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जयपुर: रेलवे के निजीकरण को लेकर कर्मचारियों ने किया केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन

नेशनल फेडरेशन आफ इंडियन रेलवेमैन ने उत्पादन इकाइयों के निगमीकरण और रेलवे गतिविधियों के निजीकरण और निजी दलों को गाडियों को सौंपने के लिए प्रस्तावों को वापस लेने की मांग की.

जयपुर: रेलवे के निजीकरण को लेकर कर्मचारियों ने किया केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन
कर्मचारियों ने पदों के आत्मसमर्पण और रेलवे गतिविधियों की आउटसोर्सिंग बंद करने की बात भी कही.

दामोदर प्रसाद/जयपुर: रेलवे का निगमीकृत और निजीकरण के केंद्रीय सरकार के खिलाफ का विरोध आज जयपुर रेलवे स्टेशन पर कांफ्रेंस आयोजित की गई. नेशनल फेडरेशन आफ इंडियन रेलवेमैन ने रेलवे कर्मचारियों के सभी वर्गो को रेलवे उत्पादन इकाइयों और निजी दलों को गाडियों को सौंपने के केंद्र सरकार के खिलाफ बडे पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है.

एनएफआईआर के महासचिव डॉ.एम राघवैया ने बताया की केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की बजट घोषणाएं बहुत निराशाजनक रहीं है, क्योंकि रेलकर्मियों के मुद्दों पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया गया है.

नेशनल फेडरेशन आफ इंडियन रेलवेमैन ने उत्पादन इकाइयों के निगमीकरण और रेलवे गतिविधियों के निजीकरण और निजी दलों को गाडियों को सौंपने के लिए प्रस्तावों को वापस लेने की मांग की. रेलवे से राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली वापस लेने की मांग रखी. साथ कर्मचारियों ने पदों के आत्मसमर्पण और रेलवे गतिविधियों की आउटसोर्सिंग बंद करने की बात भी कही.

साथ ही नेशनल फेडरेशन आफ इंडियन रेलवेमैन ने कहा कि कर्मचारियों के मुद्दों पर आदेश जारी करें जिस पर एनएफआईआर के साथ समझौता हुआ. रेलवे परिसम्पत्तियों, रेलवे कॉलोनियों को निजी दलों को सौंपना बंद करने की मांग भी की. कार्यशालाओं और उत्पादन इकाइयों के कर्मचारियों के लिए प्रोत्साहन बोनस दरों में वृद्धि सुनिश्चित करना और एनएफआईआर के साथ आयोजित विचार-विमर्श के आधार पर वरिष्ठ अनुभाग अभियंताओं को प्रोत्साहन बोनस भत्ता भी बढ़ाने की बात भी की.

वहीं भारतीय रेल पर सुरक्षा श्रेणियों को जोखिम और कठिनाई भत्ता प्रदान करना और कर्तव्यों के निष्पादन के दौरान इन श्रेणियों के लिए जोखिम और कठिनाई के तत्व पर विचार करते हुए ट्रेक मेंटेनरों के लिए मौजूदा जोखिम और कठिनाई भत्ता में वृद्धि करने की मांग रखी.

अनएफआईआर के महासचिव ने बताया की पूर्व रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खडगे और सुरेश प्रभु ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव दिया था, कि रेलवे को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली से छूट दी जानी चाहिए, क्योंकि इसकी भूमिका अद्वित्तीय और जटिल है. सीमा की सुरक्षा के लिए रक्षा बलों की तरह ड्यूटी के दौरान दूरदराज के स्थानों पर कार्यबल काम करता है. इस दौरान अपनी जान गंवाता है. उन्होंने रेल मंत्री पीयूष गोयल के साथ भी इस मुद्दे पर चर्चा की है. मंत्री ने आश्वासन दिया है की पहले से भेजे गए प्रस्तावों पर उचित पहल की जाएगी.