Jaipur News: अवैध खनन पर प्रशासन ने कसा शिकंजा, इस नई तकनीक से हुआ पर्दाफाश

Rajasthan News: राज्य में अवैध खनन कर गलत तरीके से रवन्ना काटकर खनिज परिवहन करने वाले लीजधारकों की अब खैर नहीं है. खान एवं भूविज्ञान विभाग अब डिजिटल रिकॉर्ड की छानबीन कर ऐसी खानों को चिन्हित कर कार्रवाई कर रहा है.

Jaipur News: अवैध खनन पर प्रशासन ने कसा शिकंजा, इस नई तकनीक से हुआ पर्दाफाश
Image Credit: illegal mining jaipur

Jaipur News: राज्य में अवैध खनन कर गलत तरीके से रवन्ना काटकर खनिज परिवहन करने वाले लीजधारकों की अब खैर नहीं है. खान एवं भूविज्ञान विभाग अब डिजिटल रिकॉर्ड की छानबीन कर ऐसी खानों को चिन्हित कर कार्रवाई कर रहा है. जयपुर के चौमूं स्थित ऐसी ही एक खनिज लीज की जांच करते हुए 3 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है.

अवैध खनन पर कसा शिकंजा
ई-तकनीक की मदद से अब अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन पर शिकंजा कसा जाएगा. खान विभाग के निदेशक दीपक तंवर के नेतृत्व में तकनीक के माध्यम से खान विभाग ने बड़ी सफलता हासिल की है. खान निदेशक दीपक तंवर के निर्देश पर विभागीय कंप्यूटर विशेषज्ञ हेमंत मेनारिया और एक ई-ऑडिट कंपनी की मदद से एक तकनीकी प्रणाली विकसित की गई है. इस तकनीकी प्रणाली से ई-रवन्ना के दुरुपयोग की गहन जांच संभव हो सकी है. अब खान विभाग यह जांच कर सकता है कि वास्तव में उक्त अवधि में उतना खनन हुआ था या नहीं. खान लीजधारकों द्वारा जारी किए जाने वाले रवन्ने की जांच का यह मामला जयपुर के चौमूं में खुला है. चौमूं स्थित बालाजी एंड संस खनन लीज संख्या 112/1992 की जांच की गई. लीजधारक के बीते 5 वर्षों के प्रत्येक रवन्ना व डिस्पैच डेटा का सूक्ष्म विश्लेषण किया गया. इसके आधार पर कम्पनी पर 3 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है.

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इस तरह खुला मामला
- खान विभाग की टीम ने लीजधारक के 5 वर्ष के रिकॉर्ड की जांच की.
- करीब 6 हजार वाहनों की गतिविधियों का डिजिटल रिकॉर्ड जांचा गया.
- रोचक यह था कि लीजधारक ने एक ही ट्रक को वजन पुल पर रखा.
- ट्रक को स्थिर रखकर बार-बार उसका डेटा लिया.
- लगभग 3900 ट्रकों के बराबर खनिज का अवैध तरीके से डिस्पैच किया.
- लीजधारक ने करीब 6800 टन खनिज गैरकानूनी रूप से निकाला.
- अवैध खनन और अवैध परिवहन के पेटे 3 करोड़ जुर्माना लगाया गया.
- खान विभाग ने संबंधित लीजधारक को नोटिस जारी किए.
- लीजधारक के खिलाफ FIR दर्ज कराने के भी निर्देश दिए गए.

इस तकनीक से हुआ पर्दाफाश
राज्य में यह पहला ऐसा मामला है जिसमें ई-तकनीक के साक्ष्यों के आधार पर अवैध खनन का पर्दाफाश हुआ है. विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस प्रणाली के माध्यम से अन्य लीजों की भी स्क्रूटनी की जा रही है और जल्द ही कई और खुलासे हो सकते हैं. निदेशक दीपक तंवर ने बताया कि राज्य सरकार एवं खान विभाग ने इस पहल को मील का पत्थर माना है और इसे भविष्य में अवैध खनन पर प्रभावी रोकथाम के एक आदर्श मॉडल के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा.

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