Rajasthan Politics: कांग्रेस नेताओं के सीएम भजनलाल शर्मा को लेकर दिए गए बयानों पर प्रदेश का सियासी पारा फिर गर्म हो गया है. सीएम के समर्थन में सोशल मीडिया पर भाजपा और कांग्रेस में जमकर वॉर चल रहा है.
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Rajasthan News: कुछ दिन पहले पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने ये बयान देकर सनसनी फैला दी थी कि सीएम भजनलाल शर्मा के खिलाफ उनकी ही पार्टी के नेता षड्यंत्र कर रहे हैं. गहलोत ने ये भी कहा था कि साजिशें दिल्ली से लेकर जयपुर तक हो रही हैं. गहलोत का बयान उस वक्त आया था, जिस दिन बीजेपी देशभर में संविधान हत्या दिवस मनाकर आम जनता के बीच आपातकाल के दौर में ढहाये गये जुल्मो सितम की यादें ताजा करने में जुटी थी. गहलोत के बयानों की गर्मी अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि अब मोर्चा गोविंद डोटासरा और टीकाराम जूली ने खोल लिया. आज दोनों ही नेताओं ने पूर्व में दिए अपने बयानों को दोहराया. डोटासरा बोले कि भजनलाल शर्मा पांच साल सीएम नहीं रह पायेंगे, तो जूली ने एक कदम आगे बढ़कर पूरी सरकार को ही आड़े हाथ ले लिया.
सत्ता पक्ष और विपक्ष में जुबानी जंग सिर्फ बयानों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि ये सोशल मीडिया के मोर्चे पर भी जमकर लड़ी जा रही है. कल कांग्रेस ने सीएम भजनलाल शर्मा के खिलाफ मुहिम छेड़ी, तो आज भाजपा ने जमकर जवाबी हमले बोले. सोशल मीडिया पर भजनलाल सरकार की उपलब्धियों का आम जनता ने खूब जिक्र किया. रीट की पारदर्शिता से परीक्षा, कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार, युवाओं को रोजगार देने में सरकार की अब तक की उपलब्धियों को वेरिफाइड यूजर्स ने ऐतिहासिक करार दिया. ईआरसीपी से लेकर यमुना जल समझौता तक पर सीएम भजनलाल सोशल मीडिया पर खूब छाये रहे. किसान सम्मान निधि में इजाफा किए जाने पर काश्तकारों की ओर से सीएम भजनलाल शर्मा को लोगों ने धन्यवाद दिया.
दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय पखवाड़े में आम जनता को मिल रहे फायदे पर भी सोशल मीडिया यूजर्स ने सरकार की तारीफों के पुल बांधे. सरकार के दस करोड़ पौधे लगाने और हरियालो राजस्थान में पीएम मोदी के अभियान एक पेड़ मां के नाम की भी खूब चर्चा रही. जहां तक सीएम की कुर्सी का सवाल है, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और प्रदेश के प्रभारी सीएम भजनलाल शर्मा के कामकाज की जमकर तारीफ कर चुके हैं. प्रभारी राधा मोहन अग्रवाल तो साफ कह चुके हैं. भजनलाल शर्मा आज सीएम हैं. कल भी रहेंगे. बीजेपी एक बार सीएम बनाती है, तो उसे काम करने का पूरा मौका मिलता है. यही वजह है कि बीजेपी के मंत्री हों या फिर विधायक अपने सीएम के साथ मजबूती के साथ खड़े हैं और यही बात कांग्रेस को रास नहीं आ रही.
बहरहाल, जिस बात की दूर-दूर तक कहीं कोई संभावनायें ही नजर नहीं आ रहीं, वहां कांग्रेस के दिग्गज बयानवीर बने हुए हैं. शायद धड़ों में बंटी कांग्रेस ने अपनी कमजोरी छुपाने के लिए ये नया राग अलापना शुरू किया है. जाहिर है कांग्रेस के नेताओं में आगे बढने की मची होड़ पार्टी के अनुशासन को तार-तार कर रही है, इसलिए मजबूरी में ही सही कांग्रेस अपने कुनबे की चिंता छोड़ भाजपा और सीएम को कोसने में लगी है. ऐसे में दोनों ही तरफ से सोशल मीडिया पर हमलों की बौछार है. हरावल दस्ते एक दूसरे पर शब्दों के जरिये धावा बोल रहे हैं. आखिर सियासत होती ही ऐसी है. अपनी कमजोरी छुपाने के लिए यहां विरोधी पर हमला बोल खुद को ताकतवर दिखाने की कोशिशें हमेशा से होती आई हैं. आगे भी होती रहेगी.
रिपोर्टर- बाबूलाल धायल
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