AI कैसे बदल रहा है हायरिंग, लर्निंग और टैलेंट डेवलपमेंट, नौकरियों को देखने की नई सोच

AI Revolution: कनेक्टेड वर्कप्लेस, जहां AI टीमों के हायर करने, सीखने और टैलेंट को आगे बढ़ाने के तरीके को बदल रहा है.

AI कैसे बदल रहा है हायरिंग, लर्निंग और टैलेंट डेवलपमेंट, नौकरियों को देखने की नई सोच
Image Credit: AI Revolution

Jaipur News: AI चुपचाप ऑर्गेनाइजेशनों की प्रक्रियाओं को अंदर से बदल रहा है. यह किसी बड़े शोर-शराबे या अचानक बदलाव के जरिए नहीं, बल्कि गहरे और संरचनात्मक बदलावों के जरिए हो रहा है, जो यह तय करते हैं कि कंपनियां कैसे काम करती हैं, कैसे इनोवेशन करती हैं और कैसे आगे बढ़ती हैं. रिक्रूटर्स अब AI को सिर्फ अलग-अलग इस्तेमाल के मामलों तक सीमित नहीं रख रहे, बल्कि इसे एक रणनीतिक आधार के रूप में अपना रहे हैं. इसके चलते बुनियादी बदलाव हो रहे हैं- अब जॉब रोल्स को कामों की सूची की बजाय स्किल्स के सेट के रूप में देखा जा रहा है, इंटरनल मोबिलिटी को कोर टैलेंट स्ट्रैटेजी माना जा रहा है, और रिक्रूटर्स अब सिर्फ हायर करने वाले नहीं रह गए हैं, बल्कि रणनीतिक करियर एडवाइजर बन रहे हैं.

Zee Media की स्पेशल सीरीज ‘Beyond AI, CVs & JDs’ के पहले एपिसोड में, जो LinkedIn के साथ किया गया, LinkedIn Talent & Learning Solutions, India की हेड रुची आनंद और Wipro के Chief Operating Officer संजीव जैन ने इस बात पर चर्चा की कि कैसे AI ऑर्गेनाइजेशनात्मक कामकाज के एक नए दौर की शुरुआत कर रहा है- जो ज्यादा स्मार्ट, ज्यादा कनेक्टेड और ज्यादा सहयोगी है.

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AI का असर सिर्फ ऑपरेशनल नहीं, बल्कि संरचनात्मक है

AI ऑर्गेनाइजेशन की प्लानिंग, फैसले लेने और क्षमताएं बनाने की नींव को नए सिरे से शेप दे रहा है. हायरिंग से लेकर परफॉर्मेंस तक, AI एंटरप्राइज के हर स्तर को प्रभावित कर रहा है. LinkedIn के डेटा के मुताबिक, 52% रिक्रूटर्स AI टूल्स अपनाने को प्राथमिकता दे रहे हैं और भारत में लगभग आधी कंपनियों ने हायरिंग टेक्नोलॉजी में अपना निवेश बढ़ाया है. आनंद इस बदलाव को “हाइप से हैंडबुक तक” का सफर बताती हैं और इस बात पर जोर देती हैं कि AI अब रोजमर्रा का टूल बन चुका है, जिसे कोर बिजनेस फंक्शंस में लागू किया जा रहा है.

वैल्यू चेन में AI को शामिल करना

AI अब ऑर्गेनाइजेशनात्मक प्रक्रियाओं में गहराई से शामिल हो चुका है और यह बदल रहा है कि कंपनियां कैसे काम करती हैं, क्लाइंट्स को कैसे सर्व करती हैं और वैल्यू कैसे क्रिएट करती हैं. जैन के अनुसार, जब इंटेलिजेंस को रोजमर्रा के वर्कफ्लो में पिरो दिया जाता है, तो टीमें ज्यादा तेजी और आत्मविश्वास के साथ काम करती हैं. यही वजह है कि स्किल-फर्स्ट रोल डिजाइन और लगातार इंटरनल कैपेबिलिटी बिल्डिंग पूरे ऑर्गेनाइजेशन में सामूहिक दक्षता बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी हो जाती है.

काम का भविष्य कनेक्टेड है

AI-सक्षम वर्कप्लेस की ओर बढ़ता कदम उस भविष्य की ओर ले जा रहा है, जिसे आनंद ‘कनेक्टेड’ कहती हैं. उनके मुताबिक, कनेक्टेड वर्कप्लेस वह होता है जहां स्किल्स, लर्निंग और मोबिलिटी, ग्रोथ के साथ-साथ चलती हैं, जिससे टैलेंट डेवलपमेंट तात्कालिक जरूरत की बजाय एक सोच-समझकर की गई प्रक्रिया बन जाता है. यहां AI की अहम भूमिका है- यह टीमों के बीच क्षमताओं का स्तर बराबर करता है और ऑर्गेनाइजेशनों को वहां टैलेंट तैनात करने में मदद करता है, जहां वह सबसे ज्यादा वैल्यू क्रिएट कर सके.

जैन ने बताया कि Wipro पहले से ही इस हकीकत को जी रहा है. 60 देशों में फैले 2.3 लाख से ज्यादा कर्मचारियों वाले इस ग्लोबल वर्कफोर्स के लिए कंपनी WeNow नाम का एक AI-ड्रिवन इंटरनल असिस्टेंट इस्तेमाल करती है, जो हर हफ्ते 1 लाख से ज्यादा कर्मचारियों के सवालों का समाधान करता है. यह सिर्फ ऑपरेशनल सुविधा नहीं है, बल्कि एक कल्चरल इन्फ्रास्ट्रक्चर है. AI अब वह कड़ी बन रहा है, जो कर्मचारियों को सीमाओं और टाइम जोन्स के पार बिना रुकावट काम करने में मदद करता है.

SMBs के लिए भी बराबरी का मैदान बना रहा है AI

जहां Wipro जैसी बड़ी कंपनियां इस अपनाने की दौड़ में आगे हैं, वहीं छोटे और मझोले व्यवसाय (SMBs) भी तेजी से इस अंतर को कम कर रहे हैं. LinkedIn के डेटा के अनुसार, 10 में से 9 SMBs (96%) पहले से AI में निवेश कर रहे हैं या इसकी योजना बना रहे हैं. यह संकेत है कि अब प्रयोग के दौर से निकलकर AI को ऑपरेशंस के कोर में शामिल किया जा रहा है. AI छोटे फर्म्स के लिए ऑर्गेनाइजेशनात्मक मजबूती बनाने के तरीके भी बदल रहा है- टैलेंट को सोर्स करने, परखने और ऑनबोर्ड करने की खाई कम हो रही है, जहां स्किल्स और डिजिटल समझ, पारंपरिक डिग्रियों से ज्यादा अहम बनती जा रही हैं.

भारत के वर्कफोर्स के लिए स्किल्स सबसे बड़ा फायदा

भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए, अलग-अलग इंडस्ट्रीज में AI का बड़े पैमाने पर अपनाया जाना अपस्किलिंग की जरूरत को और बढ़ा देता है. India Inc. पहले से इस दिशा में आगे बढ़ रहा है. आनंद के मुताबिक, भारत में दुनिया के सबसे ऊंचे AI स्किल पेनिट्रेशन रेट्स में से एक है, और यहां प्रोफेशनल्स ग्लोबल एवरेज की तुलना में दोगुना समय सीखने में लगा रहे हैं. भारत की डेमोग्राफिक डिविडेंड को एक मजबूत वैश्विक ताकत में बदलने के लिए जरूरी है कि प्रोफेशनल्स जिज्ञासु बने रहें, अपनी स्किल्स को लगातार अपडेट करें और भविष्य के लिए तैयार रहने के लिए निरंतर सीखने को अपनाएं.

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Ansh Raj

Ansh Raj

अंश राज, Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत है. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर पैनी नजर रखते हैं. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर की खबरों में खास दिलचस्पी. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनाव और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बयान पर नजर. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करने में मजा आता है. इसके अलावा कंटेंट को पैकेजिंग करके परोसना इनकी खासियत है. डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव. इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है और वर्तमान में मेरठ कॉलेज से LLB की पढ़ाई कर रहे हैं. खबरों की गंध सूंघने और उसे सबसे पहले, सबसे तेज परोसने का जुनून. यही अंश राज हैं
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