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जयपुर: जिला प्रशासन ने निजी टैंकरों पर कसा शिकंजा, पानी के लिए न्यूनतम दर की तय

जलदाय विभाग की तमाम आपत्ति को दरकिनाकर कर जिला प्रशासन ने यह दर प्रभावी कर दी है. कलेक्टर का कहना है कि जरूरत पड़ने पर रेसमा भी लागू किया जा सकता है.

जयपुर: जिला प्रशासन ने निजी टैंकरों पर कसा शिकंजा, पानी के लिए न्यूनतम दर की तय
प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार- DNA)

जयपुर: जिला प्रशासन ने पानी के निजी टैंकर संचालकों पर शिकंजा कस दिया है. निजी टैंकर संचालक अब न्यूनतम 180 रुपए और 20 किलोमीटर तक 312 रुपए तक ही प्रति टैंकर ले सकेंगे. इससे ज्यादा राशि लेने वाले टैंकर और ट्यूबवेल को अधिग्रहित किया जाएगा. हालांकि, इससे ज्यादा दूरी होने पर औसत दर से शुल्क लेने की छूट दी गई है. 

जलदाय विभाग की तमाम आपत्ति को दरकिनाकर कर जिला प्रशासन ने यह दर प्रभावी कर दी है. कलेक्टर का कहना है कि जरूरत पड़ने पर रेसमा भी लागू किया जा सकता है. राजधानी में पहली बार है जब निजी टैंकर की दर प्रभावी की गई है. करीब तीन साल पहले भी यह कवायद हुई थी लेकिन टैंकर संचालकों के विरोध के चलते प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा था. संभागीय आयुक्त के.सी. वार्मा की अध्यक्षता में बैठक हुई. 

इसमें जिला प्रशासन के अलावा जलदाय विभाग के अधीक्षण और अधिशासी अभियंता को बुलाया गया. इसी बैठक में यह दर निर्धारित की गई. ट्यूबवेल अधिग्रहण और निजी टैंकरों की दर निर्धारित करने के मामले में कलेक्टर और जलदाय विभाग के अधिकारियों के बीच ठनी हुई थी. जलदाय विभाग ने इससे हाथ खींच लिए थे. इसके बाद मामला और बढ़ गया. इस बीच संभागीय आयुक्त ने बैठक बुलाई. इसमें कलेक्टर जगरूप सिंह यादव भी शामिल हुए. 

निर्धारित दर से ज्यादा राशि लेने पर जनता जिला प्रशासन और जलदाय विभाग में शिकायत कर सकते हैं. जलदाय विभाग में 181 नम्बर और जिला प्रशासन के कंट्रोल रूम में शिकायत करा सकेंगे. कलक्टर ने शिकायत पर कार्रवाई के लिए टीम भी बनाने के निर्देश दे दिए हैं. दरअसल, शहर का 30 प्रतिशत इलाके में सरकारी पेयजल सप्लाई नहीं है. यहां निजी टैंकर, ट्यूवबेल पर ही पेयजल सप्लाई की जा रही है. जलदाय विभाग कभी भी अधिग्रहण व दर निर्धारित करने के पक्ष में नहीं रहा. उलटे, इस पर आपत्ति जताता रहा. जिसका साइड इफेक्ट यह रहा कि टैंकर संचालक भी विरोध में उतरते रहे.