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Alwar News: राजस्थान सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा ने कहा है कि अलवर जिले के सरिस्का बाघ परियोजना में चलने वाली माइंस सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ही बंद हुई थी .और उनके आदेश से ही चलेगी. सरिस्का के क्रिटिकल टाइगर हैबिटाट के बदलाव से इस पर कोई असर दिखाई नहीं दे रहा. उन्होंने यह बात आज अलवर सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही.
उन्होंने कहा कि सरिस्का में क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट के एरिया में कोई कमी नहीं हुई है. बल्कि बढ़ोतरी हुई है .सरिस्का टाइगर रिजर्व हो या रणथंबोर सहित राजस्थान के जितने भी टाइगर रिजर्व सेंचुरी है. वहां वन्यजीवों को सुरक्षित रखा जाएगा. वन क्षेत्र सुरक्षित रखा जाएगा और यहां तक की इन क्षेत्रों में स्थित गांव के ग्रामीणों के अधिकार भी सुरक्षित रखे जाएंगे.
क्रिटिकल टाइगर हैबिटाट के मामले में उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को कोई पेंडिंग नहीं रखा है.सीटीएच के एरिया का निर्धारण करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने ही निर्धारण कमेटी बनाई थी और उसी के आधार पर इसका निर्धारण किया गया था. अखबारों में जो खबर छप रही है वह सही नहीं है. सुप्रीम कोर्ट की पहली हियरिंग के बाद जो मिनिट्स हैं, उसमें सब कुछ सामने आ चुका है. सरकारी वकील ने विगत 12 को सुनवाई के दौरान 15 दिन का समय मांगा है.
सरिस्का में खान चलाने के मामले के संबंध में उन्होंने कहा की सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद ही तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने वह खाने बंद की थी. अब सर्वोच्च न्यायालय के आदेश अनुसार ही माइंस चलेंगी अन्यथा नहीं चलेंगी.उन्होंने कहा कि बाघों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अब टाइगर सेंचुरी के लिए महत्वपूर्ण आवश्यकता हो गई है कि सीटीएच का निर्धारण हो.
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