Alwar News: राजपरिवार और पूर्व विधायक के बीच जमीन विवाद पर एडीजे कोर्ट का बड़ा फैसला, जानें पूरा मामला

Rajasthan News: अलवर में राजपरिवार के सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह व पूर्व विधायक बनवारी लाल सिंघल के बीच जमीन विवाद पर एडीजे कोर्ट नं. 3 ने आदेश दिया कि राजपरिवार दो माह में सिंघल को 10 लाख रुपये 6% ब्याज सहित लौटाए. सिंघल ने फैसले पर असहमति जताई.

Alwar News: राजपरिवार और पूर्व विधायक के बीच जमीन विवाद पर एडीजे कोर्ट का बड़ा फैसला, जानें पूरा मामला
Image Credit: royal family member jitender singh and former MLA banwari lal singhalSource: ज़ी न्यूज़ डेस्क

Alwar News: राजस्थान के अलवर से बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है. जहां राज परिवार के सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और पूर्व विधायक बनवारी लाल सिंघल के बीच चल रहे जमीनी विवाद में एडीजी कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है. फैसले में एडीजी कोर्ट नंबर तीन ने मात्र 3 महीने में फैसला सुनाते हुए राज परिवार को आदेश दिए हैं कि दो माह के भीतर बनवारी लाल सिंघल को 10 लाख रुपए सालाना 6% ब्याज के लिए लौटाएं. जबकि इससे पहले एडीजे नंबर 4 ने जितेंद्र सिंह के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया था. जिसमें जितेंद्र सिंह ने बताया था कि जब उनके दादा तेज सिंह ने 4.5 बीघा जमीन का एग्रीमेंट बनवारी लाल सिंघल से हुआ था. तब उनके दादा मानसिक रूप से अस्वस्थ थे. आपको बता दें कि यह केस अलग-अलग कोर्ट में विचाराधीन है. और दोनों ही वाद अलग-अलग है.

क्या था पूरा मामला?
एग्रीमेंट करने के बाद तेज सिंह के बारिश पूर्व मंत्री ने अपने दादा को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताते हुए एडीजी नंबर 4 में मेडिकल रिपोर्ट के साथ प्रार्थना पत्र दिया था. जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था. लेकिन अब एडीजे कोर्ट नंबर 3 में यह आदेश दिया. कि बनवारी सिंघल को 10 लाख रुपये 6% ब्याज दर से लौटाने होंगे. अलवर के पूर्व राज परिवार के सदस्य जितेंद्र सिंह ने वर्ष 2005 में एडीजे कोर्ट में सिविल याचिका लगाई थी. जिसमें कहा गया था कि मेरे पिता प्रताप सिंह के निधन के बाद मैं दादा सवाई तेज सिंह की संपत्ति की देखरेख करता हूं. मेरे दादाजी की उम्र 94 साल है. सोचने समझने की स्थिति क्षीण हो गई है.

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पूर्व विधायक फैसले से नहीं खुश
इस संबंध में विधायक रहे बनवारी लाल सिंघल ने कोर्ट के फैसले पर असहमति जताते हुए कहा है. कि न्यायालय से रिकॉर्ड की अवलोकन में चूक हुई है .इसे उच्च न्यायालय में जाकर दुरुस्त कराया जाएगा .जो दावा हमने किया नहीं उस पर कैसे निर्णय हो सकता है .हमने दावे में रजिस्ट्री करने की मांग की थी. ना कि भुगतान वापस दिलाने की.

राजपरिवार के वकील बोले
पूर्व राजपरिवार की ओर से वकील रामेश्वर दयाल ने बताया कि राजपरिवार से जुड़ी इस मामले में जमीन के एग्रीमेंट के आधार दावा किया गया था. लेकिन कोर्ट ने जमीन को लेकर आदेश नहीं दिया. केवल पैसे लौटाने का आदेश दिया है. जमीन उनको देने का आदेश नहीं दिया. अगर पैसे से संतुष्ट हो जाते हैं तो अच्छा है. कोर्ट ने जमीन की डिक्री नहीं की. इसलिए पूर्व राजपरिवार के पक्ष में फैसला है.

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