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Jaipur News: राजस्थान के जयपुर जिले में जलदाय विभाग में चार्जशीट यू-टर्न हो गई. अलवर एनसीआर घोटाले में रिटायरमेंट से पहले अफसर की चार्जशीट फिर से घूम गई. घूमी हुई चार्जशीट के बाद अब सवाल खडे़ हो गए हैं कि क्या रिटायरमेंट से पहले कार्रवाई से बचाने की कोशिश तो नहीं है. आखिरकार अलवर में कैसे पानी की योजनाएं पानी-पानी हुईं.
अलवर एनसीआर घोटाले में जांचों की कार्रवाई के बीच चार्जशीट यू-टर्न हो गई. तत्कालीन एक्सईएन नरेंद्र प्रसाद गुप्ता 30 सितंबर को रिटायर हो रहे हैं. इससे पहले उन्हें 16 सीसी के तहत चार्जशीट थमाकर कार्रवाई नहीं की, लेकिन चार्जशीट डीओपी पहुंचने से पहले ही यू-टर्न हो गई.
अतिरिक्त मुख्य अभियंता भगवान जाजू ने क्वालिटी कंट्रोल चीफ इंजीनियर आरके मीणा द्वारा भेजी गई अधूरे दस्तावेजों की चार्जशीट को फिर से लौटा दिया. दो दिन की छुट्टी है. सरकारी दफ्तर 30 सितंबर को खुलेंगे और रिटायरमेंट भी उसी दिन है. ऐसे में कार्रवाई होना मुश्किल है.
जांच कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, 8 निविदाओं में भुगतान के दस्तावेज जिसमें नोटशीट, प्रमाणित बिलों की प्रतियां, माप पुस्तिका चार्जशीट के साथ भेजी ही नहीं. नरेंद्र प्रसाद को उनके समक्ष एक्सईएन ने ही नोटिस दे दिया. जबकि नियमों के तहत उच्च अधिकारी नोटिस दे सकता है.
विभाग की जांच रिपोर्ट में तत्कालीन एक्सईएन राजेश मीणा को दोषी माना है. पत्र में कहा गया है कि एक्सईएन के साथ-साथ एईएन, जेईएन चार्जशीट भी एक साथ भेजी जाए. इंजीनियर्स ने बिना काम के मैसर्स खोड़ा कंस्ट्रक्शन और समीक्षा कंस्ट्रक्शन को फर्जी भुगतान किया था.
अलवर एनसीआर 2 में 8 करोड़ से ज्यादा की 6 योजनाओं में भारी अनियमित्ताएं मिली. नसोपुर योजना में मैसर्स शिवा एसोशिएट गोरखपुर, सहजपुर योजना में रतावत ब्रदर्स, मुंडपुरीखुर्द योजना में मैसर्स अवेन्यू बिल्डटेक अलवर, जावली योजना और बरोली योजना में मैसर्स महादेव बोरवले बिलाडा जोधपुर, कुपालबाड़ी योजना में मैसर्स रातावत ब्रदर्स पलखड़ी अलवर के खिलाफ अधीक्षण अभियंता आलोक कुमार गुप्ता की कमेटी में जांच हुई, जिसमें भारी अनियमित्ताएं मिली.
जांच में खुलासा हुआ था कि इंजीनियर्स ने पाईपों का फर्जी भुगतान किया. मुख्य अभियंता की बिना अनुमति के प्राइवेट टेस्ट लैब से एसबीसी टेस्टिंग करवाई. नलकूप चालू हुए बिना ही भुगतान किया गया. आरोप है कि इन फर्मों और इंजीनियर्स के खिलाफ अब तक कार्रवाई नहीं हुई. जबकि दो साल पहले इस कार्यों की जांच हुई थी.
मुख्य सचिव सुधांश पंत के निर्देश के बाद संयुक्त सचिव प्रवीण लेखरा और क्वालिटी कंट्रोल चीफ इंजीनियर आरके मीणा की जांच चल रही है. इस मामले पर दोनों ही अफसरों ने कैमरे पर बोलने से साफ इंकार कर दिया. हालांकि इस मामले में जल्द ही जेजेएम एमडी रिपोर्ट एसीएस अखिल अरोड़ा को सौंपेंगे. दोनों अफसरों पर जांच पर कार्रवाई रोकने के आरोप लगे हैं. अब सवाल ये है कि जांच रोकने वाले अफसरों पर जलदाय विभाग एक्शन ले पाएगा.
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