Rajasthan Politics: "उदयपुर फाइल्स" पर गहलोत का बयान, हमसे जांच नहीं लेते तो अब तक...

Rajasthan Politics: "उदयपुर फाइल्स पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बयान, "फिल्म का तो पता नहीं, लेकिन अगर NIA जांच हमसे नहीं लेती तो आरोपियों को अब तक सजा मिल चुकी होती"...

Rajasthan Politics: "उदयपुर फाइल्स" पर गहलोत का बयान, हमसे जांच नहीं लेते तो अब तक...
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Rajasthan Politics: उदयपुर कन्हैयालाल हत्याकांड को लेकर बनी फिल्म 'उदयपुर फाइल्स' पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि फिल्म का तो पता नहीं, लेकिन यह केस हमारे से NIA नहीं लेती तो अब तक आरोपियों को सजा मिल चुकी होती. आरोपियों की बीजेपी नेताओं से नजदीकियां थी, ऐसे में उन्हें पोल खुलने का डर था.

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज विभिन्न मुद्दों पर बीजेपी को घेरा. उदयपुर फाइल्स को लेकर पूछे गए सवाल पर गहलोत ने कहा कि फिल्म के साथ तो नहीं जुडूंगा लेकिन हम विपक्ष में हैं और लगातार बोल रहे हैं कि कन्हैयालाल का जो केस हुआ था वह संगीन है. साथ में प्रदेश में तनाव का माहौल नहीं बने और हमने उस वक्त जो स्टेप उठाया दो-तीन घंटे में हमने हत्यारों को पकड़ लिया. हम भी गए उनके घर पर अपने बच्चों को नौकरी दी.

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50 लाख का मुआवजा दिया , कन्हैया लाल का मामले में उसी रात से हमारी पुलिस से केस नेशनल इंटेलिजेंस एजेंसी ने ले लिया और उसके बाद यह हालत है कि 3 साल हो गए हैं अब तक केवल बयान हो रहे हैं . जज है ही नहीं क्या ? NIA की ड्यूटी नहीं थी, यह मामूली केस नहीं था अगर हमारे हाथ में होता तो हम ऑफिसर स्कीम में इस मामले को डील करते. आरोपियों को 6 महीने या 8 महीने में सजा होती चाहे फांसी होती या उम्र कैद यह हम नहीं जानते लेकिन सजा मिल जाती.

अमित शाह जयपुर आए थे उस दिन भी मैंने यह मामला उठाया था वह एक शब्द नहीं बोले, जब मैं मामला उठा रहा था जो इतना गंभीर रूप ले चुका था कि कुछ भी होना संभव था. मुझे शक होता है कि जो हत्यारे थे उनका ताल्लुक भाजपा से है यह मैं उस दिन से बोल रहा हूं क्या कारण है कि इसके इसको डाउन प्ले किया गया है अगर सजा हो जाती तो इन पर आरोप लगाते हैं कि इनके लोग थे इन पर आरोप लगे हैं.

गहलोत ने कहा कि हिंदू धर्म की बात करते हैं हिंदू मुस्लिम सिख इसाई सब है तभी तो देश अखंड है इंदिरा गांधी ने खाली स्थान नहीं बनने दिया राहुल गांधी के पिता और दादी शहीद हो गई उनको भारतीय पाठ पढ़ाया जाता है जुडिशरी हो कार्यपालिका हो या विधायक का हो जैसा देश में माहौल बनता है इस तरीके से कमेंट करते हैं. राहुल गांधी को पहचानने में लोगों को समय लगेगा उसके सवाल केवल डेट शीट में है किसी से दुर्भावना या करना से नहीं

शपथ पत्र तो इलेक्शन कमीशन दे राहुल गांधी तो संवैधानिक पद पर है वह तो संवैधानिक पद पर है अब तो इलेक्शन कमीशन को अगर लगता है कि राहुल गांधी ने जो बात कही वह सही नहीं है तो वह बताएं उसकी झेप मिटाने के लिए इलेक्शन कमीशन शपथ पत्र की बात कर रहा है.

आरएसएस और बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि जिन लोगों ने अपनी उंगली नहीं कटाई है उनका क्या अधिकार है तिरंगा यात्रा और ऐसी चीजों का अंग्रेजों का साथ दिया संविधान का विरोध किया यह तो फैक्ट है पूरी दुनिया जानती है आरएसएस तिरंगा नहीं लगती थी अपने कार्यालय में कभी नहीं.

तमिलनाडु में नेशनल एडुकेशन पॉलिसी की जगह अपनी पॉलिसी लागू करने पर बोले गहलोत अमित शाह गृहमंत्री है उनको हर बात सोच समझ कर बोलनी चाहिए क्योंकि वह जिस प्रकार से हिंदी की बात करते हैं हिंदी हम भी पढ़ते हैं अंग्रेजी का हमने हमेशा विरोध किया लेकिन आज ai इंटरनेट कंप्यूटर आ गए हैं नई पीढ़ी के लिए अंग्रेजी जरूरी है अब यह हिंदी की बात कर रहे हैं जो इशू उठा रहे हैं की अंग्रेजी बोलने वाले शर्मिंदा होंगे गृहमंत्री को मैं कहना चाहूंगा विनम्रता के साथ की यह सेंसेटिव इश्यू है दक्षिण के लोग आजादी के बाद से हिंदी का विरोध करते आ रहे हैं.

उस वक्त से आज 70 साल हो गए देश अखंड रहा एक रहा उन्होंने अपना हिंदी का इशू छोड़ दिया उनको क्यों आग लग रहे हैं देश के क्या गृहमंत्री को नहीं सोचना चाहिए कि देश के किसी भी हिस्से में आग लगती है तो उनको नहीं सोचना चाहिए की जिम्मेदारी किसकी होगी लेकिन उनके बारे में क्या बात करें जो मणिपुर को छोड़ सकते हैं अपने हाथ में तो उनको क्या कहा जाए मणिपुर में जो हमारा राज्य था उसमें जो हालात रहे वहां पीएम का नहीं जाना गृहमंत्री गए लेकिन हुआ क्या जो प्राथमिकता देनी थी मणिपुर को शांति स्थापित करने के लिए वह नहीं मिली क्या यह उनकी ड्यूटी नहीं थी.

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Ansh Raj

Ansh Raj

अंश राज, Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत है. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर पैनी नजर रखते हैं. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर की खबरों में खास दिलचस्पी. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनाव और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बयान पर नजर. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करने में मजा आता है. इसके अलावा कंटेंट को पैकेजिंग करके परोसना इनकी खासियत है. डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव. इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है और वर्तमान में मेरठ कॉलेज से LLB की पढ़ाई कर रहे हैं. खबरों की गंध सूंघने और उसे सबसे पहले, सबसे तेज परोसने का जुनून. यही अंश राज हैं
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