Rajasthan Siyasi Kissa: साल "1987 में एक छोटे से गांव मूंडवाड़ा में एक पारिवारिक शादी का जश्न... लेकिन इस जश्न में एक अनोखा नायक आया था, जो पुलिस के रडार पर था! 26 साल की उम्र में गांव का सरपंच बनने वाले इस नौजवान की कहानी क्या है?
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Rajasthan Siyasi Kissa: 1987 में, सीकर की धोद तहसील के एक छोटे से गांव मूंडवाड़ा में एक पारिवारिक शादी का जश्न चल रहा था. इस जश्न में शामिल होने के लिए एक 32 वर्षीय नौजवान अपने गांव आया हुआ था, जो पिछले कई महीनों से पुलिस के रडार पर था. बावजूद इसके, उसने जोखिम उठाकर शादी में शिरकत की. यह नौजवान महज 26 साल की उम्र में गांव का सरपंच बन गया था और यह उसका दूसरा कार्यकाल था. सुबह करीब छह बजे, जब उसे पता चला कि गांव के बाहर चार सौ पुलिसकर्मी उसे गिरफ्तार करने के लिए खड़े हैं, तो उसके लिए यह एक बड़ी चुनौती थी.
उसकी नींद खुलते ही उसने दौड़ना शुरू कर दिया. उस समय पुलिस के पास आधुनिक संसाधनों की कमी थी, और वाहन के नाम पर जीपें हुआ करती थीं जो कच्चे रास्तों पर अक्सर फंस जाती थीं. पुलिस विभाग में स्पोर्ट्स कोटे से अच्छे धावकों की भर्ती की जाती थी, जिन्हें "रेसर" कहा जाता था. इनका काम कच्चे रास्तों और खेतों में अपराधियों का पीछा करके उन्हें पकड़ना होता था. इस नौजवान को पकड़ने के लिए पुलिस ने अपने सबसे तेज़ रेसरों को लगाया था, और अब यह एक रोमांचक दौड़ का खेल बन गया था.
नौजवान को दौड़ते देख पुलिस ने अपने रेसरों को उसके पीछे लगा दिया. यह दौड़ करीब डेढ़ किलोमीटर तक चली, जब तक कि नौजवान पास के गांव मांडोता के बस स्टैंड के पास नहीं पहुंच गया. पुलिस का रेसर उसके महज 20 कदम पीछे था, और बस स्टैंड पर खड़े लोग इस रोमांचक दृश्य को देख रहे थे. रेसर ने चिल्लाकर कहा, "पकड़ो-पकड़ो, चोर-चोर!" लेकिन नौजवान जानता था कि इस गांव के लोग उसका साथ देंगे, क्योंकि यहीं के कारण वह फरारी काट रहा था. अचानक, नौजवान ने पीछे मुड़कर रेसर की ओर दौड़ लगा दी. रेसर ने सुना था कि यह नौजवान खतरनाक हथियार लेकर चलता है, और पुलिस की टुकड़ी काफी दूर थी. डर के मारे रेसर ने अपनी दिशा बदल दी और नौजवान से दूर भागने लगा.
नौजवान फिर गांव की तरफ लौटा तो बस स्टैंड पर खड़े लोग यह नज़ारा देख कर हंस रहे थे. उसे गले लगाया गया, पानी पिलाया गया. आखिर इसी गांव की वजह से वो यह सब भुगत रहा था. जल्दी एक आदमी को गांव की तरफ दौड़ाया गया ताकि नौजवान को भगाने के लिए ऊंट का बंदोबस्त किया जा सके. इस नौजवान का नाम था अमरा राम (Amra ram).
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अमरा राम की सांस सामान्य हो गई थी, और उनके सामने एक ऊंट तैयार खड़ा था. वह तेजी से ऊंट पर चढ़े और पुलिस को देखकर ऊंट को भगाना शुरू कर दिया. अमरा राम मांडोता में पैदा हुए थे और उन्होंने स्कूली दिनों में यहां के मैदानों में बकरियां चराई थीं, जिससे उन्हें हर कच्चे रास्ते की जानकारी थी. वह तेजी से उन रास्तों की ओर बढ़ने लगे जहां जीप का गुजरना असंभव था. अपनी स्थानीय जानकारी और ऊंट की गति का फायदा उठाकर, अमरा राम पुलिस को चकमा देने में सफल हो रहे थे.
भागते हुए अमरा राम को पीछे से भड़ाक की आवाज सुनाई दी, जो गोली चलने की थी. उनकी किस्मत अच्छी थी कि गोली उन्हें छू नहीं पाई. बचपन में स्कूल में पढ़ी गई पंक्ति "ऊंट रेगिस्तान का जहाज होता है" का असली अर्थ उन्हें उस दिन समझ में आया, जब ऊंट ने उन्हें पुलिस के हाथों से बचाकर सुरक्षित दूरी तक पहुंचाया. ऊंट की गति और सहनशक्ति ने अमरा राम को मुश्किल समय में सहारा दिया और उन्हें पुलिस की पकड़ से दूर रखने में मदद की.
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अमरा राम एक बार फिर पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहे थे. इस घटना की कहानी गांव-गांव में फैल गई, और हर बार सुनाने वाला अपनी तरफ से इसमें कुछ नया जोड़ देता था. धीरे-धीरे अमरा राम एक आम आदमी से बढ़कर एक किवदंती बनते चले गए. उनकी बहादुरी, चालाकी और पुलिस को चकमा देने की कहानियां लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गईं, और उनकी प्रसिद्धि बढ़ती गई.
अमरा राम, एक वामपंथी नेता, 2004 में राजस्थान की सीकर सीट से लोकसभा चुनाव लड़े थे. सीकर के कम्युनिस्ट कार्यकर्ताओं ने उनके लिए 'लाल-लाल लहराएगा, अमरा दिल्ली जाएगा' का नारा दिया था. अमरा राम की गांव-ढाणियों तक गहरी पैठ थी और वे हर कार्यकर्ता को नाम से जानते थे. हालांकि, चुनाव परिणामों ने उन्हें बड़ा झटका दिया और वे 3 लाख वोटों के अंतर से हार गए.
एक समर्थक का बयान चर्चा में आया था कि अगर वे अमरा राम को वोट देते, तो वे जीतकर दिल्ली चले जाते और स्थानीय मुद्दों पर पटवारी से लड़ने वाला कोई नहीं बचता. लेकिन अब 2024 में अमरा राम ने भाजपा नेता सुमेधानन्द सरस्वती को हराकर चुनाव जीत लिया है. अमरा राम एक अनुभवी राजनेता हैं, जो 1993 से 2013 तक राजस्थान विधानसभा के सदस्य रहे और 2014 से माकपा की राजस्थान इकाई के राज्य सचिव हैं.
इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी अमरा राम ने सीकर लोकसभा सीट से जीत दर्ज की. उनकी बेदाग छवि और युवाओं के बीच लोकप्रियता ने इस जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. अमरा राम शेखावाटी के कॉलेजों में SFI की मजबूत उपस्थिति और कम्युनिस्ट विचारधारा के प्रति छात्रों के आकर्षण के कारण एक आदर्श माने जाते हैं. यह जीत कांग्रेस और CPIM के गठबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.