन में कचरा फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि नीमकाथाना विधायक ने तो जो किया सो किया. लेकिन बीजेपी के विधायकों ने भी वह पर्चा फाड़कर सदन के फ्लोर पर फैला दिया. जिसे ठीक नहीं माना जा सकता. धारीवाल ने इस पर बीजेपी विधायकों को प्रताड़ित करने की मांग करते हुए कहा कि अध्यक्ष हमेशा सत्ता पक्ष को ही प्रताड़ित करते हैं. जबकि बीजेपी विधायकों के कृत्य पर उन्हें भी प्रताड़ित किया जाना चाहिए. 

धारीवाल की इस टिप्पणी पर अध्यक्ष सीपी जोशी ने खुद को प्रताड़ित बताया तो सदन के नेता के नाते मुख्यमन्त्री अशोक गहलोत ने तत्काल दखल दिया. गहलोत ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सदन में अध्यक्ष प्रताड़ित महसूस करें. सभी को सदन की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए. सीएम ने कहा कि विपक्ष की असहमति का सत्तापक्ष सम्मान करे, लेकिन साथ ही यह भी देखना चाहिए कि केवल राजनीति करने के लिए कोई मुद्दा नहीं लाया जाए. सीएम ने दोनों पक्षों को सदन की गरिमा का ध्यान रखने को कहा.

इस घटनाक्रम के बाद आसन से अध्यक्ष ने कहा कि प्रश्न की एक सीमा है. प्रश्न उठाने के कुछ तरीके हैं. अगर किसी को इस बारे में बात करनी है तो वे आ सकते हैं. जोशी ने कहा कि प्रश्नकाल और सदन की दूसरी कार्रयवाही नियमों के तहत ही होगी और पक्ष-विपक्ष पर भी नियम समान रूप से लागू होते हैं. 

इस घटनाक्रम के बाद सदन में विधायकों ने संयमित रवैया तो दिखाया. लेकिन सवाल यह है कि ऐसा कब तक रहेगा? सोमवार से शुरू हुए बजट सत्र के दूसरे चरण में अभी तक तीन दिन की कार्यवाही हुई है. तीनों दिन अध्यक्ष को सख्त होना पड़ा है. सोमवार को संयम लोढ़ा को सदन के वेल में आने पर चेताया तो दूसरे दिन छपाक से उछले विवाद के बाद बीजेपी ने प्रश्नकाल का बहिष्कार किया. मंगलवार को सदन के स्थगित होने से पहले भी पक्ष-विपक्ष में आरएसएस के मुद्दे पर तीखी नोंक-झोंक हुई. अब तीसरे दिन के घटनाक्रम में स्पीकर की गम्भीर टिप्पणी और सदन के नेता के नाते मुख्यमन्त्री की अपील के असर का महत्व तभी होगा. जब सभी सदस्य इसे समझें और सुचारू सदन चलाने के लिए इस पर अमल भी करें.